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सर्दी-प्रदूषण के कॉकटेल से और खतरनाक होगा कोरोना

Thu, 29 Oct 2020 01:03 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Thu, 29 Oct 2020 01:03 AM IST
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Corona will be more danger after diwali
सर्दी-प्रदूषण के कॉकटेल से और खतरनाक होगा कोरोना
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दीपावली बाद प्रदूषण के कॉकटेल से कोरोना और भी घातक हो सकता है। जो कोरोना से ठीक हो चुके हैं उन्हें भी सर्दी के सीजन में बेहद सतर्क रहना होगा।
खासकर ऐसे लोग जिनके फेफड़े कोरोना से प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वायु प्रदूषण के बीच कोविड-19 से होने वाली मौतें बढ़ सकती हैं। ऐसे में प्रदूषण व कोरोना दोनों से बचने का एक ही उपाय है कि नियमित तौर पर मास्क लगाएं।
तापमान गिरने के साथ हवा ज्यादा संघनित होगी
क्योंकि अभी न्यूनतम तापमान 15.7 है। दीपावली तक इसमें और गिरावट आएगी। तापमान गिरने के साथ हवा का संघनन होगा। आसान शब्दों में कहें तो हवा का फैलाव कम होगा। जब तापमान गिरता है तो हवा में मौजूद नमी धूल के कणों के साथ मिल जाती है जिससे कोहरा और स्मॉग बनता है।
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वायरस ज्यादा देर हवा में रह ठहरेगा
अभी औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 326 पर है। मानकों के हिसाब से सेहतमंद हवा का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 50 होना चाहिए। जो ट्रेंड दिख रहा है उससे साफ है कि तापमान में गिरावट के साथ प्रदूषण का स्तर और बढ़ेगा जिससे हवा जहरीली होगी। प्रदूषण बढ़ने पर धूल के कण कम ऊंचाई पर जमा हो जाएंगे, तो वायरस आसानी से ज्यादा देर तक ठहरेगा।
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फेफड़े पर दोहरा वार
वायरस के हवा में ज्यादा देर ठहरने का मतलब है ज्यादा लोग संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। इसीलिए दीपावली के बाद सेकंड वेव की आशंका जताई जा रही है। वहीं पहले से कोविड-19 की चपेट में आ चुके लोगों के लिए ये दोहरे वार जैसा होगा। खासकर उन लोगों के लिए जिनके फेफड़ों पर वायरस ने गंभीर असर डाला है। उन्हें प्रदूषण की वजह से सांस संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। कई मामले दोबारा संक्रमण के आ चुके हैं। ऐसे में दोबारा संक्रमण की आशंका भी बढ़ेगी।
आईसीएमआर पहले ही कर चुका है सचेत
यूरोप और अमेरिका में शोध से पता चला है कि अधिक समय तक वायु प्रदूषण का सामना करने से कोरोना के कारण मौत के मामले बढ़ सकते हैं। आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने भी यही बात कही है। उन्होंने बताया कि वायरस के कण पीएम 2.5 पार्टिकुलेट मैटर के साथ हवा में रहते हैं, लेकिन वे सक्रिय वायरस नहीं हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वायु प्रदूषण के उच्च स्तर से कोविड-19 की स्थिति और खराब हो सकती है। कोरोना और प्रदूषण से बचाव का सबसे सस्ता तरीका मास्क पहनना है।
कॉकटेल दिखाने लगा है असर
लोहिया संस्थान के इमरजेंसी मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रो. डॉ. राजीव रतन सिंह बताते हैं कि कोरोना से ठीक होने वाले तमाम मरीजों के फेफड़ों में समस्या मिली है। फेफड़ों में सिकुड़न से लोग सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत कर रहे हैं। ऐसे में प्रदूषण बढ़ने और मौसम बदलने से तकलीफ बढ़ेगी। खांसी और सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है। इसके चलते दवा से अधिक प्रदूषण से बचने का प्रयास करना होगा। सांस से जुड़ी एक्सरसाइज करें। ठंड में बंद कमरे में आग जलाकर सामने बैठने से परहेज करें। ठंड और प्रदूषण वायरस को बढ़ने में मददगार बनेंगे।

सांस के मरीजों के लिए भी खतरा है प्रदूषण
केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डॉ. वेद प्रकाश का कहना है कि पहले भी सर्दी में प्रदूषण बढ़ते ही सांस के मरीजों को अलर्ट किया जाता था। इस बार चुनौतियां बढ़ गई है, क्योंकि उन्हें सांस की पुरानी बीमारी के साथ प्रदूषण व कोरोना दोनों से जूझना होगा। ऐसे में मास्क का प्रयोग करें और प्रदूषित इलाके में जाने से बचें। पहले से चल रहीं दवाएं लेते रहें। बताया कि सांस की नलिकाओं की ऊपरी परत ठंडी हवा के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती है। ऐसे में अस्थमा के मरीजों की एलर्जी बढ़ जाती है। कई में सांस का अटैक तक देखा गया है। इसका ध्यान रखें कि सर्दी-जुकाम में खांसी आते समय कफ निकलता है, लेकिन कोरोना से ग्रसित मरीज को सूखी खांसी आती है। वायरस के लक्षण पांच से सात दिनों में पता लगते हैं, जिसमें सूखी खांसी के लक्षण महसूस हो सकते हैं। सांस लेने में तकलीफ, बुखार हो तो तत्काल डॉक्टर से मिलें। बाहर से सफर करके आए हैं या किसी सफर करके आने वाले से संपर्क में आए तो भी अलर्ट रहें।
ऐसे करें बचाव
- नियमित तौर पर मास्क का प्रयोग करें।
- साथ में मौजूद वस्तुएं सैनिटाइज करते रहें।
- बाहर निकलें तो लोगों से एक मीटर की दूरी बनाए रखें।
- घर में प्रवेश करें तो दरवाजे के हैंडल और डोरबेल को सैनिटाइज कर दें।
- लिफ्ट का बटन छुएं तो हाथ सैनिटाइज करें।
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