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वाराणसी पेयजल परियोजना में धांधली का मामला : जल निगम के पूर्व एमडी समेत 31 पर गिरी गाज, 17 निलंबित

Tue, 20 Aug 2019 12:49 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Tue, 20 Aug 2019 12:49 PM IST
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corruption in varanasi drinking water project : action against water corp md with 31, 17 suspended
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
वाराणसी में चल रही पेयजल परियोजनाओं में 227.21 करोड़ के काम में किए गए बंदरबांट के मामले सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए जल निगम के पूर्व एमडी एके श्रीवास्तव समेत कुल 32 जल निगम कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें तीन कैशियर समेत 14 अभियंताओं को जहां निलंबित किया गया है, वहीं पूर्व एमडी समेत तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। जबकि सेवा निवृत्त हो चुके 12 अभियंताओं के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई करते हुए उनसे क्षतिपूर्ति वसूलने का आदेश दिया गया है। इनके अलावा सांठगांठ से काम लेने वाले 125 ठेकेदारों को भी ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है।  
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प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने सभी अभियंताओं के खिलाफ की गई कार्रवाई का आदेश सोमवार को जारी कर दिया है। बता दे कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में पेयजल की परियोजनाओं की समीक्षा की थी। जिसमें पाया गया था जल निगम के अभियंताओं ने ठेकेदारों से सांठगांठ करके 227.21 करोड़ का काम बिना टेंडर के ही बांट दिया है।
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मुख्यमंत्री को यह भी शिकायत मिली थी कि पेयजल परियोजनाओं को कई टुकड़ों में बांटते हुए 1200 बांड बनाकर काम बांट दिए गए हैं। इसके अलावा व्यापक पैमाने पर धांधली की गई है। कई परियोजनाओं को इस तरह से तैयार किया गया है जिसका आम लोगों को कोई लाभ नहीं मिलने वाला है।

इसी तरह तमाम कार्यों की गुणवत्ता भी मानक से काफी निचले स्तर का पाया गया था। मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई तो पाया गया कि नियमानुसार सभी कार्य प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीपीसी) पद्धति पर कराया जाना चाहिए था, लेकिन अभियंताओं ने ऐसा न करके काम को मनमर्जी से टुकड़ों में बांट दिया। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर प्रमुख सचिव नगर विकास ने जल निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक एके श्रीवास्तव समेत सभी अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई की है।

इन अभियंताओं को किया गया निलंबित

तत्कालीन परियोजना प्रबंधक- एससी दूबे व एके सिंह, आरपी पांडेय अधीक्षण अभियंता, वीपी मौर्या  सहायक परियोजना प्रबंधक, सुरेन्द्र कुमार सिंह अधिशासी अभियंता, एसएस कौशिक, अनूप सिंह, व संजय कुमार (सभी सहायक अभियंता), शत्रुघ्न, नवनीत, जितेन्द्र सिंह, जीआर गुप्ता व डीएन तिवारी, गरिमा कुशवाहा (सभी अवर अभियंता) के अलावा कैशियर रवीन्द्र नाथ सिंह, हरिओम व तृप्ति गुप्ता शामिल हैं।

सेवानिवृत्त हो चुके इन 12 लोगों पर विभागीय कार्रवाई
तत्कालीन जीएम रमेश सिंह, परियोजना प्रबंधक कन्हैया राम, परियोजना अभियंता गजानंद वर्मा, मुख्य अभियंता आरके द्विवेदी व केके सिंह, राजेश श्रीवास्तव, सतीश अधीक्षण, अशोक कुमार श्रीवास्तव, अनूप सक्सेना व एसएल सिंह कुशवाहा (सभी अधीक्षण अभियंता), मुस्तफा अंसारी सहायक अभियंता व एमएन सिद्दकी अवर अभियंता शामिल हैं। 

पूर्व एमडी समेत तीन के खिलाफ एफआईआर के आदेश

पूर्व एमडी अनिल कुमार श्रीवास्तव के अलावा तत्कालीन परियोजना प्रबंधक आरपी पांडेय व सतीश कुमार के खिलाफ एफआईआर करने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें पूर्व एमडी तो रिटायर हो चुके हैं, जबकि आरपी पांडेय वाराणसी में ही बतौर अधीक्षण अभियंता तैनात हैं, जबकि सतीश कुमार अधिशासी अभियंता के पद पर प्रयागराज में तैनात हैं और उनका तबादला हाल में ही मेरठ के लिए हुआ था, लेकिन उन्होंने वहां कार्यभार नहीं संभाला है। सूत्रों के खिलाफ जल्द ही इन दोनों अभियंताओं को भी निलंबित कर दिया जाएगा।

2010 में शुरू हुई थी परियोजना
जेएनएनयूआरएम के तहत वाराणसी के हर घर तक पेयजल पहुंचाने के लिए इस परियोजना फेज-दो की शुरूआत 2010 में शुरू की गई थी। इसे 2015 तक परियोजना को पूरा करना था। पाइप डालने के बाद जब इसकी टेस्टिंग की गई तो कई स्थानों पर पाइपों में लीकेज होने लगा। बीते जून महीने में वाराणसी पहुंचे  मुख्यमंत्री ने जब परियोजना की समीक्षा की तो कई स्थानीय विधायकों ने उनसे परियोजना की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई थी। इसपर मुख्यमंत्री ने जांच के आदेश दिए थे और दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
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