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Lucknow News: घर में छाप रहे जाली नोट, व्हाट्सएप पर चल रही डील
Thu, 11 Jun 2026 02:43 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Thu, 11 Jun 2026 02:43 AM IST
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गुडंबा। जाली नोटों का काला धंधा प्रदेश के कई जिलों तक फैल चुका है। मड़ियांव पुलिस की जांच में गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन से 80 पन्नों की व्हाट्सएप चैट मिली है। इसने इस संगठित धंधे की परतें खोल दी हैं। चैट में नोटों की तस्वीरों से लेकर उनकी सप्लाई, डिमांड और पैसों के लेनदेन तक के सबूत मिले हैं। इनके आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा के मुताबिक, इस चैट के जरिये गिरोह के सरगना आजमगढ़ निवासी मंजीत प्रधान के अलावा उसके साथी संतोष के बारे में भी पता चला है। गिरफ्तार आरोपी आलोक सिंह पिछले एक वर्ष से दोनों के संपर्क में था। यह भी पता चला है कि मंजीत प्रधान अपने घर में ही जाली नोट तैयार करता था। आलोक के साथ पकड़े गए सोनू और बृजेश डिलीवरी का काम करते थे। उनका काम तय स्थानों पर नकली नोटों की खेप पहुंचाना और बदले में असली रकम हासिल करना था। गिरोह का नेटवर्क आजमगढ़, बलरामपुर, बलिया और अयोध्या समेत कई जिलों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्य पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मंजीत प्रधान और उसके साथी संतोष की तलाश में पुलिस टीमों की दबिश जारी है।
यह है मामला
मड़ियांव पुलिस ने आजमगढ़ के जहानागंज के गंभीरवन निवासी आलोक सिंह, मुबारकपुर के रामपुर मुबारकपट्टी बनकट निवासी सोनू गौड़ और सिधारी के सारगढ़ निवासी बृजेश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के पास से 13,95,600 रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे। इनमें 100 रुपये के 6,946 और 500 रुपये के 1,402 नोट शामिल हैं। आरोपियों के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया था।
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इंस्पेक्टर शिवानंद मिश्रा के मुताबिक, इस चैट के जरिये गिरोह के सरगना आजमगढ़ निवासी मंजीत प्रधान के अलावा उसके साथी संतोष के बारे में भी पता चला है। गिरफ्तार आरोपी आलोक सिंह पिछले एक वर्ष से दोनों के संपर्क में था। यह भी पता चला है कि मंजीत प्रधान अपने घर में ही जाली नोट तैयार करता था। आलोक के साथ पकड़े गए सोनू और बृजेश डिलीवरी का काम करते थे। उनका काम तय स्थानों पर नकली नोटों की खेप पहुंचाना और बदले में असली रकम हासिल करना था। गिरोह का नेटवर्क आजमगढ़, बलरामपुर, बलिया और अयोध्या समेत कई जिलों तक फैला हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन से मिले डिजिटल साक्ष्य पूरे नेटवर्क का खुलासा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। मंजीत प्रधान और उसके साथी संतोष की तलाश में पुलिस टीमों की दबिश जारी है।
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यह है मामला
मड़ियांव पुलिस ने आजमगढ़ के जहानागंज के गंभीरवन निवासी आलोक सिंह, मुबारकपुर के रामपुर मुबारकपट्टी बनकट निवासी सोनू गौड़ और सिधारी के सारगढ़ निवासी बृजेश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के पास से 13,95,600 रुपये के जाली नोट बरामद हुए थे। इनमें 100 रुपये के 6,946 और 500 रुपये के 1,402 नोट शामिल हैं। आरोपियों के पास से एक मोबाइल फोन भी बरामद किया गया था।
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