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Lucknow News: कमीशनबाज डॉक्टर बाहर से दवा लिखने से नहीं आ रहे बाज

Mon, 06 Apr 2026 02:22 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 06 Apr 2026 02:22 AM IST
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Commission-seeking doctors are not refraining from prescribing medicines from outside.
केजीएमयू।
लखनऊ। केजीएमयू प्रशासन के तमाम दावों व सख्ती के बाद भी डॉक्टर कमीशन के चक्कर में मरीजों को बाहर की दवा लिख रहे हैं। यह स्थिति तब है, जब तीन दिन पहले ही कार्य परिषद की बैठक में बाहर की दवा लिखने वाले डॉक्टर को चार्जशीट थमाने के आदेश हुए हैं। नया मामला नेत्र रोग विभाग का सामने आया है। यहां आयुष्मान योजना के लाभार्थी मरीज को मोतियाबिंद के ऑपरेशन से पहले डॉक्टर ने न सिर्फ बाहर की दवाएं व लेंस लिख दिया, बल्कि डॉक्टर के स्टाफ ने निजी मेडिकल स्टोर की परची तक थमा दी। इससे नाराज होकर परिजन निजी अस्पताल में इलाज के लिए चले गए।
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काकोरी स्थित जेहटा निवासी गीता कश्यप (57) की दाईं आंख में मोतियाबिंद है। पति गणेश चंद्र कश्यप का कहना है कि 17 मार्च को उन्होंने पत्नी को बलरामपुर अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में दिखाया। डॉक्टरों ने केजीएमयू से आंख का अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दी। 20 मार्च को केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग में डॉक्टर ने आंख का अल्ट्रासाउंड किया। गणेश का आरोप है कि समस्या दाईं आंख में थी, लेकिन रिपोर्ट में बाएं आंख में खून के धब्बे दिखा दिए गए। रिपोर्ट बलरामपुर अस्पताल के डॉक्टर को दिखाया तो वह भी चकरा गए।
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डॉक्टर ने कहा रिपोर्ट पर ध्यान न दो, ऑपरेशन सही होगा

तीन अप्रैल को वह पत्नी गीता को फिर केजीएमयू के नेत्र रोग विभाग ले गए। यहां डॉक्टर ने कहा कि रिपोर्ट भले ही गलत है, लेकिन ऑपरेशन सही आंख का होगा। डॉक्टर ने स्टाफ को ऑपरेशन की फाइल तैयार करने के निर्देश दिए। गणेश आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त ऑपरेशन कराने की बात कही तो कर्मचारी भड़क उठा। उसने आयुष्मान का लाभ देने से साफ इन्कार कर दिया। कहा कि ऑपरेशन के लिए लेंस और सामान बाहर से ही लाना पड़ेगा। स्टाफ ने चिह्नित मेडिकल स्टोर के नाम के साथ सामान की परची भी थमा दी। परची लेकर परिजन तय मेडिकल स्टोर पर पहुंचे तो वहां संचालक ने लेंस के 6,200 रुपये सहित पूरे सामान की कीमत करीब 15 हजार रुपये बताई।
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