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259 मामले निपटे: नासमझी से मुरझाए रिश्तों को समझदारी से सींचा, तलाक का इरादा लेकर आए थे पर...
Mon, 22 May 2023 02:39 PM IST
ishwar ashish
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
माई सिटी रिपोर्टर, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 22 May 2023 02:39 PM IST
सार
जिन रिश्तों में तलाक तय था वो फिर से बन गए। कुछ रिश्तेदारों के बहकावे में आकर तो कुछ गलतफहमियों में आकर रिश्ता तोड़ने जा रहे थे। कोर्ट के दखल के बाद घर उजड़ने से बच गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
कहीं रिश्तेदारों के बहकावे में आकर तो कहीं छोटी-छोटी गलतफहमियों के कारण पारिवारिक न्यायालय तक पहुंचे रिश्तों के कई विवाद खत्म हो गए। कोर्ट ने सात वचनों का महत्व समझाया तो तलाक का इरादा भी बदल गया। जिम्मेदार अभिभावक की तरह अदालत के न्यायाधीशों ने प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता में 259 मामलों का निपटारा किया। 29 जोड़े अदालत से फिर से साथ रहने की कसम खाकर विदा हुए। दो ऐसे मामले जिसमें तलाक तय था, वो रिश्ता भी बच गया।
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छुट्टी के दिन भी सभी जज अपनी-अपनी कोर्ट में सुनवाई कर रहे थे। एक कक्ष में सुनवाई पूरी होने पर माहौल एकदम खुशनुमा हो गया। एक-दो नहीं बल्कि पांच जोड़े एक दूसरे को फूलों की माला पहनाकर मुंह मीठा करा रहे थे। इनमें से सबसे पुराना मामला निशातगंज निवासी पति-पत्नी का था।
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2013 से अलग रह रहे दोनों पक्षों ने माना कि वे लोगों के कहने में आ गए थे, पर अब झगड़ा नहीं करेंगे। एक अन्य कक्ष में एमए बीएड कर चुकी पत्नी और मार्केटिंग जॉब करने वाले पति अपने ढाई साल के बेटे के साथ खेल रहे थे। पति ने कहा कि हमसे भूल हो गई थी, पर मामला संभल गया। इसी तरह एक नहीं बल्कि 29 जोड़ों ने एक दूसरे को माला पहनाकर अदालत को शुक्रिया कहते हुए विदाई ली।
टूटते रिश्तों को बचाने का रिकॉर्ड
पारिवारिक न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद्म कीर्ति कहते हैं कि 259 मामले अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इससे पहले 150 से कुछ अधिक मामले ही निपटाए जा सके थे। आमतौर पर कोर्ट में दायर वाद रिश्ता खत्म करने के लिए होते हैं। अदालत ने सबको सात वचनों की याद दिलाकर रिश्ता ही नहीं बल्कि कई परिवार टूटने से बचा लिया।
यहां तय था तलाक, अब रहेंगे साथ-साथ
कोर्ट परिसर में चल रही सुनवाई में दो जोड़े ऐसे भी थे, जिन्होंने परस्पर तलाक की अर्जी दी थी। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव कहते हैं कि ऐसे मामलों में तलाक तय होता है। मगर न्यायालय के समझाने पर दोनों ने अपनी गलती मानी और तय किया कि अब साथ-साथ रहेंगे।
अनूठी पहल : सरस्वती पूजन के साथ शुरुआत
पारिवारिक न्यायालय ने आज एक अनूठी पहल की। पहले सरस्वती पूजन किया। इस दौरान बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पद्म कीर्ति समेत सभी सदस्य, प्रधान न्यायाधीश बीरेंद्र कुमार सिंह समेत सभी न्यायाधीश मौजूद थे। अध्यक्ष ने कहा कि विद्या बुद्धि की देवी की आराधना कर सभी को सद्बुद्धि की प्रार्थना की गई, ताकि घर-परिवार टूटने से बच जाएं।