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Lucknow News: मेगाप्रोस्थेसिस तकनीक से बुजुर्ग महिला की जटिल सर्जरी, फिर चलने की जगी उम्मीद
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केजीएमयू।
लखनऊ। एक माह से बिस्तर पर पड़ी बुजुर्ग महिला के दोबारा चलने-फिरने की उम्मीद जगी है। केजीएमयू के डॉक्टरों ने डिस्टल फीमोरल मेगाप्रोस्थेसिस तकनीक से उनकी जटिल सर्जरी की। फ्रैक्चर के कारण जांघ की हड्डी का निचला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। ऐसे में सामान्य प्लेट लगाकर हड्डी जोड़ना संभव नहीं था।
डॉक्टरों ने क्षतिग्रस्त हिस्सा हटाकर विशेष कृत्रिम प्रत्यारोपण लगाया। 29 अक्तूबर को हुई सर्जरी के बाद मरीज ने घुटने की मूवमेंट शुरू कर दी है। आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका मुफ्त ऑपरेशन किया गया।
हरदोई निवासी राधिका (75) करीब एक महीने पहले जमीन पर फिसलकर गिर गई थीं। शुरुआत में चोट की गंभीरता का पता नहीं चला। वह करीब 20 दिनों तक घर पर दर्द की दवाएं लेती रहीं। बाद में एक्स-रे से दाहिनी जांघ की हड्डी के निचले हिस्से में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। गंभीर हालत में उन्हें हरदोई जिला अस्पताल से केजीएमयू रेफर किया गया।
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केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग में डॉ. नरेंद्र सिंह कुशवाहा की निगरानी में इलाज शुरू हुआ। जांच में हड्डी का निचला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिला। अधिक उम्र के कारण हड्डियों की गुणवत्ता भी कमजोर थी। ऐसे में प्लेट से फ्रैक्चर जोड़ना मुश्किल था। डॉक्टरों ने मेगाप्रोस्थेसिस लगाने का फैसला किया। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. शशांक कनौजिया की टीम ने संभाली।
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डॉक्टरों ने क्षतिग्रस्त हिस्सा हटाकर विशेष कृत्रिम प्रत्यारोपण लगाया। 29 अक्तूबर को हुई सर्जरी के बाद मरीज ने घुटने की मूवमेंट शुरू कर दी है। आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका मुफ्त ऑपरेशन किया गया।
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हरदोई निवासी राधिका (75) करीब एक महीने पहले जमीन पर फिसलकर गिर गई थीं। शुरुआत में चोट की गंभीरता का पता नहीं चला। वह करीब 20 दिनों तक घर पर दर्द की दवाएं लेती रहीं। बाद में एक्स-रे से दाहिनी जांघ की हड्डी के निचले हिस्से में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई। गंभीर हालत में उन्हें हरदोई जिला अस्पताल से केजीएमयू रेफर किया गया।
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केजीएमयू के हड्डी रोग विभाग में डॉ. नरेंद्र सिंह कुशवाहा की निगरानी में इलाज शुरू हुआ। जांच में हड्डी का निचला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिला। अधिक उम्र के कारण हड्डियों की गुणवत्ता भी कमजोर थी। ऐसे में प्लेट से फ्रैक्चर जोड़ना मुश्किल था। डॉक्टरों ने मेगाप्रोस्थेसिस लगाने का फैसला किया। एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. शशांक कनौजिया की टीम ने संभाली।