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‘फ्रंट पर डटे आरपीएफ जवान हैं असली कोरोना वॉरियर’, पासिंग आउट परेड में बोले डीजी अरुण कुमार
Tue, 18 Aug 2020 03:06 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Tue, 18 Aug 2020 03:06 PM IST
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आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने दीक्षांत पासिंग आउट परेड की सलामी ली।
- फोटो : amar ujala
आरपीएफ के डीजी अरुण कुमार ने कहा कि कोरोना काल में पुलिस का मानवीय पहलू भी सामने आया है। फ्रंट पर डटे आरपीएफ जवान असली कोरोना वॉरियर हैं। वे बाबू जगजीवनराम आरपीएफ अकादमी में हुए दीक्षांत समारोह में आरपीएफ की तीसरी बटालियन में 345 जवानों की पासिंग आउट परेड को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने सभी रिक्रूट की मार्च पास्ट सलामी भी ली।
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डीजी ने कहा कि भावी जवान रेलवे विशेष सुरक्षा बल के उस मुकाम को फिर हासिल करेंगे, जो इस विशेष बल की पहचान है। कोरोना काल में आरपीएफ जवानों ने फ्रंट पर मोर्चा संभाला है। लाखों प्रवासी श्रमिकों को उनके घरों तक पहुंचाया है। आरपीएफ सिंगल कमांड वाला देश के सबसे बड़े फोर्स में से एक है।
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रेलवे संपत्ति की नहीं, यात्रियों के जान-माल की रक्षा भी आरपीएफ का दायित्व है। अभी हम कई जगहों पर सीआरपीएफ और बीएसएफ जैसी प्रोफेशनल फोर्स पर निर्भर हैं, लेकिन यह जिम्मेदारी अब हमको निभानी होगी। अकादमी की पासिंग आउट परेड के बाद 55 रिक्रूट आरपीएफ में उपनिरीक्षक बन गए। इस मौके पर डीआरएम संजय त्रिपाठी और अकादमी निदेशक प्रणव कुमार भी मौजूद थे।
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बेहतर हुईं व्यवस्थाएं
पिछली बार 10 हजार रिक्रूटों को प्रशिक्षण के लिए आरपीएफ को दूसरे सुरक्षा बल से सहयोग लेना पड़ा था, लेकिन इस बार रेलवे ने अपने ही संसाधनों को उत्कृष्ट कर अकादमी में 12 हजार में से 11 हजार रिक्रूटों को ट्रेनिंग दी। परेड के बाद जो जवान रेलवे में शामिल हुए, उनमें मध्य रेलवे को 41, उत्तर रेलवे को 125, उत्तर मध्य रेलवे को 46, पूर्वोत्तर रेलवे को 42, उत्तर पश्चिम रेलवे को सात, दक्षिण मध्य रेलवे को 41 और पश्चिम रेलवे को 43 जवान मिले।