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30 साल पुराने पथराव मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी के आदेश
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कोर्ट ने दिया पथराव मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
जनसभा के बाद बिना अनुमति जुलूस निकालने के दौरान पथराव कर अधिकारियों को घायल करने के तीस वर्ष पुराने मामले में कोर्ट लगातार गिरफ्तारी वारंट जारी कर रही है, लेकिन पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी में कोई रुचि नहीं ले रही है।
एमपी, एमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्बरीष श्रीवास्तव ने एसीपी हजरतगंज को व्यक्तिगत रुचि लेकर आरोपियों को गिरफ्तार करके पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने आरोपी जगदीश वर्मा, कृपाल सिंह रावत, अशोक कुमार निरंजन, संतोष सिंह चौहान, उमेश वर्मा, एसएस बघेल, सूरज सिंह, बहारुल इस्लाम, नरेंद्र सिंह, सलीम, गयासुद्दीन, संतोषएज, प्रकाश भारती, राज कुमार अवस्थी, इक्षाराम मिश्र, फजल, खान, चंद्रपाल सिंह, रामवृक्ष, आरपीएन सिंह, श्यामसुंदर, राजेश कुमार वर्मा, महेंद्र सिंह यादव, केके यादव, सोमेंद्र शर्मा और उमाशंकर सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
साथ ही एसीपी को पत्र लिखकर कहा है कि मामला 1991 से कोर्ट में लंबित है और आरोपियों की गैरहाजिरी के चलते उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया है, लेकिन हजरतगंज थानाध्यक्ष आरोपियों को गिरफ्तार करने में कोई रुचि नही ले रहे हैं।
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कोर्ट ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए कहा कि पुलिस कोई रिपोर्ट भी नहीं भेज रही है। पत्रावली के अनुसार, घटना की रिपोर्ट 22 फरवरी 1991 को इंस्पेक्टर हजरतगंज आरपी सिंह ने पूर्व विधान परिषद सदस्य समर पाल सिंह और 52 अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी।
घटना के समय समरपाल सिंह उप्र. जनता युवा दल के अध्यक्ष थे। रिपोर्ट दर्ज कराकर कहा गया कि एमएलसी समर पाल सिंह ने अपने साथियों के साथ 22 फरवरी 1991 को दया निधान पार्क लालबाग में जनसभा का आयोजन किया।
जनसभा को विधानसभा तक जुलूस बनाकर बिना अनुमति के निकाला था। आरोप है कि सभी लोगों ने ईंट-पत्थर चलाकर अपर नगर मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों को घायल किया था। साथ ही बसों में तोड़फोड़ की थी। पत्रावली के अनुसार, आरोपी समर पाल सिंह की मृत्यु हो चुकी है।
आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश
वर्ष 1987 में बलवा, तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने समेत अन्य आरोपों में दर्ज मुकदमे की सुनवाई में आरोपियों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के तामीला में पुलिस रुचि नहीं ले रही है। अब एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्बरीष श्रीवास्तव ने एसीपी हजरतगंज को आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने अपने पत्र में कहा कि पूर्व सांसद मांधाता सिंह समेत अन्य के खिलाफ 1987 में हजरतगंज में दर्ज मुकदमे की कोर्ट में सुनवाई चल रही है, लेकिन आरोपी कैलाश नाथ त्रिपाठी, वीके मिश्रा, रामवचन यादव, दिवाकर, आलमताब अहमद, कैलाश नारायण, दिलीप सिंह, शरद कुमार दीक्षित, राम नरेश सिंह, जागेश्वर यादव, अमृत लाल, लल्लन पांडेय और शिवलाल कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे हैं।
जाली नोट खपाने के आरोपी को जमानत नहीं
जाली नोट खपाकर अर्थव्यवस्था को चोट देने की कोशिश करने के आरोपी अब्दुल सलाम की जमानत अर्जी को एनआईए के प्रभारी एडीजे मो. गजाली ने खारिज कर दिया। कोर्ट में सरकारी वकील एमके सिंह ने बताया कि मामले की रिपोर्ट 24 अगस्त 2018 को हसनगंज में दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट दर्ज कराकर बताया गया था कि एसटीएफ ने आरोपी शिवभजन गुप्ता, विवेक राजपूत, कुलदीप गुप्ता और रजनीश यादव को 4.60 लाख के जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद एनआईए ने 18 सितंबर 2019 को मामला दर्ज कर के विवेचना अपने हाथ में ले ली थी, जिसमें पता चला कि आरोपियों को जाली नोट अब्दुल सलाम से मिले थे, जिसे जिया उलहक ने दिया था। विवेचना बढ़ी तो पता चला कि जिया उलहक को बांग्लादेशी गजलू मिया ने जाली नोट भारत में चलाने के लिए दिया था। एनआईए ने मामले की विवेचना के बाद छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।
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एमपी, एमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्बरीष श्रीवास्तव ने एसीपी हजरतगंज को व्यक्तिगत रुचि लेकर आरोपियों को गिरफ्तार करके पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने आरोपी जगदीश वर्मा, कृपाल सिंह रावत, अशोक कुमार निरंजन, संतोष सिंह चौहान, उमेश वर्मा, एसएस बघेल, सूरज सिंह, बहारुल इस्लाम, नरेंद्र सिंह, सलीम, गयासुद्दीन, संतोषएज, प्रकाश भारती, राज कुमार अवस्थी, इक्षाराम मिश्र, फजल, खान, चंद्रपाल सिंह, रामवृक्ष, आरपीएन सिंह, श्यामसुंदर, राजेश कुमार वर्मा, महेंद्र सिंह यादव, केके यादव, सोमेंद्र शर्मा और उमाशंकर सिंह के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
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साथ ही एसीपी को पत्र लिखकर कहा है कि मामला 1991 से कोर्ट में लंबित है और आरोपियों की गैरहाजिरी के चलते उनके खिलाफ वारंट जारी किया गया है, लेकिन हजरतगंज थानाध्यक्ष आरोपियों को गिरफ्तार करने में कोई रुचि नही ले रहे हैं।
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कोर्ट ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए कहा कि पुलिस कोई रिपोर्ट भी नहीं भेज रही है। पत्रावली के अनुसार, घटना की रिपोर्ट 22 फरवरी 1991 को इंस्पेक्टर हजरतगंज आरपी सिंह ने पूर्व विधान परिषद सदस्य समर पाल सिंह और 52 अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी।
घटना के समय समरपाल सिंह उप्र. जनता युवा दल के अध्यक्ष थे। रिपोर्ट दर्ज कराकर कहा गया कि एमएलसी समर पाल सिंह ने अपने साथियों के साथ 22 फरवरी 1991 को दया निधान पार्क लालबाग में जनसभा का आयोजन किया।
जनसभा को विधानसभा तक जुलूस बनाकर बिना अनुमति के निकाला था। आरोप है कि सभी लोगों ने ईंट-पत्थर चलाकर अपर नगर मजिस्ट्रेट और पुलिसकर्मियों को घायल किया था। साथ ही बसों में तोड़फोड़ की थी। पत्रावली के अनुसार, आरोपी समर पाल सिंह की मृत्यु हो चुकी है।
आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश
वर्ष 1987 में बलवा, तोड़फोड़ और सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने समेत अन्य आरोपों में दर्ज मुकदमे की सुनवाई में आरोपियों के खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट के तामीला में पुलिस रुचि नहीं ले रही है। अब एमपीएमएलए कोर्ट के विशेष एसीजेएम अम्बरीष श्रीवास्तव ने एसीपी हजरतगंज को आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने अपने पत्र में कहा कि पूर्व सांसद मांधाता सिंह समेत अन्य के खिलाफ 1987 में हजरतगंज में दर्ज मुकदमे की कोर्ट में सुनवाई चल रही है, लेकिन आरोपी कैलाश नाथ त्रिपाठी, वीके मिश्रा, रामवचन यादव, दिवाकर, आलमताब अहमद, कैलाश नारायण, दिलीप सिंह, शरद कुमार दीक्षित, राम नरेश सिंह, जागेश्वर यादव, अमृत लाल, लल्लन पांडेय और शिवलाल कोर्ट में हाजिर नहीं हो रहे हैं।
जाली नोट खपाने के आरोपी को जमानत नहीं
जाली नोट खपाकर अर्थव्यवस्था को चोट देने की कोशिश करने के आरोपी अब्दुल सलाम की जमानत अर्जी को एनआईए के प्रभारी एडीजे मो. गजाली ने खारिज कर दिया। कोर्ट में सरकारी वकील एमके सिंह ने बताया कि मामले की रिपोर्ट 24 अगस्त 2018 को हसनगंज में दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट दर्ज कराकर बताया गया था कि एसटीएफ ने आरोपी शिवभजन गुप्ता, विवेक राजपूत, कुलदीप गुप्ता और रजनीश यादव को 4.60 लाख के जाली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद एनआईए ने 18 सितंबर 2019 को मामला दर्ज कर के विवेचना अपने हाथ में ले ली थी, जिसमें पता चला कि आरोपियों को जाली नोट अब्दुल सलाम से मिले थे, जिसे जिया उलहक ने दिया था। विवेचना बढ़ी तो पता चला कि जिया उलहक को बांग्लादेशी गजलू मिया ने जाली नोट भारत में चलाने के लिए दिया था। एनआईए ने मामले की विवेचना के बाद छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की।