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Lucknow News: संविदा चालक-परिचालक ने पेट्रोल डालकर किया आत्मदाह का प्रयास
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संविदा चालक-परिचालक ने पेट्रोल डालकर किया आत्मदाह का प्रयास।
लखनऊ। कैसरबाग बस डिपो में रविवार सुबह वेतन कटौती और अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए संविदा चालक और परिचालक ने पेट्रोल डालकर आत्महत्या का प्रयास किया। मौके पर मौजूद कर्मचारियों ने दोनों को बचाया। घटना के बाद डिपो में हंगामा शुरू हो गया। नाराज कर्मचारियों ने गेट पर प्रदर्शन कर बसों की आवाजाही रोक दी। सूचना पर वजीरगंज पुलिस पहुंची और कर्मचारियों को शांत कराया।
डिपो में संविदा पर तैनात चालक मो. इरफान और परिचालक राघवेंद्र ने आरोप लगाया कि उन्हें अधिकारियों की प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है और समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कर्मचारियों के मुताबिक, बसों के यात्री लोड फैक्टर की रोजाना समीक्षा की जाती है। लोड फैक्टर कम होने पर वेतन रोके जाने और कटौती की कार्रवाई से संविदाकर्मियों में नाराजगी है। उन्होंने सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) सतीश पाल पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग डग्गामार वाहनों के संचालन पर रोक लगाने में भी नाकाम है।
प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने आरएम विमल राजन को ज्ञापन भेज कर प्रशासनिक प्रताड़ना की जांच कराने, बिना कारण ड्यूटी से हटाए गए कर्मचारियों को राहत देने और लंबित वेतन का भुगतान करने की मांग की। कर्मचारियों ने डिपो में 2,710 लीटर डीजल के कथित गबन की जांच कराने की भी मांग उठाई। उनका आरोप है कि एआरएम कर्मचारियों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें घंटों बैठाए रखते हैं। महिला कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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दो घंटे प्रदर्शन, बसों का संचालन प्रभावित
डिपो में करीब दो घंटे तक प्रदर्शन और हंगामा चला। इस दौरान केवल दो बसें ही बाहर निकल सकीं। कार्यशाला में आने वाली बसों को डिपो परिसर और सड़क किनारे खड़ा करना पड़ा। इससे वहां जाम लग गया। कर्मचारियों के विरोध से बसों का संचालन प्रभावित रहा।
आरोप बेबुनियाद : एआरएम
कैसरबाग बस डिपो के एआरएम सतीश पाल ने कर्मचारियों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि लंबित वेतन मुख्यालय से जारी होता है। यात्री लोड फैक्टर की रोजाना समीक्षा कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाती है। डीजल औसत और कम लोड फैक्टर के संबंध में मुख्यालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।
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डिपो में संविदा पर तैनात चालक मो. इरफान और परिचालक राघवेंद्र ने आरोप लगाया कि उन्हें अधिकारियों की प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है और समय पर वेतन नहीं मिल रहा। कर्मचारियों के मुताबिक, बसों के यात्री लोड फैक्टर की रोजाना समीक्षा की जाती है। लोड फैक्टर कम होने पर वेतन रोके जाने और कटौती की कार्रवाई से संविदाकर्मियों में नाराजगी है। उन्होंने सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक (एआरएम) सतीश पाल पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। कर्मचारियों का कहना है कि विभाग डग्गामार वाहनों के संचालन पर रोक लगाने में भी नाकाम है।
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प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने आरएम विमल राजन को ज्ञापन भेज कर प्रशासनिक प्रताड़ना की जांच कराने, बिना कारण ड्यूटी से हटाए गए कर्मचारियों को राहत देने और लंबित वेतन का भुगतान करने की मांग की। कर्मचारियों ने डिपो में 2,710 लीटर डीजल के कथित गबन की जांच कराने की भी मांग उठाई। उनका आरोप है कि एआरएम कर्मचारियों की समस्याएं सुनने के बजाय उन्हें घंटों बैठाए रखते हैं। महिला कर्मचारियों को भी परेशानी झेलनी पड़ती है।
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दो घंटे प्रदर्शन, बसों का संचालन प्रभावित
डिपो में करीब दो घंटे तक प्रदर्शन और हंगामा चला। इस दौरान केवल दो बसें ही बाहर निकल सकीं। कार्यशाला में आने वाली बसों को डिपो परिसर और सड़क किनारे खड़ा करना पड़ा। इससे वहां जाम लग गया। कर्मचारियों के विरोध से बसों का संचालन प्रभावित रहा।
आरोप बेबुनियाद : एआरएम
कैसरबाग बस डिपो के एआरएम सतीश पाल ने कर्मचारियों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि लंबित वेतन मुख्यालय से जारी होता है। यात्री लोड फैक्टर की रोजाना समीक्षा कर रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जाती है। डीजल औसत और कम लोड फैक्टर के संबंध में मुख्यालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई की जा रही है।

संविदा चालक-परिचालक ने पेट्रोल डालकर किया आत्मदाह का प्रयास।