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...तो महज 'बाबू' बनकर रह जाएगा पूरा 'विभाग'
लखनऊ/ज्ञान सक्सेना
Updated Tue, 30 Jul 2013 10:58 AM IST
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क्वालिटी कंट्रोल व बाजार में बिकने वाली शराब की नमूना जांच का कार्य आबकारी विभाग से छीनने की तैयारियों से हड़कंप है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक फरमान जारी कर शराब बनाने व बेचने के दौरान इसकी गुणवत्ता निर्धारण की जांच का कार्य खाद्य सुरक्षा व औषधि प्रशासन (एफएसडीए) से कराने को कहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन कार्यरत फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्डस अर्थारिटी ऑफ इंडिया के निदेशक इनफोरसमेंट के इस पत्र से राज्य सरकार भी सकते में है।
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प्रदेश के मुख्य सचिव के माध्यम से सरकार ने केंद्रीय मंत्रालय को इस बाबत एक पत्र भेजकर उक्त आदेश पर आपत्ति जताते हुए इसकी समीक्षा को कहा है।
आबकारी विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि राज्य सरकार द्वारा तय दिशा निर्देश के तहत पृथक स्तर पर गुणवत्ता नियंत्रण कार्य के लिए विभाग के पास पर्याप्त संसाधन व मैनपॉवर मुहैया होने के बाद भी जबरन इस तरह का फरमान थोपे जाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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दूसरी तरफ एफएसडीए के अधिकारियों का कहना है कि एल्कोहलिक ड्रिक्स को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 (एफएसएस एक्ट) में शामिल किए जाने के कारण ही गुणवत्ता नियंत्रण व नमूना जांच का कार्य एफएसडीए से कराने को कहा गया है।
फिलहाल मुख्य सचिव व आबकारी आयुक्त द्वारा अलग अलग स्तर पर केंद्रीय मंत्रालय को पत्र भेजकर दर्ज करायी गयी आपत्तियों के निस्तारण तक एफएसडीए ने भी चुप्पी साध रखी है।
गुणवत्ता निर्धारण व नमूना जांच को लेकर चल रही इस रस्साकसी के चलते ही प्रदेश में बीते कई माह से बाजार में बिकने वाली अंग्रेजी व देसी शराब की जांच पड़ताल का कार्य ठप पड़ा है।
इसका फायदा मिलावटी व घटिया शराब बना मोटा मुनाफा कमाने वाले धंधेबाज बेखौफ हो उठा रहे हैं।
एफएसएसए के निदेशक इनफोर्समेंट की तरफ से मुख्य सचिव प्रदेश सरकार, आबकारी आयुक्त व एफएसडीए आयुक्त को भेजे गए निर्देश में कहा गया है कि एफएसएस एक्ट 2006 में एल्कोहलिक डिक्स को शामिल किए जाने के बाद इसकी गुणवत्ता नियंत्रण व जांच पड़ताल के मानक तय करते हुए इनका क्रियान्वयन खाद्य सुरक्षा व औषधि प्राधिकरण के स्तर से कराने की व्यवस्था निर्धारित की गयी है।
ऐसे में राज्य स्तर पर संचालित आबकारी विभाग सिर्फ लाइसेंसिंग, रेवन्यू कलेक्शन, सेल्स प्रमोशन पालिसी व उत्पाद बिक्री के लिए दुकानों के आवंटन व पंजीयन सहित अन्य प्रशासनिक काम काज ही देखेगा।
एल्कोहलिक ड्रिक्स के उत्पाद व विक्रय के समय गुणवत्ता नियंत्रण व नमूनों की जांच पड़ताल का कार्य आबकारी विभाग की जगह एफएसडीए संभालेगा।
आबकारी विभाग में इस फरमान से मची हड़कंप के बाद आयुक्त स्तर से उक्त आदेश के खिलाफ बिन्दुवार आपत्ति दर्ज कराते हुए पूरे मामले की जानकारी मुख्य सचिव को दी गयी।
राज्य सरकार की तरफ से मुख्य सचिव ने भी केंद्रीय मंत्रालय को पत्र भेजते हुए इस फैसले को अनुचित बताते हुए इस पर पुन: विचार विमर्श को कहा है।