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हाइकोर्ट की सख्ती के बाद जागी सरकार, होगी बालगृहों की निगरानी

Thu, 02 Mar 2017 02:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 02 Mar 2017 02:09 AM IST
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 court orders in child home case.

बाल गृहों और शरणालयों में बच्चों पर अत्याचार नहीं हो, उन्हें बेहतर माहौल मिले, इसके लिए बनाई गई निगरानी समिति बेपरवाह है। इस समिति ने पिछले ढाई साल में मौके पर जाकर यह जानने तक की जहमत नहीं की कि वहां व्यवस्थाएं कैसी हैं?

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हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में शरणालयों में खराब हालात पर ध्यान आकर्षित करती अनूप गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह हकीकत सामने आई।

अदालत ने इस मामले में संबंधित विभागों से निरीक्षण रिपोर्ट तलब की थी। हाईकोर्ट ने सामने आई हकीकत पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए राज्य सरकार को कड़े शब्दों में कहा कि वह प्रदेश भर की जिला स्तरीय निगरानी समितियों को इस संबंध में जरूरी निर्देश जारी करे।
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राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि अब सभी समितियां अब अपना काम नियमित तौर पर करेंगी।

इस तरह तैयार की गई रिपोर्ट

 court orders in child home case.

जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस राजन रॉय की खंडपीठ के समक्ष यह भी बताया गया कि राज्य स्तरीय समिति का गठन जेजे एक्ट 2013 के अनुसार फरवरी 2017 में ही किया गया है।

अतिरिक्त महाधिवक्ता बुलबुल गोदियाल ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश पर 23 फरवरी को विभिन्न विभागों की साझा टीम ने शरणालयों के आकस्मिक निरीक्षण किए। इसकी रिपोर्ट अदालत को दी गई है।

इन हालात पर उन्होंने अदालत में सफाई दी कि सभी समिति अब नियमित तौर पर अपना काम करेंगी, जिनमें नियमित तौर पर निरीक्षण करना शामिल है।

बच्चों के मामलों में जवाबदेह रहे हाजिर

 court orders in child home case.

अदालत इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है। हाईकोर्ट ने 17 फरवरी को निर्देश देकर यूपी के लावारिस बच्चों के मामलों के लिए बने सभी सरकारी महकमों के प्रमुखों को तलब किया था।

इस पर प्रमुख सचिव राज्य महिला एवं बाल कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार, निदेशक आरती श्रीवास्तव, केंद्रीय महिला एवं बाल कल्याण विभाग के अंडर सेक्रेट्री राजेश कुमार, विशेष सचिव राम केवल और संयुक्त सचिव नंदलाल प्रसाद, प्रमुख सचिव निशक्तजन कल्याण विभाग महेश गुप्ता, प्रभारी निदेशक एके वर्मा, डीएम जीएस प्रियदर्शी, एसएसपी मंजिल सैनी, चीफ प्रोबेशन अधिकारी डीबी गुप्ता, डीपीओ सर्वेश कुमार पांडेय, सीएमओ जीएस बाजपेयी, हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित रहे।

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100 बच्चो को आईसीपीएस में कवर करे केंद्र

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दृष्टि सामाजिक संस्थान की ओर से चलाए जा रहे शरणालय का मामला हाईकोर्ट के समक्ष उठा। इस शरणालय में 200 लावारिस और बेसहारा बच्चे हैं।

पर, इनमें से 100 बच्चे ही केंद्र सरकार के इंटीग्रेटेड चाइल्ड प्रोटेक्शन (आईसीपीएस) में मदद पा रहे हैं। हाईकोर्ट ने पिछली तारीख पर बाकी के 100 बच्चों को भी आईसीपीएस में कवर करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को दिया था ताकि इन बच्चों की देखभाल में कोई आर्थिक दिक्कतें न पैदा हों।

इस पर केंद्र की ओर से आए अंडर सेक्रेट्री राजेश कुमार ने बताया कि फंड की उपलब्धता के अनुसार प्रस्ताव पर मौजूदा वित्तीय वर्ष और अगले वित्त वर्ष के लिए विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, इस मामले में अपने वरिष्ठ अधिकारियों से वे निर्देश लेंगे। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार इन 100 बच्चों के मामले में जल्द उचित निर्णय ले। वहीं प्रदेश सरकार की ओर से केंद्र को सात दिन में एक और प्रस्ताव भेजा जाएगा।

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