फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Corona effect is visible on Economy of Uttar Pradesh.

यूपी की अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा कोरोना महामारी का असर, विभागीय सुस्ती से एक चौथाई बजट भी खर्च नहीं

Sat, 10 Oct 2020 12:55 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Sat, 10 Oct 2020 12:55 PM IST
विज्ञापन
Corona effect is visible on Economy of Uttar Pradesh.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala

कोरोना महामारी का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट दिखने लगा है। वित्तीय वर्ष 2020-21 की पहली छमाही बीत गई है, लेकिन सरकारी खर्च रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। वहीं, रोजगार सृजन जैसे कार्यों के लिहाज से पूंजीगत मद, खासकर निर्माण कार्यों के लिए बजट की उपलब्धता फील्ड तक ठीक से नहीं बन पा रही है।

विज्ञापन


हालांकि, बड़ी परियोजनाओं पर असर न पड़े इसके लिए निर्माण एजेंसियों को हर दो महीने की आवश्यकता का बजट दिया जा रहा है। पर, कई विभाग उसे खर्च में सुस्ती दिखा रहे हैं। जैसे- सहकारिता विभाग ने स्वीकृत बजट 257.69 करोड़ के सापेक्ष महज 71.67 करोड़ रुपये ही खर्च किया है। इसी तरह लघु उद्योग-निर्यात प्रोत्साहन विभाग स्वीकृत बजट 278.83 करोड़ रुपये के सापेक्ष 120.43 करोड़ रुपये खर्च कर सका है। इसका साफ संकेत है कि पैसे मिलने के बावजूद विभाग निर्माण परियोजनाओं पर कम खर्च कर रहे हैं। इसका अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ रहा है।
विज्ञापन


चालू वित्तीय वर्ष में पूंजीगत मदों के लिए 1.35 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निर्धारण हुआ है। पर, सरकारी खर्चों का लेखाजोखा रखने वाली कोषवाणी के आंकड़ों के मुताबिक सितंबर तक महज 10.665 हजार करोड़ रुपये ही खर्च हो सका है। हालांकि राजस्व मद के वचनबद्ध खर्चों जैसे वेतन, भत्ते, ब्याज आदि के लिए निर्धारित 4.09 लाख करोड़ रुपये के सापेक्ष 1.09 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। जबकि छह महीने में बजट का आधा हिस्सा तो खर्च हो जाना चाहिए था। पर, अभी तक करीब 23 फीसदी बजट ही खर्च हो पाया है। वैसे इसके पीछे बजट की कम उपलब्धता भी एक बड़ा कारण है।

विज्ञापन
विज्ञापन

अतिरिक्त ऋण और रिक्त पदों पर नौकरी का खोलें दरवाजा

आरबीआई के रिपोर्ट का हवाला देते हुए अर्थशास्त्री प्रो. एपी तिवारी बताते हैं कि कोरोना महामारी के दौर में राज्य सरकारें पूंजीगत खर्च में कमी कर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही हैं।

पूंजीगत खर्च घटने का मतलब है कि विकास व रोजगार के अवसर पर असर पड़ना। हालांकि आरबीआई ने राज्य सरकारों को इस दौरान कुछ शर्तों के साथ अतिरिक्त ऋण लेने की छूट दी है। यूपी सरकार को इसका लाभ उठाने पर गौर करना चाहिए।

इससे पूंजीगत खर्च के लिए बजट की अतिरिक्त व्यवस्था हो सकेगी और रोजगार के अवसर बनते रहेंगे। दूसरा, सरकार मौजूदा हालात में नए पद सृजित नहीं कर सकती है। उसे खर्च में संतुलन बनाना है। मगर रिक्त पदों को प्राथमिकता पर भरना चाहिए। इससे खर्च करने वाला एक नया वर्ग बढ़ेगा, इसके लिए राजस्व मद में सरकार व्यवस्था रखती है।

नौकरीपेशा के लिए खुलकर खर्च करने से ही बनेगी बात

आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ बताते हैं कि आम लोगों ने अपनी जरूरतों पर खर्च करना शुरू कर दिया है। जबकि सरकारी व नौकरीपेशा अभी भी खर्च के लिए मुट्ठी खोलने को तैयार नहीं है। उनकी चिंता नौकरी बचाने और कोरोना महामारी के दौरान इमरजेंसी के लिए बचत करने पर है।

कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन आने तक कमोवेश यही स्थिति रहेगी। इसका असर यह है कि बाजार में वह तेजी नहीं आ रही है, जिसकी दरकार है। लिहाजा बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए सरकार को कुछ कदम तत्काल उठाने चाहिए।

पहला, अगर अर्थव्यवस्था पिछले वर्ष के स्तर पर आ गई है तो सरकार को सभी तरह के एरियर भुगतान पर लगी रोक हटा देनी चाहिए। दूसरा, सरकार को दिवाली का बोनस समय से और पूरा देने पर विचार करना चाहिए। इस बार जीपीएफ में बोनस का अंश डालने से बचना चाहिए। इससे नौकरीपेशा त्यौहार में खर्च करने की स्थिति में होगा और बाजार को बूम मिल सकेगी।

अर्थव्यवस्था का पुरानी स्थिति में आना आसान नहीं

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना का कहना है कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था पिछले साल के सितंबर महीने से भी बेहतर स्थिति में आ गई है। पर, सवाल बजट में तय अतिरिक्त राजस्व प्राप्तियों के लक्ष्य का है। दरअसल, अतिरिक्त राजस्व प्राप्तियों के अनुमान पर कई नई और बड़ी योजनाओं का एलान हुआ था।

चालू वित्तीय वर्ष के पहले छह महीने में राजस्व प्राप्तियों के लक्ष्य पर बुरा असर पड़ा है। कोरोना महामारी में हुए घाटे की भरपाई और अतिरिक्त लक्ष्य की पूर्ति के बिना बजट की तमाम योजनाओं को जमीन पर उतारना आसान नहीं होगा। इसके लिए सरकार को कुछ बड़े फैसलों करने की दरकार होगी। उस पर आने वाले समय में प्रदेश में उपचुनाव भी होने हैं। लोगों की इस पर भी नजर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed