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Lucknow News: गठिया मरीजों के लिए आयुर्वेद और आधुनिक इलाज का मेल बन सकता है वरदान
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
लखनऊ। गठिया (रूमेटाइड आर्थराइटिस) के मरीजों के लिए आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा का संयुक्त इस्तेमाल ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है। राजधानी के राज्य आयुर्वेदिक कॉलेज एवं अस्पताल और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) के संयुक्त अध्ययन में यह दावा किया गया है।
यह अध्ययन जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का नेतृत्व आयुर्वेद-आर्थराइटिस ट्रीटमेंट एंड एडवांस्ड रिसर्च सेंटर के डॉ. संजीव रस्तोगी और उनकी टीम ने किया। इसमें कुल 31 मरीजों को शामिल किया गया था। इनमें से 17 मरीजों ने केवल आयुर्वेदिक उपचार लिया। अन्य 14 मरीजों ने आयुर्वेद के साथ आधुनिक दवाएं भी जारी रखीं। शोधकर्ताओं के अनुसार, अधिकांश मरीज पहले से आधुनिक इलाज ले रहे थे। उन्होंने दवाओं के दुष्प्रभाव और पर्याप्त राहत न मिलने के कारण वैकल्पिक उपचार चुना। करीब 42 फीसदी मरीजों ने दवाओं के दुष्प्रभाव को इलाज बदलने का मुख्य कारण बताया। अध्ययन में सूजे हुए जोड़ों की संख्या, दर्द की तीव्रता और बीमारी की सक्रियता जैसे मानकों पर मरीजों का मूल्यांकन हुआ। परिणामों में आयुर्वेदिक और संयुक्त उपचार लेने वाले मरीजों में दर्द, सूजन और जोड़ों की तकलीफ में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
संयुक्त उपचार के बेहतर परिणाम
अध्ययन के परिणामों से पता चला कि केवल आधुनिक इलाज लेने वाले समूह में खास सुधार नहीं दिखा। इसके विपरीत आयुर्वेदिक और संयुक्त उपचार लेने वाले मरीजों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। संयुक्त उपचार लेने वाले समूह में बीमारी की सक्रियता कम करने वाले डीएएस-28 स्कोर में सबसे अधिक सुधार देखा गया। अध्ययनकर्ताओं ने यह भी स्वीकार किया कि अध्ययन का नमूना छोटा था। इसे बड़े स्तर पर और लंबे समय तक किए जाने वाले शोधों से पुष्ट करने की जरूरत है।
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यह अध्ययन जर्नल ऑफ आयुर्वेद एंड इंटीग्रेटिव मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन का नेतृत्व आयुर्वेद-आर्थराइटिस ट्रीटमेंट एंड एडवांस्ड रिसर्च सेंटर के डॉ. संजीव रस्तोगी और उनकी टीम ने किया। इसमें कुल 31 मरीजों को शामिल किया गया था। इनमें से 17 मरीजों ने केवल आयुर्वेदिक उपचार लिया। अन्य 14 मरीजों ने आयुर्वेद के साथ आधुनिक दवाएं भी जारी रखीं। शोधकर्ताओं के अनुसार, अधिकांश मरीज पहले से आधुनिक इलाज ले रहे थे। उन्होंने दवाओं के दुष्प्रभाव और पर्याप्त राहत न मिलने के कारण वैकल्पिक उपचार चुना। करीब 42 फीसदी मरीजों ने दवाओं के दुष्प्रभाव को इलाज बदलने का मुख्य कारण बताया। अध्ययन में सूजे हुए जोड़ों की संख्या, दर्द की तीव्रता और बीमारी की सक्रियता जैसे मानकों पर मरीजों का मूल्यांकन हुआ। परिणामों में आयुर्वेदिक और संयुक्त उपचार लेने वाले मरीजों में दर्द, सूजन और जोड़ों की तकलीफ में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।
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संयुक्त उपचार के बेहतर परिणाम
अध्ययन के परिणामों से पता चला कि केवल आधुनिक इलाज लेने वाले समूह में खास सुधार नहीं दिखा। इसके विपरीत आयुर्वेदिक और संयुक्त उपचार लेने वाले मरीजों की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ। संयुक्त उपचार लेने वाले समूह में बीमारी की सक्रियता कम करने वाले डीएएस-28 स्कोर में सबसे अधिक सुधार देखा गया। अध्ययनकर्ताओं ने यह भी स्वीकार किया कि अध्ययन का नमूना छोटा था। इसे बड़े स्तर पर और लंबे समय तक किए जाने वाले शोधों से पुष्ट करने की जरूरत है।
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