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शाखाओं में ही पकड़ गए थे जाली नोट
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 20 Apr 2014 05:32 AM IST
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आईसीआईसीआई बैंक के करेंसी चेस्ट में मिले साढ़े ग्यारह करोड़ रुपये के जाली नोट बैंक की विभिन्न शाखाओं में ही पकड़ लिए गए थे।
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यह दीगर है कि बैंक की तरफ से इन नोटों की सूचना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को दी गई न ही पुलिस को।
एसएसपी प्रवीण कुमार का कहना है कि इसके पीछे कोई अपराधिक षड्यंत्र है या बैंक की लापरवाही इसकी जांच कराई जा रही है।
एसएसपी ने बताया कि आईसीआईसीआई बैंक के पास करेंसी की जांच के लिए अत्याधुनिक इंतजाम हैं।
बैंक की सभी शाखाओं में नोट सार्टिंग मशीनें लगी हैं जिनसे जमा करते वक्त ही नोटों की जांच कर ली जाती है। हालांकि कई बार इन मशीनों से भी एकाध जाली नोट छूट ही जाता है।
यही वजह है कि नोटों की करेंसी चेस्ट में एंट्री से पहले एक बार फिर जांच की जाती है।
बताते हैं कि बैंक के करेंसी चेस्ट में जो जाली नोट मिले हैं उन्हें बैंक की शाखाओं में ही जांच के दौरान पकड़ लिया गया था। नोट जब करेंसी चेस्ट आए तब भी जांच में पकड़ गए।
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इसके बावजूद बैंक की तरफ से उसी वक्त एफआईआर नहीं कराई गई।
आरबीआई की गाइड लाइन के मुताबिक नकली करेंसी पाए जाने पर उसी दिन आरबीआई को सूचना देनी होती है और चौबीस घंटे में संबंधित थाना में एफआईआर दर्ज करानी होती है।
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बैंक ने इस मामले में घोर लापरवाही बरती।
शाखाओं में नकली नोट मिलते रहे और बैंक ने आरबीआई और पुलिस को सूचना तक नहीं दी। आईसीआईसीआई बैंक के अफसरों ने ऐसा क्यों किया? इसके पीछे कोई साजिश है या लापरवाही? पुलिस इन्हीं तथ्यों की पड़ताल कर रही है।
असली करेंसी को जाली बताकर अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत से रकम डकारने की भी चर्चा है।
गौरतलब है कि आईसीआईसीआई बैंक के गोखले मार्ग स्थित करेंसी चेस्ट में 11,43,86,230 रुपये के कुल 3,26,422 जाली नोट मिले थे।
बैंक के रीजनल हेड (करेंसी ऑपरेशंस उत्तर प्रदेश उत्तराखंड) मनीष पांडे ने छह अप्रैल को हजरतगंज कोतवाली में 10,77,87,840 रुपये की जाली करेंसी मिलने की एफआईआर दर्ज कराई थी।
शेष रकम की रिपोर्ट पहले कराई जा चुकी थी।
बैंक का कहना था कि जाली करेंसी फरवरी 2006 से मार्च 2013 के बीच जांच में पाई गई थी। एफआईआर इतने विलंब से क्यों हुई। इसका संतुष्टिजनक जवाब देने के बजाए बैंक अफसरों ने पुलिस के सिर पर ठीकरा फोड़ दिया था।