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जहरीली शराब से मौत पर कोर्ट ने दिया फैसला!

Tue, 13 Jan 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर
ब्यूरो/अमर उजाला, रामपुर Updated Tue, 13 Jan 2015 01:52 AM IST
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Court gives decision over Poisonous wine issue.

जहरीली शराब पीने से सात लोगों की मौत के दस साल पुराने मामले में कोर्ट का फैसला आ गया है। सोमवार को कोर्ट ने तीन लोगों को दस-दस साल की कैद और जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। साक्ष्य के अभाव में कोर्ट ने तीन लोगों को बरी कर दिया है।

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जहरीली शराब पिलाने का यह मामला शाहबाद कोतवाली क्षेत्र के पैंगबरपुर गांव का है। यहां वर्ष 2005 में प्रधानी का चुनाव हुआ था। चुनाव के दौरान छह अगस्त 2005 की रात में प्रधान पद की प्रत्याशी जावित्री पत्नी डालचंद्र ने अपने घर पर दावत दी थी।
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इसमें शराब पिलाई गई थी। शराब पीने के कुछ ही देर बाद लोगों की हालत बिगड़ने लगी थी। लोगों को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान सेवाराम, बाबू, भूरा, लेखराज, मनोहर, हरवीर, करन सिंह की मौत हो गई थी। इस घटना में दस लोगों के आंखों की रोशनी चली गई थी।
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गांव के ही बृजलाल की ओर से प्रधान पद के उम्मीदवार के पति डालचंद्र, महावीर, बलवीर, अमन, अशोक, पृथ्वीराज के खिलाफ शाहबाद कोतवाली में हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने तफ्तीश शुरू की और चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।

एक-एक कर सभी गवाह मुकरे

Court gives decision over Poisonous wine issue.

कोर्ट ने सोमवार को दस पुराने इस मुकदमे का फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता दलविंदर सिंह ने वादी बृजलाल समेत 35 गवाह कोर्ट में पेश किए।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट भी पेश की, जिसमें विष होने की पुष्टि हुई थी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एडीजे तृतीय नरेंद्र सिंह ने डालचंद्र, महावीर और पृथ्वीराज को दोषी मानते हुए दस-दस साल की कैद और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में बलवीर, अमन और अशोक को बरी कर दिया।

लैब की रिपोर्ट ने दिलाई सजा
कोर्ट पहुंचते-पहुंचते एक, दो नहीं, बल्कि ज्यादातर गवाह मुकर गए। गवाहों के मुकर जाने के बाद भी कोर्ट ने सजा सुनाई। विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट सजा में सहायक बनकर उभरी।

पुलिस ने इस घटना में 35 से ज्यादा गवाह बनाए, जिसमें 35 गवाह कोर्ट में पेश हुए। ज्यादातर गवाह पक्षद्रोही हो गए, लेकिन सात लोगों की पीएम रिपोर्ट और बिसरा की विधि विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तीन को सजा सुनाई।

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