बलरामपुर अस्पताल में कम मरीज होने के बाद भी पहले की तरह सिलेंडर की खपत जारी, कर्मचारी ने दिया ये तर्क
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बलरामपुर अस्पताल में ऑक्सीजन सिलेंडरों की खपत को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कोरोना काल में सीमित मरीज होने के बाद भी यहां ऑक्सीजन सिलेंडरों की खपत लॉकडाउन से पहले की तरह हो रही है। फिलहाल 150 से 200 मरीजों पर जितने सिलेंडर खपाए जा रहे हैं, लॉकडाउन से पहले 750 मरीजों पर इतने ऑक्सीजन सिलेंडरों की जरूरत पड़ती थी। जबकि अन्य नॉन कोविड अस्पतालों में सिलेंडर की खपत महज पंद्रह से बीस ही है।
बलरामपुर 776 बेड क्षमता का अस्पताल है। सोमवार को अस्पताल में 226 मरीज भर्ती थे। इनमें से सिर्फ दस फीसदी मरीजों को ऑक्सीजन स्पोर्ट की जरूरत होती है। लॉकडाउन से पहले अस्पताल में भर्ती करीब 750 मरीजों पर रोजाना 100 से 120 सिलेंडरों की खपत होती थी। अभी भी अफसर रोज करीब 85 से 90 जंबो सिलेंडरों की खपत का दावा कर रहे हैं।
सिविल अस्पताल में रोजाना 15 से 20 सिलेंडरों की जरूरत
सिविल अस्पताल 400 बेड का अस्पताल है। यह नॉन कोविड अस्पताल है। फिलहाल यहां 170 के करीब मरीज भर्ती हैं। यहां पर औसतन 15 से 20 सिलेंडर की जरूरत हर रोज रहती है। दस फीसदी रोगियों को ही ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत पड़ती है। अफसरों का कहना है कि लॉकडाउन के वक्त खपत और भी कम थी।
उधर, रानीलक्ष्मीबाई अस्पताल में 30 से अधिक मरीज भर्ती हैं। यहां पर रोजाना महज चार से पांच सिलेंडर की खपत है। अस्पताल सीएमएस डॉ. अनिल कुमार आर्या के मुताबिक, मरीज कम होने से खपत भी कम हो रही है। लोकबंधु जब तक नॉन कोविड अस्पताल था यहां औसतन आठ से दस सिलेंडर 24 घंटे में लगते थे। कोविड अस्पताल बनने बाद खपत 100 तक पहुंची है।
सिलेंडर में गैस कम होने का तर्क
ऑक्सीजन सिलेंडर की खपत इतनी अधिक होने के बारे में अभी जानकारी नहीं है। ऐसा कुछ होगा तो मामले की जांच कराई जाएगी। - डॉ. डीएस नेगी, स्वास्थ्य महानिदेशक
अस्पताल में मरीजों की तादाद अभी सीमित है। ऑक्सीजन सिलेंडर की इतनी अधिक खपत के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। - डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस, बलरामपुर अस्पताल
अस्पताल में मरीजों की तादाद अभी सीमित है। ऑक्सीजन सिलेंडर की इतनी अधिक खपत के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी। - डॉ. आरके गुप्ता, सीएमएस, बलरामपुर अस्पताल