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Lucknow News: केजीएमयू में दुर्लभ सिंड्रोम पीड़ित किशोर का जटिल ऑपरेशन
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लखनऊ। किंग जाॅर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के डाॅक्टरों ने दुर्लभ सिंड्रोम से पीड़ित किशोर का जटिल ऑपरेशन कर उसे भयंकर दर्द से निजात दिलाई है। सुपीरियर मेसेंटेरिक आर्टरी (एमएमए) सिंड्रोम से भोजन करने के बाद भयंकर दर्द होता था। इसकी वजह से किशोर भोजन करने पर भी डरने लगा था।
केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश निवासी 14 वर्षीय किशोर को करीब छह महीने से भोजन करने के बाद पेट दर्द और वजन कम होने की समस्या शुरू हुई। दर्द इतना तेज था कि खाने के गहरे डर (सिटोफोबिया) की समस्या हो गई। इससे उसका वजन कम हो गया और वह कुपोषित की श्रेणी में पहुंच गया। स्थानीय स्तर पर राहत न मिलने पर उसे केजीएमयू रेफर किया गया। यहां रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. अनित परिहार ने एसएमए सिंड्रोम की पुष्टि की। सर्जरी के दाैरान बेहद सावधानी की जरूरत थी, क्योंकि रुकावट वाला भाग काफी मुड़ा हुआ था और महाधमनी सिकुड़ी हुई थी। जरा सी असावधानी से महामधनी को नुकसान पहुंचता, जो किशोर की जान का जोखिम पैदा करता है। इस ऑपरेशन की सफलता पर केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने पूरी टीम को बधाई दी है।
एक लाख में एक को होती है समस्या
यह सिंड्रोम करीब एक लाख की आबादी में से किसी एक को होता है। इसमें आंतों में रुकावट होती है। इससे छोटी आंत के पहले भाग पर दबाव पड़ता है और भोजन करते ही दर्द शुरू हो जाता है। इसका स्पष्ट कारण पता नहीं है। सर्जरी ही इसका उपचार है।
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शामिल हुए कई विभाग के डाॅक्टर
जनरल सर्जरी विभाग की डाॅ. साैम्या सिंह ने इस सर्जरी का नेतृत्व किया और इसमें कई विभाग के डाॅक्टर शामिल हुए। अन्य डाॅक्टरों में पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रो. जेडी रावत, जूनियर रेजिडेंट डॉ. स्वप्निल सिंह और डॉ. पंकज कुमार शामिल थे। एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. एमपी. खान और डॉ. आयुषी (सहायक प्रोफेसर) ने बेहोशी दी।
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केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश निवासी 14 वर्षीय किशोर को करीब छह महीने से भोजन करने के बाद पेट दर्द और वजन कम होने की समस्या शुरू हुई। दर्द इतना तेज था कि खाने के गहरे डर (सिटोफोबिया) की समस्या हो गई। इससे उसका वजन कम हो गया और वह कुपोषित की श्रेणी में पहुंच गया। स्थानीय स्तर पर राहत न मिलने पर उसे केजीएमयू रेफर किया गया। यहां रेडियोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. अनित परिहार ने एसएमए सिंड्रोम की पुष्टि की। सर्जरी के दाैरान बेहद सावधानी की जरूरत थी, क्योंकि रुकावट वाला भाग काफी मुड़ा हुआ था और महाधमनी सिकुड़ी हुई थी। जरा सी असावधानी से महामधनी को नुकसान पहुंचता, जो किशोर की जान का जोखिम पैदा करता है। इस ऑपरेशन की सफलता पर केजीएमयू की कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने पूरी टीम को बधाई दी है।
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एक लाख में एक को होती है समस्या
यह सिंड्रोम करीब एक लाख की आबादी में से किसी एक को होता है। इसमें आंतों में रुकावट होती है। इससे छोटी आंत के पहले भाग पर दबाव पड़ता है और भोजन करते ही दर्द शुरू हो जाता है। इसका स्पष्ट कारण पता नहीं है। सर्जरी ही इसका उपचार है।
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शामिल हुए कई विभाग के डाॅक्टर
जनरल सर्जरी विभाग की डाॅ. साैम्या सिंह ने इस सर्जरी का नेतृत्व किया और इसमें कई विभाग के डाॅक्टर शामिल हुए। अन्य डाॅक्टरों में पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रो. जेडी रावत, जूनियर रेजिडेंट डॉ. स्वप्निल सिंह और डॉ. पंकज कुमार शामिल थे। एनेस्थीसिया विभाग के प्रो. एमपी. खान और डॉ. आयुषी (सहायक प्रोफेसर) ने बेहोशी दी।