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चीनी उत्पादों का हमारे बाजार पर जबरदस्त कब्जा, सिर्फ लखनऊ से ही हर साल 7000 करोड़ कमा रहा चीन

Thu, 18 Jun 2020 03:39 PM IST
ishwar ashish नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ
नरेश शर्मा, अमर उजाला, लखनऊ Published by: ishwar ashish Updated Thu, 18 Jun 2020 03:39 PM IST
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china earns around 7000 thousand rupees per year from lucknow market
नाजा मार्केट का एक दृश्य। - फोटो : amar ujala

भारत-चीन सीमा पर भारतीय सैनिकों की शहादत के बाद देश में हर तरफ चीन के प्रति गुस्सा है। कारोबारी भी चीन की कायराना हरकत पर आग बबूला हैं। नाराज व्यापारियों ने अपने तरीके से इस गुस्से का इजहार भी किया है। उन्होंने चीनी सामान के बहिष्कार का अल्टीमेटम भी दिया है। पर, हकीकत यह भी है कि लखनऊ में सालाना करीब 7000 करोड़ का चीनी सामान खप जाता है।  कारोबारियों के ये आंकड़े बताते हैं कि किस तरह से चीन ने हमारे बाजारों पर कब्जा कर लिया है।

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कॉस्मेटिक्स, कपड़ा, इलेक्ट्रॉनिक, इलेक्ट्रिकल, खिलौने व सजावटी आइटम्स के कारोबार में चीन में बनी चीजों की बड़ी हिस्सेदारी है। व्यापारी नेता अतुल कुमार जैन का तो यहां तक अनुमान है कि सभी ट्रेड को मिलाकर सालाना करीब 10 हजार करोड़ का कारोबार चीन के साथ यहां होता है। राजधानी के बहुत से कारोबारी सीधे चीन के शहरों से माल मंगाते हैं, जिनके कंटेनर मुंबई में उतरते हैं।
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महिलाओं की पर्स से हजार करोड़ निकाल लेता है चीन
अमीनाबाद में कॉस्मेटिक्स के होलसेल कारोबारी विनोद अग्रवाल ने बताया कि लखनऊ में सालाना 2500 करोड़ रुपये की लिपस्टिक, पाउडर, परफ्यूम, क्रीम सहित अन्य सौंदर्य प्रसाधन बिक जाते हैं। इसमें से 40 फीसदी यानी करीब 1000 करोड़ के आइटम चीन के होते हैं।

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खिलौनों पर 600 करोड़ तो सजावट पर 1200 करोड़ खर्च

नाका के होलसेल कारोबारी नीलेश अग्रवाल बताते हैं कि राजधानी व आसपास के जिलों के लोग चीन में बने खिलौनों पर 600 करोड़ और सजावटी आइटम पर सालाना 1200 करोड़ खर्च करते हैं। बच्चों के जितने भी खिलौने मार्केट में सजे हैं वह सब चीन में ही तैयार होते हैं। घरों की साज सज्जा के लिए खरीदे जाने वाले आइटम, लाइट, लैंप, झूमर, फाउंटेन, शो पीस, फर्नीचर सब में ज्यादातर चीन के होते हैं।

कपड़ा -- 30
सजावटी आइटम -- 80
इलेक्ट्रिकल  -- 75
इलेक्ट्रॉनिक  -- 70
मोबाइल  -- 70
खिलौने  -- 80
एलईडी टीवी   -- 40
कॉस्मेटिक्स  -- 40

प्रमुख ट्रेड का कारोबार

ट्रेड  -- रुपये(करोड़ में)
कपड़ा   -- 1500
सजावटी आइटम  -- 1200
इलेक्ट्रिकल्स  -- 1000
कास्मेटिक  -- 1000
इलेक्ट्रॉनिक्स  -- 500
मोबाइल्स  -- 650
खिलौने   -- 600
एलईडी टीवी  -- 300
लैपटॉप, कंप्यूटर  -- 250  
कुल  -- 7000  
नोट : आंकड़ों का स्रोत ट्रेड कारोबारी

हर महीने बिकने वाले 10 हजार एलईडी टीवी में 4000 चीन के होते हैं

नाका हिंडोला व्यापार मंडल के अध्यक्ष सतपाल सिंह मीत ने बताया कि राजधानी में हर महीने 10000 एलईडी टीवी बिकते हैं। इनमें 6000 तो ब्रांडेड कंपनियों के, जबकि 4000 चीन में तैयार किए होते हैं। इसके अतिरिक्त चीन में बनाए गए माइक, स्पीकर, और कई तरह की एसेसरीज भी खूब बिकती हैं, जिनका लखनऊ में सालाना 300 करोड़ का कारोबार होता है।

सस्ते मोबाइल के बाजार पर चीन का कब्जा
लखनऊ मोबाइल एसोसिएशन के अध्यक्ष नीरज जोहर बताते हैं कि जितने भी सस्ते मोबाइल बिक रहे हैं वह चीन के हैं। मोबाइल की 90 फीसदी एसेसरीज भी चीन से ही सप्लाई हो रही है। चीनी मोबाइल और एसेसरीज की राजधानी के बाजार में 70 फीसदी हिस्सेदारी है।

चीन में बने हैं प्रॉसेस हाउस
लखनऊ कपड़ा व्यापार मंडल के अध्यक्ष अशोक मोतियानी बताते हैं कि चीन में भारतीय उद्यमियों ने कपड़े के प्रॉसेस हाउस बना रखे हैं। इसकी वजह कपड़े की कम लागत में उसकी बेहतरीन फिनिशिंग होना है।

लखनऊ में सालाना जितना कपड़ा बिकता है, उसमें 30 फीसदी चीन का तैयार हुआ शामिल होता है, जो लगभग सालाना 1200 करोड़ रुपये का बिकता है, जिसमें रेडीमेड भी शामिल है। इसके अतिरिक्त 300 करोड़ रुपये के घर की सजावट के पर्दे, बेड शीट, चादर आज भी बिक जाते हैं।

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