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नम आंखों से मौलाना डॉ. कल्बे सादिक को दी अंतिम विदाई, उमड़ी भीड़, डिप्टी सीएम सहित अलग-अलग धर्मों के लोग पहुंचे

Wed, 25 Nov 2020 02:20 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Wed, 25 Nov 2020 02:20 PM IST
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Cremation of maulana kalbe Sadiq.
कल्बे सादिक की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़। - फोटो : amar ujala
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के उपाध्यक्ष मौलाना डॉक्टर कल्बे सादिक को इमामबाड़ा गुफरानमआब में बुधवार को छलकते आंसुओं बीच सुपुर्द-ए-खाक किया गया। उनकी जनाजे की नमाज यूनिटी कॉलेज में शिया समुदाय के सर्वोच्च धर्मगुरु आयतुल्लाह अली खामेनाई के भारत के प्रतिनिधि आयतुल्लाह मेहंदी मेहंदीपुर ने अदा कराई। नमाज-ए-जनाजा में हजारों की संख्या में मौलाना के चाहने वाले शामिल हुए। इसके बाद हुसैनाबाद के ऐतिहासिक घंटाघर के सामने टीले वाली मस्जिद के इमाम मौलाना फजले मन्नान रहमानी ने दोबारा नमाज-ए-जनाजा अदा कराई। मौलाना की अंतिम यात्रा में शिया-सुन्नी सहित सभी धर्मों के सैकड़ों लोगों ने शामिल होकर नम आंखों से खिराज-ए-अकीदत पेश की।
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मौलाना डॉ. कल्बे सादिक का एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी में इलाज के दौरान मंगलवार रात 10:00 बजे निधन हो गया था। वह 83 साल के थे। उन्हें निमोनिया था और सांस लेने में परेशानी हो रही थी। मौलाना के इंतकाल की खबर फैलते ही उनके आखरी दीदार के लिए रात से ही एरा मेडिकल कॉलेज पहुंचने वालों की भीड़ जुटने लगी थी। पूरी रात अस्पताल के बाहर चाहने वालों का जमावड़ा लगा रहा। सुबह उनके जनाजे को तहसीनगंज स्थित यूनिटी कॉलेज लाया गया, जहां हजारों की तादाद में लोगों की भीड़ जुटने लगी। चाहने वालों ने कॉलेज पहुंकर नम आंखों से मौलाना को पुरसा पेश किया। इस दौरान प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा सहित ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, मनकामेश्वर मंदिर के महंत देव्यागिरी सहित हर धर्म के लोगों ने डॉ. कल्बे सादिक को नजराना-ए-अकीदत पेश किया। उन्होंने मौलाना के परिवार से मुलाकात कर अपने गम का इजहार किया और उनके बेटों को ढांढस बंधाया।
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इसके बाद यूनिटी कॉलेज से मौलाना कल्बे सादिक का जनाजा अपने अंतिम सफर के लिए रवाना हुआ। अलम मुबारक के साये में मौलाना का जनाजा हजारों लोगों खासकर महिलाएं व बच्चों के जनसैलाब के बीच छोटा इमामबाड़ा पहुंचा। इसके बाद जनाजे को इमामबाड़े में ले जाया गया, फिर जनाजा हुसैनाबाद के ऐतिहासिक घंटाघर से पीर बुखारा होता हुआ कोनेश्वर चौराहे पहुंचा, जहां से चौक चौराहे, चरक चौराहा होता हुआ चौक सब्जी मंडी होता हुआ इमामबाड़ा गुफरानमआब पहुंचा। इमामबाड़े में आयतुल्लाह मेहंदी मेहंदवीपुर ने मजलिस को खिताब किया। आयतुल्लाह ने फारसी में मजलिस पढ़ी, जिसको दिल्ली से आए मौलाना तकी ने उर्दू में अनुवाद किया। मजलिस आयतुल्लाह ने डॉ. कल्बे सादिक की वसीयत बयां करते हुए जब मजलिस पढ़ी, तो उनके चाहने वालों के रोने की सदाएं बुलंद हो उठीं।
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चचा की तालीमी खिदमात को नहीं भुलाया जा सकता : मौलाना कल्बे जवाद

मजलिसे उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना कल्बे जवाद नकवी अपने चचा की तदफीन में शामिल नहीं हो सके। वह कश्मीर में थे। तदफीन के बाद इमामबाड़ा पहुंचा मौलाना ने मजलिस को खिताब किया। मौलाना ने कहा कि  हमारे मुहतरम चचा का निधन न केवल परिवार के लिए बल्कि पुरी कौम के लिए बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई नहीं की जा सकती। मेरे चचा मौलाना कल्बे सादिक नकवी एक तारीख़ साज इंसान थे। लोगों के लिए शिक्षा और सेवा के उनके प्रयासों को हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने वर्तमान शताब्दी को अपनी सेवाओं से प्रभावित किया है और युवा पीढ़ी पर उनकी शैक्षिक उपलब्धियों का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि मेरे चचा मौलाना कल्बे सादिक के कारनामे बेमिसाल हैं और उन्हें सुरक्षित रखना और उनके शैक्षिक मिशन को और विकसित करना आवश्यक है। मौलाना ने कहा कि चचा मोहतरम के जनाजे में इतनी बड़ी भीड़ का आना उनकी लोकप्रियता का प्रमाण है। मजलिस में मौलाना हुसैन मेहदी हुसैनी, मौलाना मोहसिन तकवी, मौलाना नईम अब्बास नोगनवी, मौलाना निसार अहमद जैनपुरी, मौलाना तकी हैदर नकवी, मौलाना सफदर हुसैन जौनपुरी, मौलाना तसनीम मेहदी जैदपुरी, मौलाना रजा हुसैन आदि मौलाना शामिल रहे।

पूरे रास्ते किया जनाजे का इंतजार
डॉ. कल्बे सादिक के जनाजे को कांधा देने के साथ आखिरी बार दीदार करने की चाहत में पूरे रास्ते चाहने वालों का हुजूम जमा रहा। लोग पहले से ही सड़क किनारे खड़े होकर जनाजे के आने का इंतजार कर रहे थे। हुसैनाबाद रोड से लेकर चौक तक और चरक चौराहे से लेकर सुभाष मार्ग तक भीड़ एकत्र रही। जनाजे को करीब आता देख हर कोई अंतिम विदाई देने के लिए ताबूत को कंधा देने को बेकरार हो उठा। भीड़ में पुरुषों के अलावा बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे रोते हुए आगे बढ़ रहे थे।

पर्यटकों के लिए बंद रही भूलभुलैया
मौलाना के इंतकाल के गम में हुसैनाबाद ट्रस्ट ने अपनी सभी ऐतिहासिक इमारतें बंद रखी। बुधवार को बड़ा इमामबाड़ा, छोटा इमामबाड़ा व पिक्चर गैलरी पर्यटकों के लिए बंद रहीं। ट्रस्ट के सचिव व नगर मजिस्ट्रेट सुशील प्रताप सिंह ने शोक सभा का आयोजन कर मौलाना को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर ट्रस्ट के अधिकारी व कर्मचारी सहित इमामबाड़े के गाइड भी मौजूद रहे।

गम में बंद रहे बाजार
डॉ. कल्बे सादिक के इंतकाल की खबर के बाद पुराने शहर के कई बाजार बुधवार को बंद रहे। एक ओर जहां चौक व नक्खास की दुकानें बंद रहीं, तो वहीं अकबरी गेट व बिल्लौचपुरा स्थित मीट कारोबारियों ने भी अपना कारोबार बंद रखा। हर कोई उनके परिवार के गम में शामिल था। कुरैश समाज के नेता शहाबउद्दीन कुरैशी ने शोक सभा का आयोजन कर मौलाना को पुरसा पेश किया।  

दिखी एकता-भाईचारे की मिसाल

डॉ. कल्बे सादिक को खिराज-ए-अकीदत करने वालों में सभी धर्म के लोग शामिल रहे। पूरी उम्र एकता का पैगाम देने वाले डॉ. कल्बे सादिक के जनाजे में फिर एक बार शिया-सुन्नी ही नहीं, बल्कि हिंदू-मुस्लिम सहित सभी धर्मों के बीच एकता व भाईचारे की झलक दिखाई दी। इमाम-ए-जुमा मौलाना कल्बे जवाद, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी, कांग्रेसी नेता सिराज मेहंदी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, स्वामी सारंग, भाजपा नेता बुक्कल नवाब, मौलाना सैफ अब्बास, मौलाना फिरोज हैदर, मौलाना यासूब अब्बास, मोमिन अंसार सभा के अध्यक्ष अकरम अंसारी, काजी-ए-शहर मुफ्ती अबुल इरफान मियां फरंगी महली, डॉ. कौसर उस्मान, दादा मियां के मुतवल्ली फरहम मियां, अल इमाम वेलफेयर सोसाइटी इमराम सिद्दीकी व मजलिस तहरीक-ए-मिल्लत के महासचिव मोहम्मद हनीफ खान।

इतेहाद के सच्चे पेरोकार
डॉ. कल्बे सादिक ने अपनी पूरी जिंदगी कौमी एकता और इतेहाद कायम करने में लगा दी। उन्होंने हमेशा शिया-सुन्नी और हिंदू-मुस्लिम एकता का पैगाम दिया। धर्म और जाति से ऊपर उठकर डॉ. कल्बे ने सादिक आपसी भाईचारा और गंगा-जमुनी तहजीब पर जोर दिया। उनका जीवन हर भारतीय के लिए एक मिसाल है। खासकर आज के समय में जब हिंदू-मुस्लिम के बीच की खाई लगातार गहरी होती जा रही है। उनके जीवन को देखे तो न जाने ऐसे कितने की उदाहरण नजर आते हैं, जब उन्होंने पुराने शहर में बढ़ते शिया-सुन्नी फसाद को खत्म करने के लिए अहम किरदार निभाया।

सुन्नी के पीछे पढ़ी नमाज, तो बड़े मंगल में बांटी पूड़ी
जब भी शहर की फिजा गर्म हुई डॉ. कल्बे सादिक ने आगे आकर अपने किरदार से लोगों को साथ लेकर आगे चलने का काम किया। एक नहीं, कई बार डॉ. सादिक ने शिया-सुन्नी के दरमियान इतेहाद कायम करने के लिए उन्होंने ऐशबाग ईदगाह व इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद सहित कई जगह सुन्नी आलिमेदीन के पीछे नमाज अदा की, तो वहीं हनुमान जंयती पर होने वाले बड़े मंगल में हजरतगंज स्थित इमामबाड़ा सिब्तैनाबाद के पास मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्यागिरि के साथ उन्होंने भक्तों में पूड़ी-सब्जी बांटी। शिया-सुन्नी एक साथ नमाज अदा करने के लिए शोल्डर टू शोल्डर की मुहिम का आगाज कर इमामबाड़ा शाहनजफ में ईद-उल-अजहा की नमाज का सेहरा भी मौलाना के सिर जाता है । वहीं, यहियागंज गुरुद्वारे में प्रोग्राम हुआ तो वहां भी पहुंच कर सब के आकर्षण का केंद्र बने। क्रिसमस के अवसर पर शहर के गिरिजा घरों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए सर्व धर्म समभाव की बेहतरीन मिसाल पेश की। लखनऊ जो शिया सुन्नी विवादों की वजह से देश ही नहीं बल्कि विश्व में बदनाम रहा वहां इन दोनों समुदायों की संयुक्त नमाज ए ईदुल अजहा की शुरुआत का सेहरा भी डॉक्टर साहब के सिर ही जाता है।इसी तरह उन्होंने हर कौम और मिल्लत के लोगों की सहायता की। शिक्षा के साथ उन्होंने कई गरीब लोगों को रोजगार दिया।

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में थे शियों की आवाज
मुसलमानों की सबसे बड़ी धार्मिक तंजीम ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में डॉ. कल्बे सादिक ने शिया समुदाय की नुमाईंदगी की। वह बोर्ड में एकलौते शिया धर्मगुरु थे, जो बोर्ड की वर्किंग कमेटी में थे। डॉ. सादिक बोर्ड में लंबे समय से उपाध्यक्ष थे। वैसे तो बोर्ड में सदस्य के तौर पर मौलाना कल्बे जवाद भी शामिल हैं, लेकिन जब भी बोर्ड की अहम बैठकें होती थीं, तो डॉ. सादिक ही शामिल होते थे। इसलिए बोर्ड में मौलाना की बड़ी अहमियत थी। वहीं बोर्ड में रहकर शिया समुदाय की आवाज बनते थे। वहीं, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अपने ट्वीटर हैंडल पर ट्वीट कर मौलाना को खिराज-ए-अकीदत पेश की।

सीएए व एनआरसी के भी विरोध में थे मौलाना
पिछले दिनों जब देशभर में सीएए व एनआरसी के खिलाफ जब प्रदर्शन चल रहा था। तब अपनी बीमारी के बावजूद व्हीलचेयर पर लखनऊ के ऐतिहासिक घंटाघर पहुंचकर मौलाना ने महिलाओं के प्रदर्शन का समर्थन किया था। मौलाना ने बेबाक अंदाज में केंद्र व प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि ये देश किसी एक-दो लोगों की मर्जी से नहीं चलेगी, बल्कि संविधान से चलेगा। उन्होंने  कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा था कि सीएए व एनआरसी काला कानून है, इसे वापस लिया जाना चाहिए। किसी को किसी से डरने की जरुरत नहीं है। जुल्म करने वाला ज्यादा दिन बाकी नहीं रहता।

विज्ञान का लेते थे सहारा
डॉ. कल्बे सादिक वैज्ञानिक गणना के आधार पर रमजान और ईद के चांद का एलान पहले ही कर देते थे, ताकि मुसलमानों में चांद को लेकर कोई असमंजस की स्थिति न रहे और देश का मुसलमान एक ही दिन रोजा रखे और ईद की खुशियां मनाएं। इसके बावजूद जब कभी भी असमंजस की स्थिति पैदा हुई तो डॉ. कल्बे सादिक ने कई मौको पर शिया-सुन्नी के बीच चांद को लेकर रजामंदी कराई। एक बार तो वह ऐशबाग ईदगाह पहुंच गए और तबतक नहीं गए जबतक मौलाना खालिद रशीद ने चांद का एलान नहीं कर दिया।

धर्मगुरु कल्बे सादिक के निधन पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह दुखी
लखनऊ। लखनऊ के सांसद और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे सादिक के निधन पर दुख जताया है। भाजपा महानगर महामंत्री पुष्कर शुक्ला ने बताया कि रक्षामंत्री ने शोक संदेश में कहा है कि कल्बे सादिक ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे। हमेशा समाज में भाईचारे को मजबूत करने पर बल दिया। मौलाना कल्बे सादिक एक नेक और अजीम शख्सियत थे। इस दु:ख की घड़ी में उनके परिवार और चाहने वालो के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद अहमद पटेल के अचानक निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक बहुत ही सुलझे हुए नेता थे। उन्होंने अपनी पार्टी और जनता के लिए सराहनीय योगदान दिया। अहमद भाई ने पार्टी लाइन से ऊपर उठकर अपने मित्र बनाए।
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