यूपी: भावनात्मक मुद्दों पर संघर्ष करेगी कांग्रेस, हाईकमान अभी आर्थिक मुद्दों से दूरी बनाने पर सहमत
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कांग्रेस ने यूपी में भावनात्मक मुद्दों पर अधिकाधिक संघर्ष करने की रणनीति बनाई है। इसका उद्देश्य आम लोगों के दिलों में जगह बनाना है। इस बाबत पार्टी ने सभी प्रमुख नेताओं को अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश नेतृत्व को भी इसी रणनीति पर काम करने को कहा गया है।
पार्टी हाईकमान का मानना है कि यूपी में पार्टी को तब तक आर्थिक मुद्दों पर ज्यादा फोकस नहीं करना चाहिए, जब तक वो यहां दूसरे नंबर पर न आ जाए। छुट्टा जानवरों की समस्या, डीजल-पेट्रोल व बीज के दाम में वृद्धि और महंगाई जैसे मुद्दों पर संघर्ष होते रहे हैं, लेकिन पार्टी को इसका अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
पार्टी का यूपी में विकल्प के रूप में न होना इसकी मुख्य वजह मानी गई। इन मुद्दों पर हुए संघर्षों का सपा या बसपा को ही उसका लाभ मिला। इन्हीं कारणों से पार्टी ने यूपी में संघर्ष की रणनीति बदली है, हालांकि इसे सार्वजनिक नहीं किया गया है।
यूपीए सरकार में मंत्री रहे प्रदेश के नेताओं और राज्य नेतृत्व से कहा गया है कि भावनात्मक मुद्दों को ज्यादा से ज्यादा उठाएं। यही वजह है कि आपराधिक घटनाओं के शिकार हुए ब्राह्मण जाति के परिवारों से मिलने का सिलसिला शुरू किया गया है।
कांग्रेस को ही विकल्प के रूप में देखेगी देश की जनता
पार्टी का मानना है कि प्रदेश में भाजपा की सत्ता होने से अभी ब्राह्मण खुलकर उसके साथ नहीं आ सकता, लेकिन मुसीबत में ब्राह्मण जाति के साथ खड़े होने पर भविष्य में सहानुभूति जरूर मिलेगी। हाईकमान ने नेताओं से कहा है कि वे उन भावनात्मक मुद्दों को चिह्नित करें, जिन्हें उठाने से कांग्रेस का जातिगत आधार बढ़ेगा।
अल्पसंख्यकों को भी लगे कि कांग्रेस उनकी मुसीबत में साथ दे सकती है। रणनीतिकारों का मानना है कि जनता अब भाजपा का विकल्प भी राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस को ही मानेगी, बशर्ते कांग्रेस उसे जमीन पर लड़ते हुए और मजबूत होती दिखे।