सीबीआई से बचकर भागे दवा कारोबारी की चौथी मंजिल से गिरकर दर्दनाक मौत
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लखनऊ के विकासनगर में बुधवार सुबह सीबीआई की रेड से बचकर भागे दवा कारोबारी 55 वर्षीय प्रदीप अग्रवाल की चौथी मंजिल से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। प्रदीप के खिलाफ रांची में धोखाधड़ी का एक केस दर्ज है जिसकी जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई की टीम उसे पकड़ने पहुंची तो वह बालकनी की तरफ भागा। इसी दौरान लड़खड़ाकर वह नीचे गिर पड़ा। परिवारीजन उसे ट्रामा सेंटर ले गए जहां मौत हो गई। प्रदीप के परिवार के सदस्य उसके खिलाफ दर्ज केस और सीबीआई की रेड के बारे में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
एसओ सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदीप मूलरूप से देवरिया का है और यहां विकासनगर के रोहित टॉवर-2 के फ्लैट नंबर 303 व 304 में पत्नी संगीता, बेटा अंकित और बहू आकांक्षा के साथ रहता था। उसकी गुडंबा के कुर्सी रोड पर एनयू हरबल के नाम से फैक्ट्री है।
मंगलवार को सीबीआई के अवर निरीक्षक रोमी पाल के नेतृत्व में एक टीम लखनऊ आई और विकासनगर पुलिस से संपर्क कर प्रदीप के खिलाफ वारंट होने की जानकारी दी। अवर निरीक्षक ने प्रदीप की गिरफ्तारी के लिए पुलिस फोर्स मांगी जिस पर थाना का एक दरोगा, दो पुरुष व दो महिला कांस्टेबल उन्हें दे दिए गए।
सुबह करीब छह बजे सीबीआई और विकासनगर पुलिस की टीम रोहित टॉवर पहुंची। सीबीआई के आने का पता चलते ही प्रदीप घबरा गया और अपने फ्लैट नंबर 304 की बालकनी में छिप गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सीबीआई की टीम ने फ्लैट खंगाला लेकिन वह नहीं मिला। कुछ देर बाद टीम लौट गई। इसी बीच बालकनी में छिपा प्रदीप लड़खड़ाकर नीचे गिर पड़ा। फ्लैट में मौजूद उसके परिवारीजनों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
गिरने की सूचना मिली तो मच गया हड़कंप
अपार्टमेंट में ही रहने वाली सुधा सक्सेना ने पुलिस कंट्रोलरूम को फोन कर किसी के गिरने की सूचना दी तो हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि गंभीर रूप से घायल व्यक्ति वही प्रदीप अग्रवाल है जिसकी तलाश में सीबीआई टीम ने रेड की थी। परिवारीजनों की मदद से आनन-फानन प्रदीप को ट्रामा सेंटर ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
धोखाधड़ी के केस में परिवारीजन भी नामजद, पत्नी जा चुकी है जेल
धोखाधड़ी के केस में प्रदीप के अलावा उसकी पत्नी संगीता, भाई प्रवीण व उसकी पत्नी प्रीति भी नामजद हैं। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि प्रदीप ने एनयू हरबल के नाम से रांची में फैक्ट्री खोली थी जिसके लाइसेंस को लेकर कुछ समस्या चल रही थी। लाइसेंस रिन्यू कराए बगैर प्रदीप दवाएं बना रहा था।
सूत्रों का कहना है कि उस पर नकली दवाएं बनाने का भी आरोप था। इस मामले में वर्ष 2009 में केस दर्ज कराया गया था जिसकी जांच सीबीआई कर रही थी। संगीता को बीते वर्ष गिरफ्तार करके जेल भेजा गया था। फिलवक्त वह जमानत पर जेल से छूटकर आई थी।
वारंट पर पड़ा था दवा कारोबारी के तीसरे फ्लैट का पता
पुलिस सूत्रों ने बताया कि दवा कारोबारी के पास रोहित टॉवर-2 में तीन फ्लैट 301, 303 व 304 हैं। वह अपने परिवार के साथ 303 व 304 नंबर में रहता था। सीबीआई जो वारंट लेकर आई थी, उस पर फ्लैट नंबर 301 का पता लिखा था। सीबीआई और पुलिस की टीम सबसे पहले फ्लैट नंबर 301 में गई। टीम वहां रह रहे लोगों से पूछताछ कर रही थी तभी प्रदीप को भनक लग गई। इससे पहले सीबीआई टीम उसके फ्लैट में पहुंचती, वह भागकर बालकनी में छिप गया।