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लखनऊ : कोरोना से मरीज की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग को हालचाल लेने की आई सुध
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लखनऊ। गोमतीनगर के विक्रांत खंड की कुमुद मिश्रा (62) अप्रैल में पॉजिटिव हुईं। 27 अप्रैल को उनकी मौत हो गई। कोविन पोर्टल पर पॉजिटिव रिपोर्ट अपलोड होने के डेढ़ माह बाद स्वास्थ्य विभाग को उनकी सुध आई। स्वास्थ्य केंद्र से जब मरीज के बारे जानकारी मांगी गई तो तीमारदारों ने खूब फटकारा। ऐसा ही मामला आशियाना की सरिता द्विवेदी (55) का रहा। वह अप्रैल के आखिर सप्ताह में संक्रमित हुईं। रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड होने पर स्वास्थ्य केंद्र से कॉल कर उनके बारे में जानकारी ली गई तो पति ने पत्नी की मौत मई में घर में होने की बात कहते हुए फोन काट दिया। मार्च से लेकर अब तक कोरोना की चपेट में आए लोगों का स्वास्थ्य विभाग अब फोन पर हाल ले रहा है। इनमें से कई मरीजों की तो मौत तक हो गई है। वहीं, विभाग के सुस्त रवैये से लोगों में इतनी नाराजगी है कि वे फोन पर बात तक नहीं कर रहे।
लोगों की शिकायत है कि अप्रैल में पॉजिटिव आने पर कमांड के जरिये मदद के लिए फोन करते रहे, पर हाल तक नहीं लिया गया। अब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से फोन करके मरीज का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। फैजुल्लागंज के राम विलास (55) बताते हैं कि अप्रैल में पॉजिटिव हुए थे। तीन दिन पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से कॉल कर हाल पूछा गया। उन्होंने कोरोना को मात देेने की बात कही। यह भी कहा कि भर्ती होने के लिए कमांड सेंटर को फोन करते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। वहीं सीएमओ डॉ. संजय भटनागर का कहना है कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिये कॉल करके मरीज की जानकारी इसलिए ली जा रही है जिससे कोई समस्या होने पर पोस्ट कोविड अस्पताल में भर्ती कराने संग इलाज दिलाया जा सके।
मौतों का ब्योरा जुटा रहा विभाग
अप्रैल में कोरोना मरीजों को अस्पताल में बेड तक नहीं मिल पाया था। उनकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड रही। वहीं, बिना अस्पताल पहुंचे ही कई मरीजों की जान चली गई, जिनका रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। ऐसे में विभाग एक-एक करके सभी को कॉल कर मरीज का ब्योरा जुटा रहा है, ताकि डेथ ऑडिट किया जा सके।
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लोगों की शिकायत है कि अप्रैल में पॉजिटिव आने पर कमांड के जरिये मदद के लिए फोन करते रहे, पर हाल तक नहीं लिया गया। अब नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से फोन करके मरीज का रिकॉर्ड मांगा जा रहा है। फैजुल्लागंज के राम विलास (55) बताते हैं कि अप्रैल में पॉजिटिव हुए थे। तीन दिन पहले नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से कॉल कर हाल पूछा गया। उन्होंने कोरोना को मात देेने की बात कही। यह भी कहा कि भर्ती होने के लिए कमांड सेंटर को फोन करते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। वहीं सीएमओ डॉ. संजय भटनागर का कहना है कि सभी स्वास्थ्य केंद्रों के जरिये कॉल करके मरीज की जानकारी इसलिए ली जा रही है जिससे कोई समस्या होने पर पोस्ट कोविड अस्पताल में भर्ती कराने संग इलाज दिलाया जा सके।
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मौतों का ब्योरा जुटा रहा विभाग
अप्रैल में कोरोना मरीजों को अस्पताल में बेड तक नहीं मिल पाया था। उनकी रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड रही। वहीं, बिना अस्पताल पहुंचे ही कई मरीजों की जान चली गई, जिनका रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं है। ऐसे में विभाग एक-एक करके सभी को कॉल कर मरीज का ब्योरा जुटा रहा है, ताकि डेथ ऑडिट किया जा सके।
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