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दीक्षांत समारोह में बोलीं राज्यपाल, विश्वविद्यालय की छात्राओं का हीमोग्लोबिन चेक होना चाहिए
Thu, 19 Sep 2019 07:22 PM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Thu, 19 Sep 2019 07:22 PM IST
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अवध विश्वविद्यालय में राज्यपाल व मानव संसाधन विकास मंत्री।
- फोटो : amar ujala
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अवध विश्वविद्यालय के 24वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कुल 106 मेधावियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। जिसमें से 26 कुलपति स्वर्णपदक, 63 कुलाधिपति स्वर्णपदक तथा दान स्वरूप पदक के रूप में 17 स्वर्णपदक दिए गए। समारोह में कुल 719 विद्यार्थियों को स्नातक, परास्नातक एवं पीएचडी उपाधि दी गयी।
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विश्वविद्यालय में अपने संबोधन में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल कहा कि हम पढ़े लिखे लोगों का समाज के प्रति दायित्व है। सभी विश्वविद्यालयों को पांच से दस गांवों को गोद लेना चाहिए और यह संकल्प लेना चाहिए कि गांव का कोई भी बच्चा अनपढ़ न रहे। समाज में जितनी भी बुराइयां हैं उन सबका समाधान विश्वविद्यालयों में होना चाहिए।
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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्राओं का हीमोग्लोबिन चेक किया जाना चाहिए। उनका हीमोग्लोबिन 7-8 होता है। जब यही छात्राएं विवाह कर बच्चे को जन्म देती हैं तो वो बच्चे स्वस्थ नहीं होते। सरकार इन गर्भवती महिलाओं पर पैसे खर्च रही लेकिन सकारात्मक परिणाम नहीं आ रहे है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की खराब सेहत चिंता का विषय है।
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राज्यपाल ने कहा कि पर्यटन के क्षेत्र में विश्वविद्यालय बेहतरीन काम कर रहा है। छात्रों को रोजगार के लिए पर्यटन के कोर्स संचालित किया जा रहा है। वहीं, दीवाली पर दीपोत्सव में एक साथ तीन लाख एक हजार दीप जलाकर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाने में कामयाब रहा।
दीक्षांत समारोह में राज्यपाल, मुख्य अतिथि व छात्रों द्वारा पहने गए परिधान भी आकर्षण का केंद्र रहे पुरुषों ने सफेद कुर्ता एवं सफेद पायजामा जबकि महिला परिधानों में सफेद कुर्ता व सफेद सलवार या लाल बॉर्डर की साड़ी के साथ ही सिर पर अवधी संस्कृति की परिचायक पगड़ी पहनी गई।
भगवान राम के चरित्र से प्रेरणा लें युवा
दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि युवाओं को भगवान राम से प्रेरणा लेनी चाहिए। वह हर रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम थे। उन्होंने रामचरितमानस की चौपाई व दोहे सुनाते हुए युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
अरुणिमा को दी डी लिट की मानद उपाधि
दीक्षांत समारोह में पर्वतारोही अवध विश्वविद्यालय की पुरातन छात्रा व पद्मश्री अरुणिमा सिन्हा को डीलिट की मानद उपाधि दी गई। उपाधि देते हुए राज्यपाल ने उनके योगदान व अदम्य साहस का जिक्र किया। दीक्षांत समारोह में आकर्षण का केंद्र ग्रामीण क्षेत्रों से आये प्राथमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राएं व गुरुकुल के बटुक रहे।
पटेल की प्रतिमा का अनावरण
परिसर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने डॉ. राममनोहर लोहिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद सरदार बल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया।
पटेल की प्रतिमा का अनावरण
परिसर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल व केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने डॉ. राममनोहर लोहिया की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इसके बाद सरदार बल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया।
नई शिक्षा नीति का तैयार हो रहा मसौधा : निशंक
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि देश में 96 लाख उच्च शिक्षा के कॉलेज व 33 करोड़ छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। नई शिक्षा नीति का मसौधा तैयार हो रहा है। यह एक भारत, एक पाठ्यक्रम, सशक्त भारत, स्वच्छ भारत बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। हमारा मकसद विश्व शिक्षा की रैंकिंग में आना हैं। वह डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में गुरुवार को आयोजित दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
डॉ. निशंक ने कहा कि एक प्रशासक के रूप में, भाई के रूप में, सामाजिक समसरता के रूप में भगवान श्रीराम समूचे विश्व के लिए अनुकरणीय हैं। भारत की वैभवशाली गरिमा सर्वे भवंतु सुखिन: की परंपरा पर आधारित है। यह हम सभी का दायित्व है कि इस समृद्ध संस्कृति का प्रचार प्रसार करें। एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना तभी साकार होगी जब हम शिक्षा के क्षेत्र में समृद्ध होंगे।
विज्ञान एवं तकनीक पर हमें आगे बढ़ना होगा। भारत ने पूरे विश्व में योग और वसुधैव कुटुम्बकम की विचार धारा को आम जनमानस के बीच फैलाया। आवश्यकता है कि हम अपने विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों को विश्व स्तर की रैंकिंग में शामिल करने का संकल्प लें। ये नये भारत की आधारशिला होगी। 35 वर्षों के बाद नई शिक्षा नीति लागू करने की स्थिति में हम आगे आए हैं।
डॉ. निशंक ने कहा कि एक प्रशासक के रूप में, भाई के रूप में, सामाजिक समसरता के रूप में भगवान श्रीराम समूचे विश्व के लिए अनुकरणीय हैं। भारत की वैभवशाली गरिमा सर्वे भवंतु सुखिन: की परंपरा पर आधारित है। यह हम सभी का दायित्व है कि इस समृद्ध संस्कृति का प्रचार प्रसार करें। एक भारत-श्रेष्ठ भारत की संकल्पना तभी साकार होगी जब हम शिक्षा के क्षेत्र में समृद्ध होंगे।
विज्ञान एवं तकनीक पर हमें आगे बढ़ना होगा। भारत ने पूरे विश्व में योग और वसुधैव कुटुम्बकम की विचार धारा को आम जनमानस के बीच फैलाया। आवश्यकता है कि हम अपने विश्वविद्यालयों एवं शैक्षिक संस्थानों को विश्व स्तर की रैंकिंग में शामिल करने का संकल्प लें। ये नये भारत की आधारशिला होगी। 35 वर्षों के बाद नई शिक्षा नीति लागू करने की स्थिति में हम आगे आए हैं।