गुंडाराजः हिस्ट्रीशीटर ने कोतवाल को गोली से उड़ाया
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हिस्ट्रीशीटर ने शहर कोतवाल की गोली मार कर हत्या कर दी। पुलिस टीम ने घेराबंदी कर आरोपी को तमंचे के साथ धर दबोचा। हत्या के आरोपी पर सात मुकदमे दर्ज हैं।
घटना की सूचना मिलते ही जिले में सनसनी फैल गई। डीएम समेत आला अफसर मौके पर पहुंचे। आवास-विकास कालोनी के सभासद राकेश गंगवार को 27 नवंबर को गोली मार दी गई थी।
इस मामले में बाग लकूला निवासी पप्पू कोरी उर्फ चंद्रपाल को आरोपी बनाया था। शनिवार शाम चार बजे पुलिस को सूचना मिली कि पप्पू अपने घर में है।
इस पर कोतवाल राजकुमार सिंह और एसएसआई हरीशचंद्र ने फोर्स के साथ उसके घर की घेराबंदी कर दी। पुलिस के घुसते ही पप्पू दूसरे गेट से भागने लगा।
वहां राजकुमार सिंह ने उसे रोकने की कोशिश की तो उसने तमंचे से गोली मार दी। गोली कोतवाल के सीने में जा लगी। वह लहूलुहान होकर गिर पड़े।
यह देख एसएसआई जवानों के साथ कोतवाल को लेकर लोहिया अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं कुछ देर बाद ही पुलिस टीम ने पप्पू कोरी को तमंचे के साथ धर दबोचा।
पिछले सप्ताह भी पकड़ा गया था पप्पू
कोतवाल की हत्या की जानकारी मिलते ही लकूला से लेकर लोहिया अस्पताल तक छावनी बना नजर आया। डीएम एनकेएस चौहान समेत आलाधिकारी लोहिया अस्पताल पहुंचे।
कोतवाल राजकुमार सिंह मूलरूप से रायबरेली जिले के सरैनी थाना क्षेत्र के दुधवन गांव के निवासी बताए जाते हैं।
सूत्रों की मानें तो पप्पू कोरी को पिछले सप्ताह शहर कोतवाली पुलिस ने ही एक मामले में दबोचा था, लेकिन सियासी पकड़ की वजह से उसे पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
शहर कोतवाल ने उसे हिदायत दी थी। इसके बाद भी जब सभासद पर जानलेवा हमले के मामले में उसका नाम सामने आया तो शहर कोतवाल खुद उसे पकड़ने निकल पड़े, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिसे वह जेल भेज कर सुधारना चाहते हैं वह उनकी ही जान का दुश्मन बन बैठेगा।
पप्पू पर दर्ज हैं हत्या समेत सात मामले
चंद्रपाल उर्फ पप्पू पर हत्या समेत सात मुकदमे दर्ज हैं। शातिर हाथ का काफी खुला हुआ था।
पप्पू ने जरायम की दुनिया में हत्या की वारदात से कदम रखा था।
सदर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कछियाना लिंजीगंज में प्राइवेट मोबाइल टावर पर लखीमपुर खीरी का मोहम्मद इकरार पुत्र मोहम्मद इबरार सुरक्षा गार्ड था। इससे विवाद होने पर पप्पू कोरी ने अपने साथी के साथ मिलकर 1 अक्तूबर 2013 को उसकी हत्या करने के बाद शव जलाने का प्रयास किया था।
इस मामले में पुलिस ने पप्पू कोरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पप्पू पर सबसे पहला मुकदमा वर्ष 1992 में हत्या का दर्ज हुआ था। इसके बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इसके बाद पप्पू पर वर्ष 1994 में जुआ, वर्ष 1996 में जानलेवा हमला, वर्ष 2013 में तमंचा, इसी साल सुरक्षागार्ड की हत्या और 27 नवंबर 2014 को आवास-विकास कालोनी के सभासद राकेश गंगवार को गोली मारने का मामला दर्ज हुआ।