{"_id":"622471be6d41b955bd30ff60","slug":"fie-filed-in-bank-fraud-case-against-rohtas-group-in-lucknow","type":"story","status":"publish","title_hn":"लखनऊ: रोहतास ग्रुप पर सीबीआई का शिकंजा, दो एफआईआर दर्ज, सवा नौ करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में कार्रवाई","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम","slug":"crime"}}
लखनऊ: रोहतास ग्रुप पर सीबीआई का शिकंजा, दो एफआईआर दर्ज, सवा नौ करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में कार्रवाई
Sun, 06 Mar 2022 02:03 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 06 Mar 2022 02:03 PM IST
सार
सवा नौ करोड़ के बैंक फ्रॉड मामले में रोहतास ग्रुप पर सीबीआई ने शिकंजा कस दिया है। मामले में दो के खिलाफ कार्रवाई दर्ज की गई है।
विज्ञापन
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सवा नौ करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड मामले में सीबीआई ने रोहतास ग्रुप के प्रमोटर्स के खिलाफ दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। आईडीबीआई बैंक के उप महाप्रबंधक अनुराग वर्मा की तहरीर के आधार पर दर्ज हुए केस में 10 को नामजद किया गया है।
विज्ञापन
पहली एफआईआर में कहा गया कि 14 मार्च 2014 को आईडीबीआई बैंक ने रोहतास की कंपनी क्लेरियन प्रोजक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के लिए पांच करोड़ का लोन स्वीकृत किया। यह विभूतिखंड में 23,934 वर्गफीट जमीन के आधार पर दिया गया। कर्ज मांगने वालों ने बताया था कि जल्द एचडीएफसी बैंक से एनओसी लेकर दे देंगे, क्योंकि रोहतास ने प्रापर्टी पर वहां से भी लोन लिया था। यह एनओसी उस हिस्से के लिए लेनी थी, जिस पर आईडीबीआई ने लोन स्वीकृत किया था।
विज्ञापन
31 मार्च को क्लेरियन को लोन दे दिया गया। कुछ समय बाद कर्ज लेने वालों ने बैंक से अनुरोध किया कि लोन ग्रेटर नोएडा और गोमतीनगर के विभूति खंड स्थित दूसरी संपत्ति पर ट्रांसफर कर दिया जाए। बैंक ने इसे स्वीकार कर लिया। बाद में पता चला कि गोमतीनगर की संपत्ति बिल्डर ने पहले ही अखिलेश अग्रवाल को दे दी है।
विज्ञापन
संपत्ति अग्रवाल के कब्जे में थी, पर पंजीकरण नहीं हुआ था। इस तरह से बैंक से फ्रॉड कर लोन लिया गया है। बैंक ने 23 दिसंबर 2019 को कर्ज लेने वालों को घपलेबाज घोषित कर दिया। इसी तरह विभूतिखंड स्थित इसी प्रापर्टी पर 4.25 करोड़ का लोन रोहतास की ही कंपनी हाइब्रिड फार्म इनपुट्स लिमिटेड और पांच अन्य सह कंपनियों के नाम स्वीकृत किया गया।
31 मार्च को इसका भी भुगतान कर दिया गया। बैंक की जांच में सामने आया कि जो संपत्ति बैंक के पास गिरवी रखकर लोन लिया गया था, उसे पहले ही बेचा जा चुका था। सीबीआई ने हाइड्रिक फार्म इनपुट लिमिटेड के निदेशक दीपक रस्तोगी, पीयूष रस्तोगी, पंकज रस्तोगी, परेश रस्तोगी को नामजद किया है। हाइड्रिक फार्म इनपुट्स, रोहतास प्रोजक्ट लिमिटेड, फोरटेक बायो साइंस प्राइवेट लिमिटेड, एंड्स टाउन प्लानर, क्लेरियन प्रोजक्ट प्राइवेट लिमिटेड, रोहतास इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड व बैंक कर्मियों को आरोपी बनाया है।