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सुधार गृह में बच्चों की बेंत से पिटाई साथ ही दिया जा रहा है नशा

Fri, 09 Jun 2017 03:31 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Fri, 09 Jun 2017 03:31 PM IST
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children brutally beaten in lucknow observation home
बेंत की प‌िटाई से शरीर पर बने ‌‌न‌िशान - फोटो : amar ujala
शरीर पर बेंत की मार के निशान और होठों पर प्रताड़ना की कहानी, यह हाल था उन बच्चों का जिन्हें कानून विरुद्ध गतिविधियों में लिप्त होने पर संप्रेक्षण गृह (रिफॉर्म होम) भेजा गया था।
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लखनऊ के मोहान रोड स्थित इस संप्रेक्षण गृह में गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्रधिकरण (डीएलएसए) के सचिव ने अचानक दौरा किया तो यह सच सामने आया।इस संप्रेक्षण गृह में करीब 100 बच्चों को रखा गया है।
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इससे पहले भी यहां कई गंभीर शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद यहां के अधीक्षक को हटा दिया गया था। इस बार भी निरीक्षण बच्चों से मिली शिकायतों के बाद ही किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी बाल सुधार गृह पहुंचे और बच्चों को अलग से बुलाकर बातचीत की।
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बच्चों ने उन्हें बताया कि उन्हें यहां कई तरह से प्रताड़ित किया जा रहा है। बात बात पर पिटाई की जाती है। इसके साक्ष्य के तौर पर उन्हाेंने अपने शरीर पर पडे़ चोटों के निशान दिखाए। सचिव ज्ञान प्रकाश ने उनकी सभी शिकायतें सुनीं और अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर डीएलएसए को भेजी है।

इसमें बताया गया है कि बच्चों के शरीर पर कई जगह बेंत जैसी वस्तु से पिटाई के निशान नजर आ रहे हैं। वहीं की जगह खरोचों और चोटों के निशान हैं। यह सब गंभीर स्थितियों की ओर इशारा करते हैं।

उन्हाेंने यहां के अधीक्षक ध्रुव चंद्र को निर्देश दिए हैं कि इन बच्चों का शुक्रवार को मेडिकल करवा कर उन्हें रिपोर्ट सौंपें। इसके बाद आगे की कार्रवाई पर निर्णय किया जाएगा।

‌श‌िकायत करने वालों की भी प‌िटाई

children brutally beaten in lucknow observation home
प‌िटाई से शरीर पर पड़े ‌न‌िशान - फोटो : amar ujala
सचिव ज्ञान प्रकाश त्रिपाठी ने अपनी रिपोर्ट में संस्थान में लगाए गए क्लोज सर्किट टीवी कैमरों की फुटेज को जल्द से जल्द अपने संरक्षण में लेने के लिए डीएलएसए को कहा है। उन्हाेंने कहा कि इन फुटेज के जरिए पूरी हकीकत सामने आ सकती है।

इसी के आधार पर आगे की जांच की जाएगी। यह फुटेज शुक्रवार को डीएलएसए के समक्ष रखने के लिए कहा गया है। इसी वर्ष मई में यहां के बच्चों ने डीपीओ सहित विभिन्न अधिकारियों को संप्रेक्षण गृह के हालात पर पत्र लिखे थे।

इन बच्चों को कम खाना दिया जा रहा था, पिटाई सामान्य बात थी, बड़े बच्चे छोटे बच्चों पर हुकुमत चला रहे थे, कई गुट बन चुके थे जो आपस में लड़ रहे थे तो वहीं शिकायत करने वालों की पिटाई भी की जा रही थी। कई बच्चों ने यौन हिंसा व शोषण की शिकायत की थी तो वहीं उन्हें 100-100 रुपये में नशीली वस्तुएं भी उपलब्ध करवाई जा रही थीं।
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