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विधवा बहू से घर खाली कराने का आदेश रद
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लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक विधवा बहू को घर खाली कराने के एसडीएम सदर लखनऊ के आदेश को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि एसडीएम का आदेश सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लंघन है लिहाजा इसे जारी नहीं रखा जा सकता।
न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने यह फैसला बहू की याचिका पर दिया। याचिका में एसडीएम सदर के 14 जुलाई 2021 के आदेश को चुनौती दी गई थी। एसडीएम ने उक्त आदेश सास-ससुर की याचिका पर दिया था जिसमें सास-ससुर के विशाल खंड गोमती नगर स्थित मकान को खाली करने का आदेश बहू को दिया गया था। याचिका माता-पिता का भरण पोषण एवं कल्याण और वरिष्ठ नागरिक नियम के तहत दाखिल की गई थी। कोर्ट ने पाया कि उक्त आदेश के पूर्व ही 6 नवम्बर 2019 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट लखनऊ ने बहू के घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर उसे उक्त मकान से न निकालने का आदेश पारित किया था।
कोर्ट ने कहा कि सास-ससुर वीर नगर उदयगंज में रहते हैं। याची भी अपने पति के साथ सास-ससुर के साथ ही रहती थी लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते वह और उसका पति विशाल खंड में आकर रहने लगे। वर्ष 2015 में उन्हें एक बच्चा भी हुआ। हालांकि वर्ष 2019 में याची के पति की मृत्यु हो गई। याची का कहना था कि पति की मृत्यु के बाद से ही सास-ससुर उसे परेशान कर रहे हैं और विशालखंड स्थित मकान से उसे निकालना चाहते थे। आखिरकार एसडीएम के आदेश के बाद उसे बेघर कर दिया गया। अब उसके और उसके बच्चे के सिर पर छत नहीं है। अदालत ने एसडीएम के 14 जुलाई के आदेश को खारिज कर दिया और याची व उसके बच्चे को मकान के ग्राउंड फ्लोर का कब्जा देने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने यह फैसला बहू की याचिका पर दिया। याचिका में एसडीएम सदर के 14 जुलाई 2021 के आदेश को चुनौती दी गई थी। एसडीएम ने उक्त आदेश सास-ससुर की याचिका पर दिया था जिसमें सास-ससुर के विशाल खंड गोमती नगर स्थित मकान को खाली करने का आदेश बहू को दिया गया था। याचिका माता-पिता का भरण पोषण एवं कल्याण और वरिष्ठ नागरिक नियम के तहत दाखिल की गई थी। कोर्ट ने पाया कि उक्त आदेश के पूर्व ही 6 नवम्बर 2019 को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट लखनऊ ने बहू के घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत दाखिल प्रार्थना पत्र पर उसे उक्त मकान से न निकालने का आदेश पारित किया था।
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कोर्ट ने कहा कि सास-ससुर वीर नगर उदयगंज में रहते हैं। याची भी अपने पति के साथ सास-ससुर के साथ ही रहती थी लेकिन पारिवारिक विवाद के चलते वह और उसका पति विशाल खंड में आकर रहने लगे। वर्ष 2015 में उन्हें एक बच्चा भी हुआ। हालांकि वर्ष 2019 में याची के पति की मृत्यु हो गई। याची का कहना था कि पति की मृत्यु के बाद से ही सास-ससुर उसे परेशान कर रहे हैं और विशालखंड स्थित मकान से उसे निकालना चाहते थे। आखिरकार एसडीएम के आदेश के बाद उसे बेघर कर दिया गया। अब उसके और उसके बच्चे के सिर पर छत नहीं है। अदालत ने एसडीएम के 14 जुलाई के आदेश को खारिज कर दिया और याची व उसके बच्चे को मकान के ग्राउंड फ्लोर का कब्जा देने का आदेश दिया है।
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