मुख्यमंत्री के आदेश के 24 घंटे बाद सीओ निलंबित, लेकिन एडीजी ट्रैफिक नहीं हटे
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गोरखपुर में वसूली के ठेके के झगड़े में एक पक्ष की पैरवी में दोषी पाए गए सीओ संतोष कुमार सिंह को सोमवार देर रात प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने निलंबित कर दिया है। वहीं एडीजी ट्रैफिक मनमोहन कुमार बशाल को हटाने के मुख्यमंत्री के आदेश का 24 घंटे बाद भी पालन नहीं हो सका है।
प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार ने बताया कि सीओ ट्रैफिक संतोष कुमार सिंह के बारे में एमएलसी सीपी चंद्र के कवरिंग लेटर के साथ सीमा सिंह का शिकायती पत्र मिला था। इसमें सीओ पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। इस प्रकरण की जांच एडीजी जोन गोरखपुर से कराई गई।
पता चला कि पैडलेगंज टेंपो ट्रेवेलर स्टैंड से होने वाली अवैध वसूली का ठेका सीओ संतोष कुमार सिंह ने अपने रिश्तेदार कल्लू सिंह उर्फ विश्वजीत सिंह को दे दिया। यह ठेका सीमा के पति विनय प्रताप सिंह के पास था। ठेका बदलने के बाद विनय और विश्वजीत में विवाद हो गया।
इसमें सीओ ने विनय के खिलाफ कई फर्जी मुकदमे लिखवाकर जेल भेजवा दिया। चूंकि शिकायत मुख्यमंत्री के गृह जनपद की थी, इसलिए अफसरों ने संजीदगी से जांच कर रिपोर्ट डीजीपी के माध्यम से शासन को भेज दी।
रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण में सीओ को तत्काल सस्पेंड कर, झूठे आरोप में जेल भेजे गए व्यक्ति को छुड़ाने और मुख्य आरोपी को जेल भेजने के निर्देश दिए। इसके बाद सोमवार को डीजीपी ने एडीजी गोरखपुर की रिपोर्ट पर सीओ के निलंबन की कार्रवाई के लिए शासन को संस्तुति भेज दी। इसके बाद गृह विभाग ने देर रात निलंबन का आदेश जारी कर दिया।
फिलहाल मुमकिन नहीं जबरन रिटायरमेंट
सूत्रों की मानें तो किसी राजपत्रित अधिकारी के बर्खास्तगी के पीछे बड़ा कारण होना चाहिए। वहीं, जबरन रिटायरमेंट के लिए 50 साल की उम्र जरूरी है। सीओ ट्रैफिक संतोष कुमार सिंह 2013 बैच के पीपीएस अधिकारी हैं और उनकी उम्र 32 वर्ष है। ऐसे में सरकार को उन्हें जबरन रिटायर करने के लिए नियमों को शिथिल करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री की संस्तुति के बाद होगा एडीजी का तबादला
सूत्रों का कहना है कि एडीजी ट्रैफिक एमके बशाल का स्थानांतरण मुख्यमंत्री की संस्तुति के बाद ही होगा। सोमवार को मुख्यमंत्री के मध्यप्रदेश में होने के कारण अब तक उनकी संस्तुति नहीं हो सकी है। वहीं एक पहलू यह भी है कि यातायात में भ्रष्टाचार से जुड़े उपरोक्त प्रकरण में एडीजी की कोई अहम भूमिका नहीं है। सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से बशाल एडीजी ट्रैफिक के रूप में रूटीन कामकाज ढंग से नहीं कर रहे थे। समीक्षा बैठक और महत्वपूर्ण बैठकों में वे या तो अनुपस्थित रहते थे या छुट्टी पर रहते थे। शायद यही वजह है कि मुख्यमंत्री की उनसे नाराजगी अधिक है।