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मुलायम को पीएम बनाने की शर्त पर कांग्रेसी भड़के!

Sat, 05 Dec 2015 01:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 05 Dec 2015 01:13 AM IST
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Congress does not notice Akhilesh statement.

कांग्रेस से गठबंधन के लिए मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने की मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अनूठी शर्त की शुक्रवार को प्रदेश के  सियासी गलियारों में खूब चर्चा में रही। हालांकि अधिकतर राजनेता इसे बहुत गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

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अखिलेश की शर्त कांग्रेस के गले भी नहीं उतरी। सपा नेता सीएम के बयान पर खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं, लेकिन वे मानते हैं कि मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की थी। कांग्रेस से गठबंधन का मामला बहुत गंभीर नहीं है।
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अखिलेश ने मुलायम सिंह को प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को उपप्रधानमंत्री बनाए जाने पर कांग्रेस से तत्काल गठबंधन पर सहमति जताने की बात कही थी। हालांकि राहुल ने इस सवाल को मुस्कराकर टाल दिया लेकिन प्रदेश कांग्रेस के अधिकतर नेताओं की प्रतिक्रिया तीखी है।
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उनका कहना है कि क्षेत्रीय दल गलतफहमी के शिकार हो जाते हैं। भूल जाते हैं कि राष्ट्रीय दलों के प्रति उनका व्यवहार कैसा होना चाहिए। कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन और पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी कहते हैं कि मुख्यमंत्री का बयान हवा में गांठ बांधने जैसा है।

वहीं, राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने कहा कि अभी सपा से हमारा गठबंधन नहीं है। केंद्रीय नेतृत्व इस संबंध में जो भी फैसला लेगा, उसे माना जाएगा। उधर, भाजपा का कहना है कि सीएम का फॉर्मूला मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है।

कांग्रेस के लिए अखिलेश की शर्त मानना नामुमकिन

Congress does not notice Akhilesh statement.

सपा के एक नेता का कहना है कि कांग्रेस से गठबंधन को लेकर सपा ज्यादा गंभीर नहीं है। मुख्यमंत्री के बयान से भी यही संकेत मिलते हैं। सभी जानते हैं कि यूपी में विधानसभा चुनाव 2017 में होने हैं। इसके लिए बनने वाले किसी गठबंधन में 2019 के लोकसभा चुनाव की शर्तें लागू नहीं की जा सकतीं। देश के कई राज्यों में गठबंधन की राजनीति चलती है। कांग्रेस उन सभी राज्यों में है।

कांग्रेस की लोकसभा चुनाव की रणनीति केवल यूपी और समाजवादी पार्टी को लेकर नहीं बन सकती। सपा भी इससे वाकिफ है। पिछले कुछ दिनों से सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के निशाने पर भी कांग्रेस ज्यादा रहती है। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से गठबंधन के लिए ऐसी शर्त रख दी है जिसे मानना लगभग नामुमकिन है।

नेताजी पीएम बनें, लेकिन कांग्रेस से दोस्ती पर उत्साह नहीं
अधिकतर सपा नेता मुख्यमंत्री के बयान पर सीधे तौर पर टिप्पणी से बच रहे हैं लेकिन नेताजी को प्रधानमंत्री बनाए जाने की ख्वाहिश सभी रखते हैं।

एक सपा नेता ने कहा कि सीएम ने गठबंधन पर सवालों की बौछारों से बचने के लिए गेंद कांग्रेस के पाले में फेंक दी है। मुख्यमंत्री हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करके गंभीर बात कह देते हैं। सभी जानते हैं कि न तो कांग्रेस नेताजी को प्रधानमंत्री बनाने के लिए राजी होगी और न ही गठबंधन होगा।

तीसरे मोर्चे के पीएम पद के स्वाभाविक दावेदार

Congress does not notice Akhilesh statement.

बकौल सपा नेता, नेताजी तीसरे मोर्चे (महागठबंधन) से प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार थे। बिहार में महागठबंधन टूटने से स्थितियां थोड़ी बदली हैं। कांग्रेस भी तभी समर्थन के बारे में सोच सकती है जब तीसरे मोर्चे की ताकत उसके बराबर या उससे ज्यादा हो। तीसरे मोर्चे की अगुवाई करके ही भविष्य में प्रधानमंत्री बना जा सकता है।

राष्ट्रीय दल से पीएम पद मांगना बेमानी

कांग्रेस कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन सत्यदेव त्रिपाठी का कहना है कि पहले तो यह साफ हो जाना चाहिए कि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश में किसी दल से गठबंधन नहीं करेगी। दूसरे क्षेत्रीय दलों के क्षत्रपों को हवा में गांठ नहीं बांधनी चाहिए। राष्ट्रीय दल से यह उम्मीद करना बेमानी है कि वह प्रधानमंत्री पद उसके नेता के लिए छोड़ दे।

मजाक है सीएम का फॉर्मूला

वहीं भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन का कहना है कि अखिलेश यादव का गठबंधन का फॉर्मूला मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है। 2017 में विधानसभा के चुनाव होने हैं और सीएम अपने पिता को प्रधानमंत्री और राहुल गांधी को उपप्रधानमंत्री बनाने का सपना देख रहे हैं। दरअसल, कानून-व्यवस्था संभालने में नाकाम रहने पर अखिलेश बैसाखी की तलाश में जुट गए हैं। कांग्रेस और सपा पुराने सहयोगी हैं, वे नूरा-कुश्ती करते रहते हैं।

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