फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   children to read about deendayal from the class one standard.

पहली कक्षा से ही दीनदयाल के बारे में पढ़ेंगे बच्चे, कॉमिक्स की तरह तैयार की गई हैं किताबें

Sun, 06 Aug 2017 02:14 AM IST
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 06 Aug 2017 02:14 AM IST
विज्ञापन
 children to read about deendayal from the class one standard.
- फोटो : amar ujala

बच्चे : गुरुजी! सुना है कि अब हमारे मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलने वाला है?

विज्ञापन

गुरुजी चौंके और बोले, यह तुम्हें कैसे पता चला बेटा?

बच्चे : गुरुजी, हमने इन गर्मी की छुट्टियों में अखबार में पढ़ा था कि हमारे वर्तमान मुख्यमंत्री योगीजी मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी के नाम पर रखने वाले हैं।

गुरुजी :  हां! तुमने बिल्कुल ठीक कहा, परंतु क्या तुम पंडित दीनदयाल के बारे में कुछ जानते हो?

सभी बच्चे एक सुर में :  पिछले वर्ष 2016 में पंडित दीनदयाल उपाध्यायजी का जन्म शताब्दी समारोह मनाया गया था, वह एकात्म मानववाद के प्रणेता थे। परंतु इसके अलावा हम और कुछ नहीं जानते हैं।
विज्ञापन


गुरुजी : पंडित दीनदयाल उपाध्याय एक भारतीय विचारक, अर्थशास्त्री, समाजशास्त्री, इतिहासकार और पत्रकार थे, उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाई और भारतीय जनसंघ (वर्तमान भारतीय जनता पार्टी) के अध्यक्ष भी रहे। इन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान भारत द्वारा पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता और पश्चिमी लोकतंत्र का आंख बंद कर समर्थन का विरोध किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

कॉमिक्स की शैली में तैयार की गई है ये पुस्तक

 children to read about deendayal from the class one standard.

ये उस पुस्तक के प्रारंभ के कुछ वाक्य हैं जो जल्द ही प्रदेश के जूनियर हाईस्कूल (कक्षा 8) तक के बच्चों के हाथ में होगी। कॉमिक्स की शैली में तैयार की गई इस पुस्तक में कहानी की तरह छोटे-छोटे वाक्यों के जरिये दीनदयाल उपाध्याय के बारे में बताया गया है। साथ ही बच्चों के दिल और दिमाग में बातों को ठीक से बैठाने के लिए उससे संबंधित रंगीन रेखाचित्र भी हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रतिष्ठान इस पुस्तक को 14 भाषाओं में तैयार करा रहा है, जिससे देश भर में भाजपा या एनडीए शासित राज्यों में भी कक्षा एक से आठ तक की कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को इसे देकर दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन को घर-घर पहुंचाया जा सके।

प्रदेश की योगी सरकार की योजना इस पुस्तक को फिलहाल पाठ्यक्रम के अलावा पढ़वाने की तैयारी है। बच्चे इसको पढ़ें और शिक्षक पढ़ाएं तथा दीनदयाल के बारे में समझाएं, इसके लिए पं. दीनदयाल उपाध्याय से जुड़े प्रसंगों के बारे में स्कूलों में प्रतिदिन बच्चों से वार्तालाप की शैली में सवाल पूछने की व्यवस्था की जाएगी।

कक्षा चार और पांच के बच्चों के लिए इस पुस्तक पर आधारित सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता भी कराई जाएगी। इसमें सफल बच्चों को दीनदयाल से संबंधित अन्य साहित्य भी दिया जाएगा।

एजेंडे पर भी फोकस, ये बताना है मकसद

 children to read about deendayal from the class one standard.

इस पुस्तक में यह समझाने की चेष्टा की गई है कि आजादी के बाद की सरकारें दीनदयाल की नीतियों पर चली होतीं तो देश में मौजूद तमाम समस्याओं का निराकरण कब का हो गया होता। समाज में ज्यादा समरसता और परस्पर प्रगाढ़ता होती।

पुस्तक में यह समझाने की कोशिश की गई है कि उपाध्यायजी के सिद्धांत और विचार पर काम करके ही देश को वैभव तथा स्वाभिमान के शिखर पर पहुंचाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, एक जगह बच्चों और गुरुजी के वार्तालाप के जरिये बताया गया है- ‘दीनदयाल उपाध्याय की अवधारणा थी कि आजादी के बाद भारत का विकास का आधार भारतीय संस्कृति हो न कि अंग्रेजों द्वारा छोड़ी गई पश्चिमी विचारधारा।’

इसी तरह एक जगह दीनदयाल के हवाले से कहा गया है कि एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में भारत पश्चिमी अवधारणाओं जैसे व्यक्तिवाद, लोकतंत्र, समाजवाद, साम्यवाद और पूंजीवाद पर निर्भर नहीं हो सकता।

माध्यमिक कक्षाओं में भी पढ़ेंगे एकात्म मानववाद

 children to read about deendayal from the class one standard.
पंडित दीनदयाल उपाध्याय

प्राइमरी स्कूलों में ही नहीं, माध्यमिक स्कूलों के छात्रों को भी दीनदयाल उपाध्याय के बारे में जानकारी देने की तैयारी है। दीनदयाल उपाध्याय सेवा प्रतिष्ठान के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरुण मिश्र के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव का उनके पास पत्र आया था।

उन्होंने दीनदयाल को पाठ्यक्रम में इस बार शामिल करने का उपाय पूछा था और सामग्री भी मांगी थी। उन्हें सुझाव दिया गया है कि वह उपाध्यायजी के एकात्म मानववाद को माध्यमिक कक्षाओं के सामाजिक विज्ञान या अर्थशास्त्र विषय का हिस्सा बनाकर यह काम कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें एकात्म मानववाद पाठ के लिए 22 पृष्ठ की सामग्री भी भेज दी गई है।

इसलिए चाहते हैं पढ़ाना
मिश्र कहते हैं कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू के बारे में तो सभी जानते हैं लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद से अब तक किसी सरकार ने पं. दीनदयाल उपाध्याय के व्यक्तित्व व कृतित्व तथा विचार व सिद्धांतों के बारे में बच्चों को बताने की जरूरत नहीं समझी। बावजूद इसके कि दीनदयाल ने मूल रूप से भारतीय संस्कृति और स्वदेशी पर आधारित चिंतन दिया।

सभी लोगों में स्वाभिमान व आत्मनिर्भरता पैदा करने की राह दिखाई। संयोग से केंद्र और कई राज्यों में पहली बार ऐसी सरकारें बनीं जिनका चिंतन पूरी तरह स्वदेशी और भारतीय है। बच्चे दीनदयालजी के बारे में पढ़ेंगे और समझेंगे तो पश्चिमी संस्कृति के बंधनों से बाहर निकलेंगे। इससे स्वाभिमानी, संपन्न, सचेष्ट, संस्कृतिनिष्ठ समरस समाज का निर्माण होगा। देश ज्यादा खुशहाल बनेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed