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डिजिटल राशनकार्ड का फर्जी टेंडर निकालकर करोड़ों ठगने वाले दंपती गिरफ्तार
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क्राइम ब्रांच व लखनऊ के गाजीपुर थाने की पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जिसने डिजिटल राशनकार्ड बनवाने के लिए फर्जी टेंडर निकालकर व नौकरी के नाम पर करोड़ों की ठगी की है।
संयुक्त टीम ने मामले में ठग दंपती को गिरफ्तार किया है। गिरोह का नेटवर्क पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक है। पुलिस गिरोह के कुछ और सदस्यों की तलाश कर रही है।
क्राइम ब्रांच के निरीक्षक राजेश द्विवेदी के मुताबिक, 30 मार्च 2020 को गाजीपुर थाने में बस्ती के दुबौलिया छपिया मलिक निवासी अंकित सिंह ने तहरीर दी थी।
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इसमें लेखराज गोल्ड मार्केट मुंशी पुलिया की दुकान नंबर 119 में धर्मावती इंटरप्राइजेज नाम की संस्था का कार्यालय होना बताया।
आरोप है कि धर्मावती इंटरप्राइजेज ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राम विलास पासवान का फर्जी पत्र लगाकर एक निविदा का विज्ञापन प्रकाशित करवाया।
इसमें डिजिटल राशन कार्ड बनवाने का काम सौंपा जाना दिखाया गया था। विज्ञापन देखने के बाद कई लोगाें ने लेखराज गोल्ड स्थित कार्यालय में संपर्क किया।
सभी से दस्तावेज जमा कराकर 15-15 लाख रुपये वसूले गए। इसके बाद सभी के नाम से एक-एक आईडी बनाई गई।
इसके बारे में जानकारी दी गई कि इसी पर डिजिटल राशन कार्ड बना सकते हैं। कुछ दिनों बाद लॉगइन आईडी का पासवर्ड देने को कहा गया।
काफी समय बाद भी जब राशनकार्ड का काम शुरू नहीं हुआ तो लोगों ने पड़ताल शुरू की। इस दौरान फर्जीवाड़े सामने आया। अंकित ने नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
क्राइम ब्रांच व गाजीपुर पुलिस ने बृहस्पतिवार देर शाम कंपनी के निदेशक राम मिलन वर्मा उर्फ अशोक वर्मा और उनकी पत्नी धर्मावती वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार दंपती हिमसिटी पार्ट-1 देवा रोड चिनहट के रहने वाले है।
मास्टरमाइंड पहले ही सलाखों के पीछे
इंस्पेक्टर राजेश द्विवेदी ने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड गोमतीनगर निवासी आलोक मिश्रा प्रतापगढ़ की जेल में बंद है। गिरोह ने डिजिटल राशन कार्ड बनवाने का ठेका देने के नाम पर 100 से 125 लोगों से ठगी की है। वहीं, करीब 200 बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले हैं। इनका गिरोह पूर्वांचल के गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, कुशीनगर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, फैजाबाद, बाराबंकी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों और बिहार के सीवान, छपरा, गोपालगंज में सक्रिय था। गिरोह में तीन महिला सदस्य भी हैं। जिनकी तलाश की जा रही है।
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संयुक्त टीम ने मामले में ठग दंपती को गिरफ्तार किया है। गिरोह का नेटवर्क पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक है। पुलिस गिरोह के कुछ और सदस्यों की तलाश कर रही है।
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क्राइम ब्रांच के निरीक्षक राजेश द्विवेदी के मुताबिक, 30 मार्च 2020 को गाजीपुर थाने में बस्ती के दुबौलिया छपिया मलिक निवासी अंकित सिंह ने तहरीर दी थी।
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इसमें लेखराज गोल्ड मार्केट मुंशी पुलिया की दुकान नंबर 119 में धर्मावती इंटरप्राइजेज नाम की संस्था का कार्यालय होना बताया।
आरोप है कि धर्मावती इंटरप्राइजेज ने पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. राम विलास पासवान का फर्जी पत्र लगाकर एक निविदा का विज्ञापन प्रकाशित करवाया।
इसमें डिजिटल राशन कार्ड बनवाने का काम सौंपा जाना दिखाया गया था। विज्ञापन देखने के बाद कई लोगाें ने लेखराज गोल्ड स्थित कार्यालय में संपर्क किया।
सभी से दस्तावेज जमा कराकर 15-15 लाख रुपये वसूले गए। इसके बाद सभी के नाम से एक-एक आईडी बनाई गई।
इसके बारे में जानकारी दी गई कि इसी पर डिजिटल राशन कार्ड बना सकते हैं। कुछ दिनों बाद लॉगइन आईडी का पासवर्ड देने को कहा गया।
काफी समय बाद भी जब राशनकार्ड का काम शुरू नहीं हुआ तो लोगों ने पड़ताल शुरू की। इस दौरान फर्जीवाड़े सामने आया। अंकित ने नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।
क्राइम ब्रांच व गाजीपुर पुलिस ने बृहस्पतिवार देर शाम कंपनी के निदेशक राम मिलन वर्मा उर्फ अशोक वर्मा और उनकी पत्नी धर्मावती वर्मा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार दंपती हिमसिटी पार्ट-1 देवा रोड चिनहट के रहने वाले है।
मास्टरमाइंड पहले ही सलाखों के पीछे
इंस्पेक्टर राजेश द्विवेदी ने बताया कि गिरोह का मास्टरमाइंड गोमतीनगर निवासी आलोक मिश्रा प्रतापगढ़ की जेल में बंद है। गिरोह ने डिजिटल राशन कार्ड बनवाने का ठेका देने के नाम पर 100 से 125 लोगों से ठगी की है। वहीं, करीब 200 बेरोजगारों से नौकरी के नाम पर करोड़ों रुपये वसूले हैं। इनका गिरोह पूर्वांचल के गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, कुशीनगर, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, गाजीपुर, अंबेडकरनगर, फैजाबाद, बाराबंकी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों और बिहार के सीवान, छपरा, गोपालगंज में सक्रिय था। गिरोह में तीन महिला सदस्य भी हैं। जिनकी तलाश की जा रही है।