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लखनऊ: केजीएमयू में अब 24 घंटे बच्चों को मिलेगा इलाज
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केजीएमयू में पीडियाट्रिक इंडोक्राइन यूनिट शुरू। (फोटो ः प्रतीकात्मक)
- फोटो : ??? ?????
केजीएमयू के बाल रोग विभाग में पीडियाट्रिक इंडोक्राइन यूनिट शुरू हुई है। इससे डायबिटीज पीड़ित बच्चों को 24 घंटे इलाज की सुविधा मिलेगी।
यूनिट को सेंटर फॉर एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया गया है। ये बातें कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने शुक्रवार को यूनिट की ओपीडी का शुभारंभ करते वक्त कहीं।
कुलपति ने कहा, बहुत से बच्चों की बीमारी का शुरुआती दौर में पता नहीं चलता है। घरवाले भी बीमारी के लक्षण की अनदेखी करते हैं, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है।
ऐसे में इलाज मुश्किल हो जाता है। बताया कि केजीएमयू में अब ऐसे बच्चों के लिए विशेष सेंटर होगा, जहां 24 घंटे इलाज मिलेगा।
विभागाध्यक्ष डॉ. शैली अवस्थी ने कहा कि डायबिटीज पीड़ितों में चार से पांच प्रतिशत बच्चे होते हैं। यूनिट में अभी 50 डायबिटीज टाइप वन से पीड़ित बच्चे पंजीकृत हैं।
समय पर इलाज शुरू होने से बच्चे स्वस्थ जीवन जीते हैं। बताया कि हर सोमवार को पीडियाट्रिक इंडोक्राइन की ओपीडी चलेगी।
भर्ती की अलग से व्यवस्था है, जिसमें मरीज के भोजन व नाश्ते का इंतजाम है। निशुल्क जांच की सुविधा मिलेगी। मरीजों को मुफ्त इंसुलिन देने के लिए अलग से बजट मांगा गया है।
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डॉक्टर व मरीज के परिजन का व्हॉट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है। कार्यक्रम में दस बच्चों को ग्लूकोमीटर दिया गया।
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यूनिट को सेंटर फॉर एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया गया है। ये बातें कुलपति डॉ. बिपिन पुरी ने शुक्रवार को यूनिट की ओपीडी का शुभारंभ करते वक्त कहीं।
कुलपति ने कहा, बहुत से बच्चों की बीमारी का शुरुआती दौर में पता नहीं चलता है। घरवाले भी बीमारी के लक्षण की अनदेखी करते हैं, जिससे समस्या गंभीर हो जाती है।
ऐसे में इलाज मुश्किल हो जाता है। बताया कि केजीएमयू में अब ऐसे बच्चों के लिए विशेष सेंटर होगा, जहां 24 घंटे इलाज मिलेगा।
विभागाध्यक्ष डॉ. शैली अवस्थी ने कहा कि डायबिटीज पीड़ितों में चार से पांच प्रतिशत बच्चे होते हैं। यूनिट में अभी 50 डायबिटीज टाइप वन से पीड़ित बच्चे पंजीकृत हैं।
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समय पर इलाज शुरू होने से बच्चे स्वस्थ जीवन जीते हैं। बताया कि हर सोमवार को पीडियाट्रिक इंडोक्राइन की ओपीडी चलेगी।
भर्ती की अलग से व्यवस्था है, जिसमें मरीज के भोजन व नाश्ते का इंतजाम है। निशुल्क जांच की सुविधा मिलेगी। मरीजों को मुफ्त इंसुलिन देने के लिए अलग से बजट मांगा गया है।
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डॉक्टर व मरीज के परिजन का व्हॉट्सएप ग्रुप भी बनाया गया है। कार्यक्रम में दस बच्चों को ग्लूकोमीटर दिया गया।