{"_id":"62d942b40dfd1b2dae0d6f25","slug":"court-can-give-decision-in-domestic-violence-case-even-without-report","type":"story","status":"publish","title_hn":"Domestic violence: घरेलू हिंसा में घटना की रिपोर्ट के बिना मामले में दिया जा सकता है फैसला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Domestic violence: घरेलू हिंसा में घटना की रिपोर्ट के बिना मामले में दिया जा सकता है फैसला
Thu, 21 Jul 2022 05:42 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 21 Jul 2022 05:42 PM IST
सार
घरेलू हिंसा के मामले में न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने आदेश दिया है कि ऐसे मामलों में कोर्ट बिना रिपोर्ट के भी अंतरिम आदेश, अंतिम आदेश और नोटिस दे सकता है।
विज्ञापन
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि घरेलू हिंसा के मामले में घटना की रिपोर्ट (डीआईआर) के बिना भी निचली अदालत अंतरिम आदेश, अंतिम आदेश और नोटिस जारी कर सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने ममता की याचिका पर पारित किया।
विज्ञापन
याचिका में कहा गया था की याची ने निचली अदालत में घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत परिवाद दायर किया था। इस पर अदालत ने संरक्षण अधिकारी से घरेलू घटना की रिपोर्ट (डीआईआर) तलब किया और मामले की अगली तारीख तय कर दी। अगली तिथि पर डीआईआर रिपोर्ट न आने के आधार पर बजाय अंतरिम आदेश व प्रतिवादियों को नोटिस देने के अदालत ने पुन: डीआईआर तलब की।
विज्ञापन
कोर्ट ने निचली अदालत के इस आदेश को खारिज करते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ऐसे मामले में यह व्यवस्था दे चुका है कि जिन मामले में संरक्षण अधिकारी नियुक्त नहीं है और जब पीड़ित द्वारा खुद ही घरेलू हिंसा का परिवाद दाखिल किया गया हैं तो निचली अदालत ऐसे किसी भी रिपोर्ट पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं है। ऐसे में निचली अदालत बिना डीआईआर के भी याची के परिवाद निर्णित कर सकता है।
विज्ञापन