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नगर निगम : तीन साल के कार्यकाल में रिकॉर्ड बने तो विवाद भी जुड़े

Fri, 11 Dec 2020 02:02 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Dec 2020 02:02 AM IST
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controvercial nagar nigam 3 years
महापौर ने दो करोड़ के बॉन्ड, स्वच्छता रेटिंग को बताई उपलब्धि, वहीं सपा और कांग्रेस ने कार्यकाल को बताया निराशाजनक
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प्रवेंद्र गुप्ता
लखनऊ। शहर की प्रथम महिला महापौर संयुक्ता भाटिया और पार्षदों के कार्यकाल के तीन साल 12 दिसंबर को पूरे हो जाएंगे। कार्यकाल का तीसरा साल कोरोना के कारण ज्यादा उपलब्धियों वाला तो नहीं, लेकिन दो करोड़ के बॉन्ड जारी नगर निगम ने उत्तर भारत में कीर्तिमान बनाया है।
वहीं स्वच्छता रेटिंग में 115 से 12वें स्थान पर आने का कमाल भी इसी साल दिखा। पीएम स्व निधि योजना में भी देश में दूसरे पायदान पर नगर निगम रहा। हालांकि, महापौर और पूर्व नगर आयुक्त के बीच विवाद से नगर निगम की किरकिरी भी हुई। तीसरे साल पर कोरोना का पूरा असर रहा। दो पार्षदों के निधन के कारण यह साल दु:खद भी रहा।
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वहीं सपा और कांग्रेस ने इस साल को दु:खद और निराशाजनक बताया है। तीसरे साल में विकास का कोई काम न होने और अफसरों की मनमानी का लेकर अफसोस भी जताया है। पेश है तीसरे कार्यकाल को लेकर महापौर, सपा पार्षद दल नेता यावर हुसैन रेशू और कांग्रेस पार्षद दल नेता ममता चौधरी से बातचीत के प्रमुख अंश।
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अफसर करते रहे मनमानी, नहीं हुआ कोई काम
तीसरा साल बहुत ही खराब रहा। कोई काम नहीं हुआ। अफसर मनमानी कर रहे हैं। कार्यकारिणी और सदन उनके ठेंगे पर हैं। ऐसा लग रहा कि चुनी हुई नगर निगम सदन नहीं बल्कि प्रशासक काल चल रहा है। ठेकेदार-कर्मचारी सब परेशान हैं। विकास ठप है। विकास के कामों की फाइलों को तरह-तरह की आपत्ति लगाकर अटकाया जा रहा है। काम के नाम पर सिर्फ सत्ता से जुड़ी संगठनों को नियमों को ताक पर रखकर नगर निगम की कीमती जमीन और बंगला देने का काम हुआ। कोई संपत्ति इस साल बनी तो नहीं, मगर बेचने के प्रस्ताव जरूर पास किए गए।
- यावर हुसैन रेेशू, नेता सपा पार्षद दल
बॉन्ड को नहीं मानती उपलब्धि
तीसरा साल तो कोराना में ही चला गया। तीसरे साल की कोई उपलब्धि नहीं है। रही बात बॉन्ड की तो वह उपलब्धि नहीं लगती। जिस नगर निगम के पास वेतन बांटने के पैसे नहीं, उसके बॉन्ड का क्या हाल होगा, यह आगे पता चल जाएगा। हां कोरोन संक्रमण को कम करने के लिए नगर निगम ने सैनिटाइजेशन का अच्छा काम किया। कम्युनिटी किचन भी अच्छी पहल रही। पार्षदों ने भी आगे बढ़कर हाथ बंटाया। यह साल दु:खद रहा। पार्षद रमेश कूपर बाबा और वीरू जसवानी हम सबको छोड़कर इस दुनिया से चले गए।
- ममता चौधरी, नेता कांग्रेस पार्षद दल
इस साल 800 करोड़ के हुए विकास काम
इस तीसरे साल में शहर में 800 करोड़ के विकास कार्य हुए। म्यूनिसिपल बॉन्ड जारी किया गया। तंबाकू वितरण लाइसेंस जारी करना वाला देश का पहला नगर निगम बना। लॉकडाउन में रोजाना 80 हजार जरूरतमंदों को भोजन कराया गया। नगर निगम की पांच साल की बैलेंसशीट बनी। आरआर विभाग में दो करोड़ की रिकवरी कराई। स्वच्छता सर्वेक्षण में भी नगर निगम का सबसे तेज सुधार करने वाले नगर निगम का तमगा मिला और देश में 12वीं रैंक मिली।

- संयुक्ता भाटिया, महापौर
कोरोना और विवाद का रहा असर
कोरोना के साथ ही तीसरे साल में महापौर और पूर्व नगर आयुक्त इंद्रमणि त्रिपाठी के बीच चला विवाद पूरे साल रहा। फर्जी भुगतान कराने के मामले में फंसे एक ठेकेदार की शिकायत को आधार पर बनाकर महापौर की ओर से नगर आयुक्त पर कई गंभीर सवाल भी उठाए गए। विवाद नगर आयुक्त के तबादले के बाद शांत हुआ।
परवान नहीं चढ़ पाईं ये योजनाएं
-14वें वित्त और अवस्थापना मद के 70 करोड़ के काम समय बढ़ने के बाद भी पूरे नहीं पाए
- कैसरबाग चकबस्त रोड पर नगर निगम मुख्यालय बनाने का काम शुरू नहीं हो पाया।
- जोन आठ कार्यालय में बनी 16 दुकानों का आवंटन इस साल भी नहीं हो पाया।
- अवैध कब्जे से खाली कराई गई जमीन पर मैरिज लॉन और शादी घर बनाने का काम नहीं हो सका।
- कम नहीं हो पाया निगम पर चढ़ा कर्ज, तीन सौ करोड़ की देनदारी अब भी।
- पूरे शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम भी पूरा नहीं हुआ।
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