कैंसर पीड़ित बच्चों को बेहतर इलाज के साथ मिलेगा अब घर जैसा माहौल
- मुख्यमंत्री करेंगे 8 मई को लोकार्पण
- 50 बेड पर भर्ती हो सकेंगे बच्चे
- यूपी के अलावा नेपाल व बिहार से भी आते हैं कैंसर पीड़ित बच्चे
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केजीएमयू बाल रोग विभाग के थर्ड फ्लोर पर पहुंचते ही ऐसा लगेगा की आप किसी सरकारी नहीं कॉरपोरेट अस्पताल में आ गए हों। वार्ड में घुसते ही ‘विनी द पूह’ का विनी आपका स्वागत करेगा।
इसके अलावा वहां आपको सेंट्रली एयर कंडीशन, हर बेड पर ऑक्सीजन और सक्शन की सुविधा, वार्ड में टीवी, रंग-बिरंगी फाल्स सीलिंग, बच्चों को लुभाने वाले कार्टून के पोट्रेट, शानदार फर्नीचर मिलेगा।
केजीएमयू में तैयार हो रहे स्टेट ऑफ आर्ट पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग का ‘लुक’ कुछ ऐसा ही है, जिसका उद्घाटन रविवार को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव करेंगे।
प्रदेश के पहले पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग 8 मई को वजूद में आ जाएगा। बाल रोग विभाग से अलग कर बनाए गए इस नए विभाग में 50 बच्चों को भर्ती करने की व्यवस्था होगी।
विभाग के थर्ड और फोर्थ फ्लोर पर बनाए गए इस विभाग के वार्ड में प्रत्येक बेड आईसीयू की तरह तैयार किया गया है। जिसमें कैंसर पीड़ित बच्चे के इलाज और उसको सपोर्ट देने के लिए जीवन रक्षक प्रणाली की सुविधा होगी।
इससे बच्चों को इलाज के लिए बेहतर माहौल मिलेगा। शासन से पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग शुरू करने की अनुमति मिलने के बाद इसका रास्ता साफ हुआ है। अभी तक इस यूनिट में सिर्फ 28 बेड ही थे।
नए वार्ड में होगी डे केयर की भी व्यवस्था
जबकि मरीजों की आमद इतनी थी कि एक बेड पर दो से तीन बच्चों को भर्ती करना पड़ता था। नए वार्ड में डे केयर की भी व्यवस्था होगी। जिसमें कीमोथेरेपी के बाद बच्चे को उसी दिन डिस्चार्ज किया जा सकेगा।
पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग की हेड प्रो. अर्चना कुमार ने बताया कि ब्लड कैंसर से पीड़ित हर साल 400 नए मरीज पंजीकृत होते हैं। जबकि हर बृहस्पतिवार को चलने वाली कैंसर ओपीडी में 150 मरीजों को देखा जाता है।
इसमें नए पुराने सभी तरह के मरीज होते हैं। यूपी के अलावा नेपाल व बिहार के कैंसर पीड़ित बच्चे भी केजीएमयू इलाज के लिए आते हैं। सभी को नि:शुल्क इलाज मुहैया कराया जाता है। उन्होंने बताया कि पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग प्रदेश ही नहीं देश का पहला विभाग है।
इसमें मरीजों के इलाज के साथ ही डीएम पाठ्यक्रम भी चलाया जाएगा। डीएम की दो सीटों के लिए एमसीआई में आवेदन किया गया है। इसके अलावा ब्लड कैंसर पीड़ित बच्चों के लिए बोन मेरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी मरीजों के लिए भविष्य में शुरू होगी। अभी प्रदेश में कहीं भी ये सुविधा उपलब्ध नहीं है।
केजीएमयू कुलपति प्रो. रविकांत ने बताया कि पीडियाट्रिक आंकोलॉजी विभाग के दोनों फ्लोर श्री लक्ष्मी चेरिटेबल ट्रस्ट के आर्थिक सहयोग से बन रहे हैं। वार्ड से लेकर उसकी पूरी व्यवस्था ट्रस्ट ने ही की है। ट्रस्टी आदित्य झुनझुनवाला ने इसके लिए केजीएमयू से संपर्क किया था।