पारा से लापता बालक का सिर नाले में मिला

विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 24 Jan 2014 09:41 AM IST
dead body found in lucknow
माल से लापता पांच वर्षीय बालक शेर बहादुर का सिर बृहस्पतिवार सुबह एक बगीचे के पास नाले में मिला। वह मंगलवार सुबह शौच के लिए घर से निकला था।

सुबह खेतों में खाद डालने गए लोगों ने बालक की चप्पल और गीली मिट्टी में घसीटने के निशान देख तलाश शुरू की तो उसका सिर मिला।

शरीर के अन्य हिस्सों का पता नहीं चल सका है। पुलिस सियार अथवा अन्य जानवरों पर बालक को खींच ले जाने और निवाला बनाने की आशंका जता रही है। परिवारीजनों ने किसी भी रंजिश से इन्कार किया है।

जगतीखेड़ा गांव के किसान सुबह आठ बजे खेतों में खाद डाल रहे थे। तभी किसी ने बालक की चप्पल पड़ी देखी। बुधवार रात बारिश के चलते खेतों की मिट्टी गीली थी।

जहां शेर बहादुर की चप्पल मिली, वहां से कुछ दूर पर किसी को खींचकर ले जाने के निशान थे। आशंकित ग्रामीण निशान के सहारे खोजबीन करते हुए आगे बढ़े तो शेर बहादुर की अंडरवियर और शर्ट-पैंट के बाद एक बगीचे के पास नाले में उसका सिर मिल गया।

ग्रामीणों ने उसके ताऊ रामकृष्ण रैदास को सूचना दी तो घर में कोहराम मच गया। सूचना पर एसओ माल संजय कुमार फोर्स लेकर मौके पर पहुंचा गए। एसओ ने बताया कि सिर खोखला था।

काफी खोजबीन के बाद भी शरीर के बाकी अंग नहीं मिले। पुलिस ने रामकृष्ण और उसके परिवार के लोगों से पूछताछ की, लेकिन उन्होंने किसी से रंजिश या झगड़े की बात से इन्कार किया।

बकौल पुलिस, आसपास सियार व अन्य जंगली जानवर घूमते रहते हैं। जिन हालात और परिस्थितियों में सिर मिला है, उससे यह आशंका जताई जा रही है कि कोई जानवर ही बालक को उठा ले गया होगा।

हालांकि, ग्रामीणों ने इससे इन्कार किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सियार व अन्य जंगली जानवर कई साल से हैं, लेकिन आज तक किसी बच्चे को जानवर ने निवाला नहीं बनाया।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि अगर बालक को जानवरों ने अपना निवाला बनाया है तो यह बारिश के बाद की घटना होगी, क्योंकि निशान मिट्टी गीली होने के बाद पडे़ हैं।

यानी इसके पहले ही शेर बहादुर की मौत हो चुकी थी। एसओ ने कहा कि मामले की पड़ताल की जा रही है। वहीं, रामकृष्ण रैदास के कोई संतान नहीं थी।

इसलिए उसने तीन साल पहले अपने छोटे भाई व जलौली गांव निवासी गोपाल रैदास के बेटे शेर बहादुर को गोद लिया था। शेर बहादुर के अलावा गोपाल के एक बड़ा बेटा विजय बहादुर (7) है।

रामकृष्ण जगतीखेड़ा में अपनी ससुराल में ही रहता है। हाल ही में रामकृष्ण की सास मुहाना ने उसके नाम पर वसीयत लिखी थी। इस वसीयत से किसे हानि-लाभ पहुंच रहा था।

कहीं इसी वजह से तो गोद लिए गए बालक की हत्या नहीं की गई। पुलिस इस बिंदु पर भी छानबीन कर रही है।

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