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दंपती जेल में, बच्चों को भेजा अनाथालय बाहर आए तो नहीं मिले मासूम बेटा-बेटी, यूपी सरकार को नोटिस
Thu, 28 Jan 2021 08:35 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Thu, 28 Jan 2021 08:35 PM IST
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने आगरा में कत्ल के आरोप में फंसाए गए दंपती के बच्चों के लापता होने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। प्रदेश के मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक को भेजे गए नोटिस पर चार सप्ताह में विस्तृत जवाब मांगा गया है।
आयोग ने इस मामले को मानवाधिकारों का गंभीर हनन माना है। आगरा के इस मामले में वर्ष 2015 में पांच वर्षीय एक बालक की हत्या में पुलिस ने एक अध्यापक नरेंद्र व उसकी पत्नी को जेल भेज दिया था। हत्या की रिपोर्ट में दंपती पर संदेह जताए जाने पर बगैर छानबीन किए जेल भेजे गए पति-पत्नी के उस समय पांच साल का बेटा और तीन साल की बेटी थी। जेल भेजे जाने के बाद कहा गया था कि उनके बच्चों को अनाथालय में भेज दिया गया है।
बाद में अदालत ने दंपती को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया था और एसएसपी आगरा को इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा था। अदालत ने प्रशासनिक अफसरों की भूमिका भी तय किए जाने के निर्देश दिए थे। जब दंपती रिहा होकर बाहर आए तो उन्हें अपने बच्चे कहीं नहीं मिले। बच्चों के बारे में पुलिस व अन्य अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके। समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने के बाद इस प्रकरण का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अब मुख्य सचिव व डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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आयोग ने कहा है जवाब में दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी जानकारी दी जाए।
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आयोग ने इस मामले को मानवाधिकारों का गंभीर हनन माना है। आगरा के इस मामले में वर्ष 2015 में पांच वर्षीय एक बालक की हत्या में पुलिस ने एक अध्यापक नरेंद्र व उसकी पत्नी को जेल भेज दिया था। हत्या की रिपोर्ट में दंपती पर संदेह जताए जाने पर बगैर छानबीन किए जेल भेजे गए पति-पत्नी के उस समय पांच साल का बेटा और तीन साल की बेटी थी। जेल भेजे जाने के बाद कहा गया था कि उनके बच्चों को अनाथालय में भेज दिया गया है।
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बाद में अदालत ने दंपती को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया था और एसएसपी आगरा को इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को कहा था। अदालत ने प्रशासनिक अफसरों की भूमिका भी तय किए जाने के निर्देश दिए थे। जब दंपती रिहा होकर बाहर आए तो उन्हें अपने बच्चे कहीं नहीं मिले। बच्चों के बारे में पुलिस व अन्य अधिकारी कोई जवाब नहीं दे सके। समाचार पत्रों में मामला प्रकाशित होने के बाद इस प्रकरण का राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए अब मुख्य सचिव व डीजीपी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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आयोग ने कहा है जवाब में दोषी अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की भी जानकारी दी जाए।