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कोरोना का साइड इफेक्ट, 93 फीसदी ओला-उबर को नहीं मिल रहीं सवारियां

Sat, 13 Jun 2020 04:35 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 13 Jun 2020 04:35 PM IST
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Covid 19 effect on ola uber taxi business
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
लखनऊ में बीते एक जून से ओला-उबर का संचालन भले ही शुरू हो गया है, लेकिन चालकों को सवारियां मुश्किल से मिल रही हैं। हालत यह है कि सिर्फ सात फीसदी लोग ही टैक्सी बुक कर रहे हैं। 93 फीसदी चालक ग्राहकों के इंतजार में 12-12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं। लोग संक्रमण की आशंका के चलते टैक्सी बुक करने से कतरा रहे हैं।
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कैब ओनर चालक वेलफेयर समिति उप्र के अध्यक्ष आरके पांडे ने बताया कि चालकोें की इतनी कमाई भी नहीं हो पा रही कि वे घर का राशन ला सकें। उन्हें सरकार से भी कोई मदद नहीं मिल रही है। वहीं परिवहन विभाग चालान काटकर उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है। उन्होंने बताया कि राजधानी में 12 हजार गाड़ियां ओला-उबर से जुड़ीं हैं।
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इसमें से सिर्फ पांच से सात फीसदी चालकों को ही बुकिंग मिल पा रही है, जबकि आम दिनों में एक से सवा लाख यात्री रोजाना सफर करते थे। वहीं बाइक टैक्सी वालों की हालत और भी खराब है। राजधानी में करीब 2000 बाइक टैक्सी हैं, लेकिन बुकिंग नहीं होने से उनके लिए जीविका का संकट हो गया है। 
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न गाड़ियां सैनिटाइज हो रहीं, न मिल रहे मास्क

ओला-उबर टैक्सी चालक राकेश सिंह ने बताया कि वह पिछले तीन साल से टैक्सी चला रहे हैं। कोरोना काल में ओला-उबर कंपनियां भी कोई मदद नहीं कर रही हैं। न तो गाड़ियों को सैनिटाइज कराया जा रहा है न ही चालकों को मास्क दिए जा रहे हैं। ऐसे में ग्राहक टैक्सी में सफर से कतराएंगे ही।   

चालान नहीं रुका तो एसोसिएशन विरोध प्रदर्शन के साथ करेगा घेराव
आरके पांडे ने बताया कि वाहनों के लगातार चालान काटने से भी चालक बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि जब केंद्रीय परिवहन विभाग की ओर से टैक्सी से जुड़े कागजों की वैलिडिटी बढ़ाकर 30 सितंबर कर दी गई है तो ऐसे में रिन्यूअल वगैरह को लेकर चालान काटना दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर इसे रोका नहीं गया तो एसोसिएशन के बैनर तले चालक विरोध-प्रदर्शन व घेराव करेंगे।

चालकों की डिमांड, माफ हो रोड टैक्स 

ओला-उबर चालक पिछले तीन माह से लॉकडाउन के चलते बेरोजगार थे। अब जब टैक्सी को अनुमति मिल गई है तो उन्हें यात्री नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उनके लिए रोड टैक्स, फिटनेस के भी पैसों का संकट खड़ा हो गया है। चालकों की मांग है कि सरकार उनका रोड टैक्स माफ करें। 

ऑटो में तीन सवारी, टैक्सी में  सिर्फ दो की अनुमति
एसोसिएशन अध्यक्ष आरके पांडे ने बताया कि सरकार ने कोरोना के चलते ऑटो में तीन सवारी और टेंपो में छह सवारी बैठाने की अनुमति दी है। वहीं दूसरी तरफ टैक्सी में सिर्फ दो यात्रियों की अनुमति दी गई। यह भेदभाव नहीं तो और क्या है?
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