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यूपी : 17 मई सुबह 7 बजे तक बढ़ाया गया लॉकडाउन, माध्यमिक और उच्च शिक्षण संस्थान 20 तक बंद

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 11 May 2021 12:48 PM IST
सार

अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह आंशिक कोरोना कर्फ्यू की तरह होगा। इस दौरान सभी आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

यूपी में पिछले दो दिनों में कोरोना मरीजों की संख्या में आई कमी के बाद प्रदेश सरकार कोई मौका नहीं लेना चाहती। यह देखते हुए सरकार ने प्रदेश में 17 मई तक के लिए लॉकडाउन बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।


अपर मुख्य सचिव सूचना नवनीत सहगल ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि यह आंशिक कोरोना कर्फ्यू की तरह होगा। इस दौरान सभी आवश्यक सेवाएं जारी रहेंगी।


दरअसल, पंचायत चुनाव के बाद गावों में संक्रमण तेजी से पांव पसार रहा है। कर्फ्यू हटाने पर गांवों में संक्रमण में और तेजी आ सकती है। वहीं, 14 मई को ईद का त्यौहार है। ऐसे में, कोई खतरा न लेते हुए लॉकडाउन बढ़ाने का फैसला लिया गया है। गौरतलब है कि यूपी में 30 अप्रैल के बाद से ही आंशिक कोरोना कर्फ्यू है। इसका असर यह हुआ कि कोरोना के सक्रिय मामलों में 60 हजार की कमी आ गई है।

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बता दें कि 29 अप्रैल को योगी सरकार ने प्रदेश में शुक्रवार शाम आठ बजे से मंगलवार सुबह सात बजे तक लॉकडाउन करने का निर्णय लिया था और फिर तीन मई को दो दिनों के लिए इसे और बढ़ा कर गुरुवार (6 मई) सुबह सात बजे तक कर दिया। इसके बाद 5 मई को इसकी मियाद सोमवार मतलब 10 मई सुबह सात बजे तक कर दी है। जिसके एक दिन पहले ही लॉकडाउन 17 मई सुबह सात बजे तक के लिए बढ़ा दिया गया।

इसके साथ ही प्रदेश सरकार ने मॉस्क न पहनने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बिना मास्क के बाहर निकलने वालों पर पहली बार एक हजार रुपये जुर्माना लिया जाएगा। दूसरी बार 10 गुना ज्यादा जुर्माना देना होगा। प्रदेश सरकार ने कोरोना प्रोटोकॉल कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।

20 मई तक बंद रहेंगे निजी व सरकारी शैक्षणिक संस्थान

- प्रदेश में माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के सभी शिक्षण संस्थान एवं कोचिंग सेंटर 20 मई तक बंद रहेंगे। रविवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित टीम-9 की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के पहली से आठवीं तक के सभी स्कूलों को 20 मई, माध्यमिक शिक्षा के सभी विद्यालयों, उच्च शिक्षा विभाग के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के साथ कोचिंग संस्थानों को 15 मई तक बंद करने का आदेश जारी किया था। शनिवार को टीम-9 की बैठक में प्रदेश में कोरोना संक्रमण की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर इसे 20 मई तक बढ़ाया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में 20 मई से ग्रीष्मावकाश शुरू हो जाएगा। ऐसे में अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के स्कूल जुलाई में ही खुलेंगे। ऑनलाइन क्लास भी स्थगित रहेगी। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि  महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के साथ यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के संबंध में जल्द निर्णय किया जाएगा। 

कोविड-19 के नियंत्रण के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देश:
- प्रदेश के सभी सरकारी एवं निजी शैक्षणिक संस्थानों/कोचिंग इंस्टीट्यूट्स में 20 मई तक अवकाश रखा जाए। इस अवधि में ऑनलाइन भी संचालित न की जाएं।

- विगत 24 घंटे की अवधि में 23,333 नए केस आए हैं, जबकि इसी अवधि में 34,636 लोग स्वस्थ होकर डिस्चार्ज हुए हैं। वर्तमान में प्रदेश में 2,33,981 एक्टिव केस हैं, जो कि बीते 30 अप्रैल की तुलना में 77,000 कम हैं। अब तक 12,54,045 प्रदेशवासियों ने कोरोना को हराकर आरोग्यता प्राप्त की है।

- प्रदेश में टेस्टिंग और ट्रेसिंग का अभियान चल रहा है।4,29,53,900 टेस्ट करने के साथ ही उत्तर प्रदेश देश में सर्वाधिक टेस्ट करने वाला राज्य है। बीते 24 घंटे में 2,29,186 टेस्ट संपन्न हुए, जिसमें से 1,11,000 आरटीपीसीआर टेस्ट शामिल है। हमें टेस्टिंग को तेज करने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रयोगशालाओं की क्षमता को बढ़ाये जाने की कार्रवाई तेज की जाए।

बेड्स, चिकित्सा उपकरण मानव संसाधन को दोगुना किए जाने की दिशा में कार्रवाई की जाए

- कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत हमें सभी चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। बेड्स, चिकित्सा उपकरण मानव संसाधन को दोगुना किए जाने की दिशा में तेजी से कार्रवाई की जाए। ऑक्सीजन की बेहतर होती आपूर्ति के दृष्टिगत एल-2 और एल-3 श्रेणी के अस्पतालों में एक लाख बेड की क्षमता करने की कार्यवाही तेज की जाए। अगले कुछ दिनों में चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा 15000 ऑक्सीजन बेड और बढ़ाये जाने की तैयारी है। स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में भी तेजी से कार्रवाई की जाए। निजी अस्पतालों का भी सहयोग लिया जाए।

- सभी 75 जिलों में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर 24×7 नजर रखी जाए। बीते 24 घंटों में साढ़े नौ सौ मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति-वितरण कराया गया है। इसे और बढ़ाये जाने की दिशा में सतत प्रयास किये जा रहे हैं। लखनऊ और कानपुर व आसपास के जिलों के लिए ऑक्सीजन एक्सप्रेस से आपूर्ति कराई गई है। इसी प्रकार सहारनपुर, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर आदि निकटस्थ जिलों के लिए बेहतर प्रबंध किए जा रहे हैं। वाराणसी के लिए 40 टन ऑक्सीजन कल भेजी गई है। गोरखपुर व आसपास के जिलों के लिए विशेष ट्रेन चलाये जाने की तैयारी है। 

- ऑक्सीजन ऑडिट की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर प्रदेश में कुछ हॉस्पिटलों में औसत से कई गुना अधिक ऑक्सीजन की खपत की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग स्तर से ऐसे हॉस्पिटल से समन्वय बनाते हुए खपत को संतुलित करने की कार्यवाही की जाए।

- होम आइसोलेशन में उपचाराधीन कोविड मरीजों व अन्य गंभीर रोगों से ग्रस्त नॉन कोविड मरीजों के लिए ऑक्सीजन आपूर्ति कराने के समुचित प्रबंध किये जायें। घरों में आपूर्ति के लिए मरीज की कोविड पॉजिटिविटी रिपोर्ट, कोई अन्य जाँच, लक्षण युक्त होने अथवा चिकित्सक का परामर्श के आधार पर तत्काल ऑक्सीजन की आपूर्ति कराई जाए।

- कोविड को हराकर स्वस्थ हुए कुछ लोगों में मानसिक व शारीरिक समस्या होने के केस सामने आए हैं। इन पोस्ट कोविड समस्याओं के त्वरित निदान के उद्देश्य से सभी 75 जिला अस्पतालों में पोस्ट कोविड हॉस्पिटल का संचालन किया जाए। यहां मनोचिकित्सक, फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती की जाए ताकि आवश्यकतानुसार लोग इनसे परामर्श प्राप्त कर सकें। स्वास्थ्य विभाग के स्तर से इसकी व्यवस्था अगले 02 दिवसों में कर ली जाए।

अब तक 1,37,22,160 वैक्सीन डोज लगाए जा चुके हैं

- कोरोना से बचाव के लिए प्रदेश सरकार द्वारा सभी नागरिकों को वैक्सीन का सुरक्षा कवर प्रदान किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सर्वाधिक टीकाकरण करने वाला राज्य है। अब तक 1,37,22,160 डोज लगाए जा चुके हैं। 18-44 आयु वर्ग के 1,17,327 लोगों को वैक्सीनेट किया जा चुका है। अब सोमवार से 11 नए जिलों सहित कुल 18 जनपदों में 18-44 आयु वर्ग के लोगों का टीकाकरण संचालित होगा। वैक्सीन वेस्टेज को शून्य रखने के लक्ष्य के दृष्टिगत टीकाकरण के लिए ऑनलाईन पंजीयन व्यवस्था के साथ ही संबंधित लोगों से एक-दो दिन पूर्व संपर्क कर लिया जाए। लोगों के उत्साहवर्धन के लिए जनप्रतिनिधि गण भी टीकाकरण केंद्रों पर व्यवस्था का निरीक्षण करें।

- भविष्य की चुनौतियों के दृष्टिगत चिकित्सकीय मानव संसाधन की उपलब्धता के लिए नियोजित प्रयास किए जा रहे हैं। मेडिकल/पैरामेडिकल अंतिम वर्ष, इंटर्न, प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके युवा, सेवानिवृत्त अनुभवी लोगों की सेवाएं ली जानी चाहिए। इस संबंध में चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया एक सप्ताह में पूर्ण कर लिया जाए। चिकित्सा शिक्षा मंत्री स्तर से इसकी विस्तृत समीक्षा कर ली जाए।

- प्रदेश में रेमडेसिविर सहित जीवनरक्षक मानी जा रही सभी दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जा रही है। भारत सरकार ने 16 मई तक के लिए 04 लाख 95 हजार वॉयल आवंटित किए गए हैं। सरकारी कोविड अस्पतालों में यह इंजेक्शन पूर्णतः निःशुल्क है। निजी अस्पतालों को जरूरत के अनुसार डीएम/सीएमओ द्वारा इसकी उपलब्धता कराई जा रही है। सभी जिलाधिकारी और सीएमओ यह सुनिश्चित करें कि जब भी किसी मरीज को यह इंजेक्शन दिया जाए तो वहां नर्सिंग स्टाफ के साथ-साथ एक चिकित्सक भी उपस्थित हो। इस जीवनरक्षक दवा की मांग, आपूर्ति और खपत का पूरा विवरण रखा जाए।

108 सेवा की 75 फीसदी एम्बुलेंस कोविड के लिए आरक्षित है

- कोविड और नॉन कोविड मरीजों के लिए सभी जिलों में एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। 108 सेवा की 75 फीसदी एम्बुलेंस कोविड के लिए आरक्षित है। इसी प्रकार शव वाहन भी लगाए गए हैं। अंत्येष्टि की क्रिया पूरे सम्मान के साथ निःशुल्क कराई जाए। जनहित से जुड़ी इस व्यवस्था की सतत मॉनीटरिंग करने की आवश्यकता है। निजी एम्बुलेंस की श्रेणीवार दरें तय कर प्रभावी ढंग से लागू कराया जाए।

- स्वच्छता, सैनिटाइजेशन तथा फाॅगिंग कार्य युद्ध स्तर पर किया जाए। इसके लिए फायर विभाग के वाहनों का भी उपयोग किया जाए। मास्क के अनिवार्य उपयोग के सम्बन्ध में प्रवर्तन की कार्यवाही प्रभावी ढंग से जारी रखी जाए। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में निगरानी समिति पूरी सक्रियता से कार्य करें। औद्योगिक इकाइयों में कोविड प्रोटोकाॅल का पालन कराते हुए गतिविधियां संचालित की जाएं।

- कोविड संक्रमण से ग्रस्त ज्यादातर लोग समुचित चिकित्सकीय परामर्श से होम।आइसोलेशन में रहते हुए ही स्वस्थ हुए हैं। बहुत कम संख्या ऐसी है जिन्हें अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होती है। होम आइसोलेशन में उपचाराधीन लोगों को मेडिकल किट समय से उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें। कतिपय जिलों में स्थिति में सुधार की बहुत आवश्यकता है। आइसीसीसी और सीएम हेल्पलाइन हर दिन ऐसे मरीजों से संवाद स्थापित करे। होम आइसोलेशन के मरीजों के लिए टेलीकन्सल्टेशन व्यवस्था को और बेहतर किए जाने की जरूरत है।
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