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UP: जुर्माना लगाने वाली सरकार पर ही कोर्ट ने लगाया जुर्माना... अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर कसा तंज
Wed, 06 Nov 2024 07:17 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Wed, 06 Nov 2024 07:17 PM IST
सार
सड़क चौड़ीकरण के लिए घरों को अवैध रूप से गिराने की कार्रवाई पर सुप्रीम कोर्ट ने अफसरों को फटकार लगाते हुए 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया।
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : ANI
विस्तार
सड़क चौड़ीकरण के लिए घरों को अवैध रूप से गिराने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाई और 25 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। इस पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रदेश की योगी सरकार पर तंज कसा है।
उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर कहा कि जुर्माना लगानेवाली सरकार पर ही कोर्ट जुर्माना लगा रहा है। भाजपा राज में उत्तर प्रदेश में फैली अराजकता का कोई और सबूत चाहिए क्या। अब क्या भाजपा सरकार खुद पर बुलडोजर चलवाएगी।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई को बेहद कठोर करार दिया और गैरकानूनी भी बताया। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया कि जिस व्यक्ति का घर ध्वस्त किया गया है, उसे 25 लाख रुपये का दंडात्मक मुआवजा दिया जाए। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव को घरों की अवैध तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।
ये था मामला
साल 2019 में उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सड़क चौड़ीकरण के लिए अधिकारियों ने एक मकान को अवैध तरीके से ध्वस्त कर दिया था। अब अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अधिकारियों का अत्याचारी रवैया बताया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने टिप्पणी की, 'आप बुलडोजर लेकर रातोंरात मकान नहीं गिरा सकते।' अदालत ने यूपी के मुख्य सचिव को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।
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उन्होंने सोशल मीडिया साइट पर कहा कि जुर्माना लगानेवाली सरकार पर ही कोर्ट जुर्माना लगा रहा है। भाजपा राज में उत्तर प्रदेश में फैली अराजकता का कोई और सबूत चाहिए क्या। अब क्या भाजपा सरकार खुद पर बुलडोजर चलवाएगी।
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बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों की कार्रवाई को बेहद कठोर करार दिया और गैरकानूनी भी बताया। सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को निर्देश दिया कि जिस व्यक्ति का घर ध्वस्त किया गया है, उसे 25 लाख रुपये का दंडात्मक मुआवजा दिया जाए। साथ ही उच्चतम न्यायालय ने राज्य के मुख्य सचिव को घरों की अवैध तोड़फोड़ के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया है।
ये था मामला
साल 2019 में उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले में सड़क चौड़ीकरण के लिए अधिकारियों ने एक मकान को अवैध तरीके से ध्वस्त कर दिया था। अब अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इसे अधिकारियों का अत्याचारी रवैया बताया। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने टिप्पणी की, 'आप बुलडोजर लेकर रातोंरात मकान नहीं गिरा सकते।' अदालत ने यूपी के मुख्य सचिव को मामले की जांच करने का निर्देश दिया है।