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अरिंदम चौधरी के खिलाफ एफआईआर, छात्र को खुदकुशी के लिए उकसाने का आरोप

Thu, 07 Jun 2018 09:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 07 Jun 2018 09:31 AM IST
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fir registered against iipm faculty arindam chaudhuri
अरिंदम चौधरी

आईआईपीएम के संस्थापक व प्रबंधन गुरु के नाम से चर्चित अरिंदम चौधरी के खिलाफ आलमबाग कोतवाली में एमबीए छात्र लवीश को खुदकुशी के लिए प्रेरित करने की प्राथमिकी कोर्ट के आदेश पर दर्ज कराई गई है।

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प्रभारी निरीक्षक का कहना है कि छात्र के पिता मनोज शर्मा की तरफ से दर्ज की गई शिकायत में अरिंदम चौधरी के साथ उसके सहयोगी विशाल को भी आरोपी बनाया गया है।
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प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि बरहा रोड निवासी मनोज ने वर्ष 2009 में लवीश को हजरतगंज के अशोक मार्ग स्थित आईआईपीएम में एमबीए के पाठ्यक्रम में दाखिला दिलाया था। बेटे की पढ़ाई के लिए उन्होंने विजया बैंक की पटेलनगर शाखा से सवा पांच लाख रुपये का शिक्षा ऋण लिया था।
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एक साल की पढ़ाई के बाद ही लवीश को पता चला कि आईआईपीएम फर्जी संस्थान है और उसे भारत सरकार से मान्यता नहीं मिली है। उसने परिवारीजनों को इसकी जानकारी दी तो पिता ने फीस वापस करने के लिए आईआईपीएम प्रबंधन से संपर्क किया।

बकौल मनोज, प्रबंधन ने फीस वापसी से इन्कार कर दिया, जिसके बाद उन्होंने न्यायालय में एक वाद दाखिल किया। न्यायालय ने अरिंदम चौधरी को पेश होने का आदेश दिया तो वह समझौता करने की कोशिश करने लगा।

अरिंदम ने मनोज व उनके बेटे लवीश को हवाई जहाज के दो टिकट भेजकर दिल्ली बुलवाया। यहां अरिंदम के सहयोगी विशाल ने पिता-पुत्र को समझाया। मनोज ने बेटे का कॅरिअर बर्बाद होने की बात कही तो विशाल ने कहा कि लवीश को आईआईपीएम में ही नौकरी दिला देगा।

लवीश ने तीन महीने तक आईआईपीएम दिल्ली में नौकरी की। इसके बाद उसे निकाल दिया गया। लवीश घर लौटा तो कॅरिअर और बैंक का ऋण चुकाने की चिंता में अवसादग्रस्त हो गया। परिवारीजन उसे समझाते रहे।

बीते 19 नवंबर को लवीश ने दी थी जान 

इस बीच 14 नवंबर 2017 को विशाल ने लवीश को फोन कर किसी भी प्रकार का समझौता न करने की बात कहते हुए उसे धमकाया। उसने कहा कि पुलिस-प्रशासन में अच्छी पहचान है। शिकायत करके भी कोई कार्रवाई नहीं करा पाओगे। यह सुनकर लवीश और परेशान हो गया। 19 नवंबर को उसने फंदे से लटककर जान दे दी। 

शिकायत के बावजूद पुलिस ने नहीं की थी कार्रवाई 

मनोज का कहना है कि अरिंदम और विशाल की वजह से ही उनके बेटे ने खुदकुशी की है। उन्होंने पुलिस से शिकायत की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दिया, जिस पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया गया। 

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