सपा से गठबंधन के लिए प्रियंका वाड्रा ने संभाला मोर्चा, लिया ये फैसला
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यूपी विधानसभा चुनाव में साथ के साथ गठबंधन को बचाने के लिए कांग्रेस ने आखिरी दांव चला है। सीटों को लेकर पेच फंस जाने से गठबंधन टूटने की चर्चाओं के बीच शनिवार शाम कांग्रेस के चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर व प्रियंका वाड्रा के दूत धीरज श्रीवास्तव ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की। जानकारों की मानें तो कांग्रेस की ओर से 120 सीटों की मांग रखी गई है जबकि अखिलेश 99 सीट पर अड़े हैं।
कांग्रेस आलाकमान की ओर से भेजे गए दूतों की अखिलेश के साथ हुई लंबी बातचीत का कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया। सपा के एक उच्च पदस्थ सूत्र का कहना है कि फिलहाल सीटों को लेकर गतिरोध कायम है।
गठबंधन के चक्कर में चुनावी तैयारियों में काफी पिछड़ गई कांग्रेस ने गठबंधन को परवान चढ़ाने की एक और पहल की है। मुख्य रूप से अमेठी व रायबरेली की सीटों को लेकर पेच फंसा है।
अखिलेश के साथ बातचीत का दिया ब्यौरा
कांग्रेस आलाकमान के दूतों ने दोनों जिलों की कुछ सीटें कांग्रेस को देने की मांग रखी, लेकिन अखिलेश इसके लिए तैयार नहीं बताए जा रहे हैं। पीके व धीरज ने कांग्रेस आलाकमान को अखिलेश के साथ हुई बातचीत का ब्योरा दे दिया है।
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री कांग्रेस आलाकमान के जवाब का इंतजार किए बगैर ही सरकारी आवास 5 कालिदास मार्ग से निजी आवास 4 विक्रमादित्य मार्ग चले गए। रविवार सुबह फिर बातचीत होने की संभावना है।
फिलहाल सपा का रुख सकारात्मक है। कांग्रेस का रुख थोड़ा-बहुत लचीला होने पर बात बन सकती है। सियासी हालात को देखते हुए गठबंधन दोनों ही पार्टियों के लिए जरूरत बन गया है लेकिन मामला इस पर आकर फंस गया है कि कदम कौन पीछे खींचे।
कांग्रेस को है उम्मीद भरी सुबह का इंतजार
कांग्रेस को रविवार की उम्मीद भरी सुबह का इंतजार है। यूपी कांग्रेस से जुड़े नेता शनिवार को सुबह से देर शाम तक खामोश रहे। देर शाम यूपी के प्रभारी और पार्टी महासचिव गुलाम नबी आजाद दस जनपथ सोनिया गांधी के आवास से बाहर निकले।
कार का शीशा थोड़ा सा खोला और संक्षिप्त बातचीत में मीडिया से कहा कि गठबंधन पर सुबह तक पता चलेगा। ऐसा ही बयान प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने दिया। उन्होंने कहा कि बातचीत में किसी तरह की कोई रुकावट नहीं है। दूसरी ओर, गठबंधन न होने की स्थिति में शनिवार को कांग्रेस चुनाव समिति की बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नाम भी तय कर लिए गए हैं।
अखिलेश यादव को सपा और साइकिल मिलने के बाद कांग्रेस इस कदर उत्साहित थी मानो कुछ घंटों में गठबंधन और सीटों के तालमेल की घोषणा हो जाएगी। न तो सपा की ओर से अधिकारिक तौर पर स्पष्ट हुआ कि कितनी सीट देने को तैयार है और न ही कांग्रेस के वार्ताकार स्पष्ट आंकड़ा बता पाए कि उन्हें कितनी सीट चाहिए। कांग्रेस की मानें तो 147 से शुरू हुई बात 53 अंकों तक बढ़ती-घटती रही। सीटों पर बात न बनती देख गुलाम नबी आजाद भी शनिवार को लखनऊ नहीं गए।
अन्य सीटों पर चर्चा करना ही बंद कर दिया
गठबंधन का मन बनाकर बैठी कांग्रेस ये मानकर चल रही थी उसे यूपी की 100-120 सीटों के बीच ही चुनाव लड़ना है। लिहाजा जिताऊ सीटों के अलावा राज्य की अन्य विधानसभा सीटों को पूरी तरह से छोड़कर चल रही थी।
इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि गठबंधन की बात बिगड़ी देख कांग्रेस ने अपने सचिवों और अन्य नेताओं को तलब कर अन्य सीटों पर समीकरण और उम्मीदवारों पर भी चर्चा शुरू की।
दो दिनों में कांग्रेस ने पहले, दूसरे और तीसरे चरण की कुछ सीटों पर पैनल तैयार किया है। कांग्रेस ने बीते 24 घंटे में अकेले चुनाव लड़ने की रणनीति पर भी विचार शुरू कर दिया है।
स्क्रीनिंग कमेटी में तय दो-दो नामों के पैनल पर शनिवार को केंद्रीय चुनाव समिति ने चर्चा की। सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने अंदरखाने अपने उम्मीदवारों का नाम तय कर लिया है जिसकी घोषणा गठबंधन की बातचीत टूटने की स्थिति में की जाएगी।