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पुलिस के खेल की मुख्यमंत्री से शिकायत, वीडियो क्लिप वायरल
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तिहरे हत्याकांड के आरोपी की गिरफ्तारी के बाद रिमांड न लेने के पुलिस के खेल की मुख्यमंत्री से शिकायत, वीडियो क्लिप वायरल
नोएडा में तिहरे हत्याकांड के आरोपी अमन यादव की कैसरबाग इलाके में पिस्टल के साथ गिरफ्तारी, गाजियाबाद से आए विवेचक द्वारा अदालत के बजाय अस्पताल का रास्ता पकड़ने और जमानती अपराध में आरोपी की रिहाई से हताश पीड़ित ने पुलिस के खेल की मुख्यमंत्री से शिकायत की है।
इसके साथ होटल से गिरफ्तारी के दौरान पुलिस मुख्यालय के अधिकारी द्वारा फोन पर पैरवी की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल की है। आरोप है कि तिहरे हत्याकांड में फरार आरोपी के गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस उसके लाइसेंसी पिस्टल से बेखबर बनी थी।
उधर, तिहरे हत्याकांड में फरार जेपीनगर के मुख्य आरक्षी को महीनेभर पहले निलंबित किया गया है और आरोपी दरोगा गोंडा पुलिस लाइन से डेढ़ महीने से गैरहाजिर है।
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नोएडा में डेढ़ साल पहले भाजपा नेता व स्कूल संचालक शिवकुमार यादव, उनके निजी सुरक्षाकर्मी रहिस पाल और वाहन चालक बलीनाथ की गोली मारकर हत्या के मामले में फरार अमन यादव की मंगलवार को कैसरबाग के होटल से शस्त्र अधिनियम में गिरफ्तारी की गई थी।
गैर जमानती वारंट लेकर गाजियाबाद से आए क्राइम ब्रांच के निरीक्षक अशोक पाल सिंह द्वारा कोर्ट में रिमांड की अर्जी न दिए जाने से रिहाई पर शिवकुमार के भाई योगेश व योगेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को प्रार्थनापत्र भेजने के साथ ट्वीटर पर भी शिकायत की है।
गिरफ्तारी के दौरान अमन यादव द्वारा पुलिस महानिदेशक मुख्यालय के एक अधिकारी से पुलिसकर्मियों की बात कराने व रिहाई का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल की है।
उनका कहना है कि फरार अमन यादव उनका पीछा कर रहा था और दस बार उसी होटल में तब रुका, जब वह मुकदमे में कार्रवाई के सिलसिले में पुलिस उच्चाधिकारियों और राजनेताओं से मुलाकात करने आए थे।
हमले की आशंका जताते हुए कहा कि अमन के पास से लाइसेंसी पिस्टल व 29 कारतूस बरामद हुए। न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस ने उसका लाइसेंस निरस्त कराने या शस्त्र कब्जे में लेने की कार्रवाई नहीं की।
लोकसभा चुनाव में लाइसेंसी हथियार जमा कराने का अभियान तिहरे हत्याकांड के फरार आरोपी पर बेअसर रहा।
योगेंद्र यादव ने बताया कि उनके भाई शिवकुमार यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने साजिश रचने में अरुण यादव, वारदात अंजाम देने में सुंदर भाटी, उसके भतीजे अनिल भाटी, भाई सहदेव भाटी, शूटर नरेश तेवतिया, अनिरुद्ध उपाध्याय, अमर सिंह उर्फ फौजी समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया था।
मुकदमे की विवेचना नोएडा से गाजियाबाद स्थानांतरित होने पर तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण ने एसआईटी गठित की और सर्विलांस से छानबीन कराई।
इसमें साजिश रचने वाले अरुण यादव के भाई गोंडा में तैनात उपनिरीक्षक अमित यादव, चाचा जेपीनगर में तैनात मुख्य आरक्षी रवींद्र यादव, अमित के साले प्रवीण यादव व अरुण के साले अमन यादव के नाम उजागर हुए।
चारों के गैर जमानती वारंट लेकर तलाश शुरू की गई थी, लेकिन दबाव के चलते गिरफ्तार नहीं किया गया है।
गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने छह मई को गोंडा व जेपीनगर के पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर उपनिरीक्षक अमित यादव और मुख्य आरक्षी रवींद्र यादव के हत्या के मामले में गैर जमानती वारंट की जानकारी देते हुए दोनों को 16 मई को न्यायालय में उपस्थित कराने को कहा।
इसकी भनक लगने पर अमित यादव चार मई को छुट्टी लेकर रवाना हुआ। इसके बाद से गैरहाजिर है। वहीं, जेपीनगर के पुलिस अधीक्षक ने फरार मुख्य आरक्षी रवींद्र यादव को महीना भर पहले निलंबित कर दिया था।
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नोएडा में तिहरे हत्याकांड के आरोपी अमन यादव की कैसरबाग इलाके में पिस्टल के साथ गिरफ्तारी, गाजियाबाद से आए विवेचक द्वारा अदालत के बजाय अस्पताल का रास्ता पकड़ने और जमानती अपराध में आरोपी की रिहाई से हताश पीड़ित ने पुलिस के खेल की मुख्यमंत्री से शिकायत की है।
इसके साथ होटल से गिरफ्तारी के दौरान पुलिस मुख्यालय के अधिकारी द्वारा फोन पर पैरवी की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल की है। आरोप है कि तिहरे हत्याकांड में फरार आरोपी के गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस उसके लाइसेंसी पिस्टल से बेखबर बनी थी।
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उधर, तिहरे हत्याकांड में फरार जेपीनगर के मुख्य आरक्षी को महीनेभर पहले निलंबित किया गया है और आरोपी दरोगा गोंडा पुलिस लाइन से डेढ़ महीने से गैरहाजिर है।
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नोएडा में डेढ़ साल पहले भाजपा नेता व स्कूल संचालक शिवकुमार यादव, उनके निजी सुरक्षाकर्मी रहिस पाल और वाहन चालक बलीनाथ की गोली मारकर हत्या के मामले में फरार अमन यादव की मंगलवार को कैसरबाग के होटल से शस्त्र अधिनियम में गिरफ्तारी की गई थी।
गैर जमानती वारंट लेकर गाजियाबाद से आए क्राइम ब्रांच के निरीक्षक अशोक पाल सिंह द्वारा कोर्ट में रिमांड की अर्जी न दिए जाने से रिहाई पर शिवकुमार के भाई योगेश व योगेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री को प्रार्थनापत्र भेजने के साथ ट्वीटर पर भी शिकायत की है।
गिरफ्तारी के दौरान अमन यादव द्वारा पुलिस महानिदेशक मुख्यालय के एक अधिकारी से पुलिसकर्मियों की बात कराने व रिहाई का दबाव बनाए जाने का आरोप लगाते हुए वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल की है।
उनका कहना है कि फरार अमन यादव उनका पीछा कर रहा था और दस बार उसी होटल में तब रुका, जब वह मुकदमे में कार्रवाई के सिलसिले में पुलिस उच्चाधिकारियों और राजनेताओं से मुलाकात करने आए थे।
हमले की आशंका जताते हुए कहा कि अमन के पास से लाइसेंसी पिस्टल व 29 कारतूस बरामद हुए। न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद भी पुलिस ने उसका लाइसेंस निरस्त कराने या शस्त्र कब्जे में लेने की कार्रवाई नहीं की।
लोकसभा चुनाव में लाइसेंसी हथियार जमा कराने का अभियान तिहरे हत्याकांड के फरार आरोपी पर बेअसर रहा।
योगेंद्र यादव ने बताया कि उनके भाई शिवकुमार यादव की हत्या के मामले में पुलिस ने साजिश रचने में अरुण यादव, वारदात अंजाम देने में सुंदर भाटी, उसके भतीजे अनिल भाटी, भाई सहदेव भाटी, शूटर नरेश तेवतिया, अनिरुद्ध उपाध्याय, अमर सिंह उर्फ फौजी समेत दस लोगों को गिरफ्तार किया था।
मुकदमे की विवेचना नोएडा से गाजियाबाद स्थानांतरित होने पर तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वैभव कृष्ण ने एसआईटी गठित की और सर्विलांस से छानबीन कराई।
इसमें साजिश रचने वाले अरुण यादव के भाई गोंडा में तैनात उपनिरीक्षक अमित यादव, चाचा जेपीनगर में तैनात मुख्य आरक्षी रवींद्र यादव, अमित के साले प्रवीण यादव व अरुण के साले अमन यादव के नाम उजागर हुए।
चारों के गैर जमानती वारंट लेकर तलाश शुरू की गई थी, लेकिन दबाव के चलते गिरफ्तार नहीं किया गया है।
गाजियाबाद के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने छह मई को गोंडा व जेपीनगर के पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजकर उपनिरीक्षक अमित यादव और मुख्य आरक्षी रवींद्र यादव के हत्या के मामले में गैर जमानती वारंट की जानकारी देते हुए दोनों को 16 मई को न्यायालय में उपस्थित कराने को कहा।
इसकी भनक लगने पर अमित यादव चार मई को छुट्टी लेकर रवाना हुआ। इसके बाद से गैरहाजिर है। वहीं, जेपीनगर के पुलिस अधीक्षक ने फरार मुख्य आरक्षी रवींद्र यादव को महीना भर पहले निलंबित कर दिया था।