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सीएम की अति महत्वाकांक्षी महिला हेल्पलाइन सेवा दो साल में ही हुई ठप, फेल होने की यह रही बड़ी वजह

Fri, 16 Aug 2019 04:36 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Fri, 16 Aug 2019 04:36 PM IST
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cm most ambitious project women helpline 181 stop working within two years
महिला हेल्पलाइन - फोटो : amar ujala
मुख्यमंत्री की अति महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल महिला सुरक्षा के लिए बनी ‘181’ हेल्पलाइन सेवा दो साल में ही ठप हो गई। 25 करोड़ रुपये के बजट के प्रावधान के बाद भी सेवा प्रदाता कंपनी को छह महीने से भुगतान नहीं किया गया। इसके चलते जहां कर्मचारियों को तीन महीने से वेतन नहीं मिला वहीं, डीजल भराने की स्थिति न होने से रेक्स्यू वाहन जहां के तहां खड़े हो गए हैं। फिलहाल एक अच्छी योजना अधिकारियों की अनदेखी की भेंट चढ़ गई।  
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केंद्र सरकार ने विभिन्न तरह की पीड़ित महिलाओं की मदद के लिए तीन साल पहले ‘181’ महिला हेल्पलाइन सेवा शुरू की थी। योजना के संचालन की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र की कंपनी ‘जीवीके एमआरआई’ को पांच वर्षों के लिए दी गई थी। 
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सूत्रों के अनुसार, फरवरी 2019 के बाद कंपनी का भुगतान रोक दिया गया। इस दौरान कंपनी ने तीन महीने तक किसी तरह सेवा का संचालन किया। इसके बाद जिलों में तैनात रेस्क्यू वाहनों में डीजल भराने और कर्मियों को वेतन तक के लाले पड़ गए। इस समय कंपनी का सरकार पर 7.50 करोड़ पर बकाया है। भुगतान से संबंधित फाइल निदेशालय से होते हुए शासन तक काफी पहले पहुंच गई, पर मामला वहीं अटका हुआ है।
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दो साल में 5 लाख महिलाओं को मिली मदद

हेल्पलाइन से दो साल में 5 लाख महिलाओं को मदद दी गई, जबकि घरेलू हिंसा, बलात्कार, यौन शोषण जैसी घटनाओं की पीड़िताओं के अलावा बेसहारा बुजुर्ग महिलाओं, निराश्रित छोटे बच्चों और मानसिक रूप से विक्षिप्त करीब 1.20 लाख महिलाओं का रेस्क्यू किया गया। 

यूपी को मिल चुका है नारी शक्ति पुरस्कार
अन्य प्रदेशों की तुलना में यूपी में यह सेवा बेहतर ढंग से चल रही थी। इसके लिए पिछले साल ही प्रदेश को राष्ट्रपति द्वारा ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ मिला था।

जिम्मेदारों ने चुप्पी साधी 
  • ये तो बड़ी हैरानी की बात है, मुझे पता नहीं, मैं दिखवाती हूं कि ऐसा क्यों हुआ। - मोनिका एस गर्ग, प्रमुख सचिव महिला कल्याण।
  • इस मसले पर मैं कुछ नहीं बोलूंगी, जो भी समस्या है उसका जल्द निस्तारण कर लिया जाएगा। - गरिमा यादव,  विशेष सचिव एवं प्रभारी निदेशक महिला कल्याण।

इस तरह है व्यवस्था

  • 6 सीटर कॉल सेंटर सभी प्रदेशों में खोले गए।
  • 23 जून 2017 को यूपी में कॉल सेंटर की क्षमता 30 सीटर की गई। 
  • 24 जून 2017 को सीएम ने 11 रेस्क्यू वाहनों को झंडी दिखाकर सेवा की शुरुआत की। 
  • 75 जिलों में एक-एक रेस्क्यू वाहन किया गया तैनात।
  • 450 महिला सुगमकर्ताओं की रेस्क्यू वाहनों में की गई नियुक्ति। 
  • 3 महिला सुगमकर्ताओं के साथ एक महिला पुलिसकर्मी भी रेस्क्यू वाहनों में तैनात। 
  • 18 करोड़ रुपये सालाना का सरकार ने किया कंपनी को भुगतान।
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