बसपा महासचिव पर कानूनी शिकंजा, पड़े मुश्किल में
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बसपा के राष्ट्रीय महासचिव व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य को एसीजेएम पंचम सरोज कुमार यादव ने गुरुवार को धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए कोर्ट में तलब किया है। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तिथि नियत की है।
बसपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीते 21 सितंबर को विवादित बयान दिया था। मौर्य ने शादी-विवाह में गौरी-गणेश की पूजा नहीं करने की अपील करते हुए इसे मनुवादी व्यवस्था में दलितों व पिछड़ों को गुमराह कर उनको गुलाम बनाने की चाल बताया था।
बीते 23 सितंबर को कूरेभार थाने के जूड़ापट्टी गांव निवासी अधिवक्ता अनिल तिवारी ने एसीजेएम पंचम सरोज कुमार यादव की अदालत में बसपा महासचिव के खिलाफ धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने के आरोप में (आईपीसी की धारा 295 क) परिवाद दायर किया था।
परिवादी का आरोप है कि बसपा महासचिव का बयान बीते 22 सितंबर को अखबार में प्रकाशित होने के बाद परिवादी समेत अन्य लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है।
कोर्ट ने माना दोषी
कोर्ट में परिवादी अनिल तिवारी और गवाह के रूप में अधिवक्ता तेजबहादुर सिंह व श्रवण कुमार पांडेय का बयान दर्ज किया गया था।
एसीजेएम पंचम सरोज कुमार यादव ने गुरुवार को बसपा के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य को धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए विचारण के लिए अदालत में तलब करने का आदेश दिया है।