सीएम योगी बोले, यूपी बोर्ड का परीक्षा परिणाम आने से पहले भयभीत था
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने से पहले वे स्वयं भयभीत थे। कहा कि 19 मार्च को हमारी सरकार बनने के बाद से परीक्षा में नकल की खबरें आ रही थीं। हालांकि, नकल रोकने लिए सरकार ने अभियान भी चलाया था। लेकिन यूपी से ठीक पहले बिहार बोर्ड का परिणाम सामने आ गया।
उन्हें इस बात की आशंका थी कि कहीं बिहार की पुनरावृत्ति यहां न हो जाए। मुख्यमंत्री ने कहा, परिणाम 81-82 प्रतिशत आते ही उन्हें लगा कि मेहनत का नतीजा सामने आया है। मेधावी छात्र- छात्राओं को सम्मानित कर उत्तर प्रदेश स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहा है।
मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को लोक भवन में माध्यमिक शिक्षा परिषद, केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट की हाई स्कूल एवं इंटर परीक्षा 2017 के मेधावी बच्चों को पुरस्कार वितरित कर रहे थे।
उन्होंने यूपी बोर्ड की हाई स्कूल टॉपर तेजस्वी देवी, इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन की टॉपर आयुषी श्रीवास्तव, सीबीएसई 12वीं बोर्ड की टॉपर रक्षा गोपाल की प्रशंसा करते हुए कहा कि जीवन में परिश्रम से ही सब संभव है। व्यक्ति के पुरुषार्थ का कोई विकल्प नहीं है। यदि मेहनत के साथ सार्थक दिशा में सकारात्मक कार्य किया है तो सफलता की मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता।
जीवन में सफलता के लिए कभी शॉर्टकट न अपनाएं
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बालिकाएं प्रतिस्पर्धा में स्वयं को योग्य साबित कर रही हैं। उन्हें अवसर मिला तो अपनी प्रतिभा के बल पर कहीं भी झंडा गाड़ सकती हैं। बालिकाओं ने मेहनत के दम पर हर क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है। यह इस बात से जाहिर होता है कि प्रदेश में हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के 147 मेधावी विद्यार्थियों में से 99 बालिकाएं हैं।
मुख्यमंत्री ने अफसोस जताया कि इसके बावजूद लड़कियों को स्कूल जाने से वंचित किया जाता है और समाज में कन्या भ्रूण हत्या होती है। बहुत से लोग सोचते हैं कि बालिका को पढ़ाकर क्या करेंगे? समाज की यह धारणा बदलनी होगी। मुख्यमंत्री ने बच्चों को सलाह दी कि जीवन में सफलता के लिए शार्टकट का रास्ता न अपनाएं बल्कि मेहनत करें। पुरुषार्थ का कोई विकल्प नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत में बड़ी संख्या में अच्छे लोग हैं। उन्हें स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के जरिये आगे बढ़ कर लक्ष्य पाने के लिए अवसर प्रदान करना होगा। कहा कि प्रदेश में 1 से 15 जुलाई तक ‘खूब पढ़ो, आगे बढ़ो’ अभियान चलाया जाएगा ताकि यूपी में कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित नहीं रहे।
माता को शॉल व पिता को पगड़ी पहनाकर किया सम्मानित
समारोह में यूपी बोर्ड की 10वीं में प्रथम दस स्थान पाने वाले 30, 12वीं में प्रथम दस स्थान पाने वाले 87, इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन की कक्षा 10 में प्रथम 4 स्थान पाने वाले नौ, 12वीं में प्रथम 3 स्थान पाने वाले 10 और सीबीएसई की 12वीं में प्रथम दस स्थान पाने वाले विद्यार्थियों को एक- एक लाख रुपये, आईपैड और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। मेधावी बच्चों के पिता को गुलाबी पगड़ी और माता को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
सीएम ने कहा, पुरुषार्थ से हम भाग्य को बदल सकते हैं। जीवन में पलायन का रास्ता नहीं अपनाएं क्योंकि जीवन का नाम परिश्रम, संघर्ष और पुरुषार्थ है। कोई पुरुष अयोग्य नहीं हो सकता। अगर कहीं अयोग्यता है तो इसका मतलब कोई योजक नहीं है।
प्रयोजक के रूप में हमारे शिक्षक, अभिभावक और माता पिता की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, महिला कल्याण मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, अपर मुख्य सचिव संजय अग्रवाल, अवनीश अवस्थी, महिला कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार सहित कई मंत्री और अधिकारी मौजूद थे।
प्रांजल तो बालक है
मुख्यमंत्री जब मेधावी छात्राओं के नाम गिना रहे थे तो उन्होंने आईएससीई के छात्र प्रांजल श्रीवास्तव को भी बालिका मानकर प्रशंसा की। लेकिन प्रांजल जब माता- पिता के साथ खड़ा हुआ तो मुख्यमंत्री अपनी हंसी नहीं रोक सके।
परिणाम से पहले भयभीत से मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, यूपी बोर्ड परीक्षा का परिणाम आने से पहले वे स्वयं भयभीत थे। कहा कि 19 मार्च को हमारी सरकार बनने के बाद से परीक्षा में नकल की खबरें आ रही थीं। हालांकि, नकल रोकने लिए सरकार ने अभियान भी चलाया था। लेकिन यूपी से ठीक पहले बिहार बोर्ड का परिणाम सामने आ गया।
उन्हें इस बात की आशंका थी कि कहीं बिहार की पुनरावृत्ति यहां न हो जाए। मुख्यमंत्री ने कहा, परिणाम 81-82 प्रतिशत आते ही उन्हें लगा कि मेहनत का नतीजा सामने आया है। मेधावी छात्र- छात्राओं को सम्मानित कर उत्तर प्रदेश स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहा है।