अब कांग्रेस और भाजपा के आंख की किरकिरी बने आजम
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रामपुर के सरकारी अली जौहर शोध संस्थान को सपा सरकार के कैबिनेट मंत्री आजम खां के ट्रस्ट को देने का विरोध शुरू हो गया है। शुक्रवार को भाजपा व कांग्रेस ने सरकार के इस फैसले की तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता डॉ. मनोज मिश्र ने सरकार से पूछा है कि क्या सरकारी संस्थान किसी निजी ट्रस्ट को सौंपे जा सकते हैं? एक मंत्री की इच्छाओं की पूर्ति के लिए पूरी की पूरी सपा सरकार दंडवत है।
उन्होंने सपा सरकार पर सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि सपा सरकार को ऐसी क्या जल्दी थी कि इस संस्थान को आजम खां के ट्रस्ट को देने का निर्णय कैबिनेट वाई सर्कुलेशन से करना पड़ा।
सपा सरकार प्रदेश की जनता की गाढ़ी कमाई से चल रहे शोध संस्थान को एक निजी ट्रस्ट को सौंप देना प्रदेश की जनता के साथ धोखा है। उन्होंने कहा कि जब पुराने अधिकारियों ने इस पर न केवल असहमति दर्ज की थी बल्कि लम्बी-चैड़ी आपत्ति भी दर्ज की थी तब यह हस्तांतरण किस कारण हो रहा है?
सपा सरकार ने शुरू की खतरनाक परंपरा
भाजपा ने आरोप लगाया कि यह शोध संस्थान देने के पीछे सरकार की मंशा आजम खां को मुलायम का भव्य जन्मदिन मनाने के एवज में रिटर्न गिफ्ट देने की है। सरकार से जनता यह जानना चाहती है कि यह संस्थान लीज पर कितने वर्षों केलिए दिया जा रहा है साथ ही इसके लिए कितना किराया लिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के सरकारी संस्थानों को निजी ट्रस्टो को देने की खतरनाक परम्परा शुरू हो गई है।
वहीं, कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता अमरनाथ अग्रवाल ने कहा कि सरकार ने जनता के साथ धोखा किया है। सरकारी शोध संस्थान को इसलिए दिया गया ताकि आजम खां को खुश किया जा सके।
दरअसल, यह इस शोध संस्थान की करोड़ों की बेशकीमती जमीन आजम खां के आवास से सटी हुई है। अब वे अपनी कोठी को इस संस्थान से मिला लेंगे। कांग्रेस ने कहा कि मुलायम सिंह के जन्मदिन पर आनन-फानन में सरकार ने उन्हें गिफ्ट देने के लिए कई निर्णय कर लिये हैं।