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एकेटीयू दीक्षांत समारोह: बांग्लादेश का जिक्र कर राज्यपाल बोलीं- हमें छात्रों को शास्त्र सिखाना है शस्त्र नही

Tue, 13 Aug 2024 05:22 PM IST
ishwar ashish अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Tue, 13 Aug 2024 05:22 PM IST
सार

एकेटीयू में आयोजित दीक्षांत समारोह में  विभिन्न पाठ्यक्रमों के 47269 छात्रों को डिग्री दी गई। साथ ही 39 स्वर्ण, 27 रजत और 25 कांस्य पदक, कुल (91) पदक मेधावियों को दिये गए।

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Convocation day celebration in AKTU.
एकेटीयू के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल। - फोटो : amar ujala

विस्तार

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि हमने बांग्लादेश का हाल देखा है। हमें भारत में ऐसा नहीं चाहिए। हमें अपने बच्चों को शस्त्र नहीं शास्त्र सिखाना है। हमें बच्चों को संस्कार और परंपरा पढ़ाना है। हमें हर घर तिरंगा लगाना है।

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उन्होंने केरल के वायनाड में हुए नुकसान का जिक्र भी किया और कहा कि हमें पर्यावरण को बचाना है। एक पेड़ मां के नाम लगाना है। हमारे सामने भी ऐसी स्थिति न पैदा हो इसके लिए अभी से चेते। हर व्यक्ति, कॉलेज और छात्र पौधे लगाए और वीसी के मोबाइल पर फोटो भेजे।
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विश्वविद्यालय इसके लिए ऐप विकसित करे जिसमें पौधरोपण की जानकारी हो। इससे पहले राज्यपाल ने कुलपति को जल्द नैक कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह अच्छी स्थिति नहीं है कि कॉलेजों के नैक हो गए और आपके नहीं।

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आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चों के लिए किट वितरण में शामिल हुईं राज्यपाल

इसके पहले एकेटीयू में आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चों के लिए किट वितरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि यह नए साल का पहला कार्यक्रम है। आज एकेटीयू का दीक्षांत है, पहला समारोह। इसीलिए आज किट वितरण का कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य आपका विजन बढ़ाना है। आपने स्कूल में काम किया किट वितरण यूनिवर्सिटी में हो रहा है। ताकि आप देखें कि कल यह बच्चे यूनिवर्सिटी में जाएं। हमारा विजन छोटा नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता का बड़ा और व्यापक विजन होना चाहिए। हमें इस तरह सोचना और प्रबंधन करना चाहिए। सुपरविजन सिर्फ भ्रमण नहीं है। हर बच्चा ठीक से पढ़ाई कर रहा, कहीं कोई दिक्कत है, एक्शन ठीक कर रहा है या नहीं? यह काम सुपरवाइजर, सीडीओ का है। मिट्टी, रेत में बैठकर भी काम करना होगा।

उन्होंने कहा कि बच्चों का मनोविज्ञान पढ़ें और इनकी ट्रेनिंग कराएं। बच्चा क्या सोचता है, क्या बनना चाहता है। स्टेज पर सिर्फ बच्चों का कार्यक्रम होगा। विश्व में बच्चों पर शोध हो रहे हैं। इसके बाद ही अभ्यास कार्यक्रम आते हैं। शोध में यह मिला है कि 8 साल की उम्र तक 80 फीसदी बच्चे सीख जाते हैं। बच्चे कौन सी गलती कर रहे हैं, यह देखें। उसकी अंदर की चीजें समझें। मैंने आंगनबाड़ी को आगे बढ़ाने के लिए सोचा है। यूनिवर्सिटी भी आगे बढ़ रही है। आंगनबाड़ी में गर्भावस्था भी आ जाती है। यह काफी महत्वपूर्ण समय है।

कुपोषण दूर करने के लिए पीएम मोदी ने शुरू किया अभियान
इस अवसर पर यूपी सरकार की मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि खिलौने, मेज और कुर्सी से वंचित छात्रों को यह सुविधा मिल रही है। एकेटीयू पहले 1400 को किट वितरण कर चुका है। आज 400 और को वितरण कर रहा है। लखनऊ के साथ के साथ के कई जिलों में और राज्यपाल की पहल पर इस तरह के कार्यक्रम हुए हैं। देश में कुपोषण दूर करने के लिए प्रधानमंत्री की ओर से अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत विभिन्न आयोजन हो रहे, जागरूकता लाई जा रही है।

6 माह से 3 साल के बच्चे व गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार दिया जा रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, राज्यपाल के विजन के अनुरूप काम करें। अक्षर कैसे, नंबर कैसे पहचाने, इसके लिए गतिविधि आयोजित करें। आगरा में जब मैंने बच्चे से लिखवाया तो वह मुझसे ज्यादा लिखने को तैयार था। बच्चों में काफी क्षमता है।

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