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विवेक तिवारी हत्याकांड: गिड़गिड़ाता रहा बर्खास्त सिपाही, मांग ठुकराकर कोर्ट ने सुनाई ऐसी सजा; जुर्माना भी लगा

Tue, 22 Sep 2026 09:12 AM IST
Bhupendra Singh अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: Bhupendra Singh Updated Tue, 22 Sep 2026 09:12 AM IST
सार

विवेक तिवारी हत्याकांड में कोर्ट ने दोषी बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी की मांग ठुकरा दी। उसे 10 साल कैद की सजा सुनाई। साथ ही 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। आगे पढ़ें पूरी खबर...

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court sentenced dismissed constable Prashant Chaudhary to 10 years of imprisonment In Vivek Tiwari murder case
सजा सुनाई जाने के बाद दोषी बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजधानी लखनऊ में एपल कंपनी के एरिया मैनेजर विवेक तिवारी की गोली मारकर हत्या के मामले में सोमवार को दोषी बर्खास्त सिपाही प्रशांत चौधरी को 10 साल कैद की सजा सुनाई गई। उस पर 20 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया गया। कोर्ट में दोषी ठहराए जाने के बाद प्रशांत ने कम सजा देने की मांग की थी। उसने अपनी परेशानियों और पारिवारिक परिस्थितियों के बारे में बताया। उधर, अभियोजन ने उसे अधिकतम सजा देने की मांग की थी। 

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सजा के प्रश्न पर सुनवाई के समय प्रशांत ने कहा कि उसकी उम्र मात्र 36 वर्ष है। घर में वृद्ध माता-पिता के अलावा अविवाहित भाई है जो उनके साथ रहता है। अदालत को बताया कि इस मुकदमे के कारण पत्नी राखी ने वर्ष 2023 में उसे तलाक दे दिया।

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करीब आठ साल से जेल में था दोषी

प्रशांत ने यह भी कहा था कि उसका न तो आपराधिक इतिहास रहा है और न ही किसी अदालत से उसे दोष सिद्ध किया गया है। 28 सितंबर 2018 को घटना के बाद ही उसे गिरफ्तार कर लिया गया और वह करीब आठ साल से जेल में है। अदालत से अनुरोध किया कि उसे जेल में बिताई गई अवधि की सजा देकर छोड़ दिया जाए।

दूसरी ओर एडीजीसी और वादिनी के अधिवक्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अभियुक्त ने बेहद निर्दयीपूर्ण तरीके से एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की है। इन विषम परिस्थितियों में दंड अधिक से अधिक होना चाहिए। इसका कारण है कि आरोपी पुलिस विभाग में कार्यरत था। इसके बाद अदालत ने प्रशांत को 10 साल कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई।
 
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मोटरसाइकिल से पेट्रोलिंग कर रहा था

कोर्ट ने निर्णय में कहा कि घटना की रात जब आरोपी साथी संदीप कुमार के साथ मोटरसाइकिल से पेट्रोलिंग कर रहा था तो उसे एक एसयूवी आती दिखाई दी जो संदिग्ध लग रही थी। एसयूवी को रोकने का इशारा किया, लेकिन चालक उसे भगाने लगा।

यह भी कहा गया था कि एसयूवी चला रहे विवेक तिवारी ने मोटरसाइकिल को टक्कर मारी। इससे प्रशांत की जान को खतरा हो गया। बचाव में उसने सरकारी पिस्तौल से एसयूवी की विंडस्क्रीन पर फायर कर दिया। गोली विवेक तिवारी को लगी और उनकी मौत हो गई।
 
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लगातार चली गवाही से आया फैसला

अभियोजन की ओर से सबसे पहले घटना की चश्मदीद सना की गवाही हुई। चार अप्रैल से 24 अक्तूबर 2019 तक उनकी गवाही चली। इसके बाद कल्पना तिवारी को दो नवंबर 2019 को गवाही के लिए बुलाया गया। उन्होंने तीन, 14 और 15 नवंबर को गवाही दी। मामले में प्राथमिकी दर्ज करने वाले हेड कांस्टेबल राजेश कुमार को 28 नवंबर 2019 को पेश किया गया। इसके बाद छह जनवरी 2020 को शव का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव कोर्ट में पेश हुए।

मजिस्ट्रेट ने भी दिया था बयान

11 फरवरी 2020 को झांसी में नियुक्त तत्कालीन सिटी मजिस्ट्रेट सलिल कुमार पटेल का बयान भी दर्ज किया गया था। उन्हें 13 मार्च 2020 को बयान के लिए बुलाया गया। सना का बयान लेने वाले डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी की गवाही 21 जनवरी व 23 सितंबर 2021 को हुई। पंचायतनामा तैयार करने वाले उप निरीक्षक कौशल कुमार तिवारी को भी पेश किया गया।

अंतिम साक्षी विवेचक व तत्कालीन थानाध्यक्ष महानगर विकास कुमार पांडे की गवाही और बचाव पक्ष की लंबी जिरह दो फरवरी से 19 अक्तूबर 2024 तक हुई। अभियोजन साक्ष्य समाप्त होने के बाद दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत दोनों आरोपियों का कोर्ट ने 26 नवंबर 2024 को विस्तृत बयान दर्ज किए।
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