दुखदः वेंटीलेटर नहीं मिलने से बच्चे की मौत
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पांच साल के अविनाश को निमोनिया था। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोंडा से उसे इस उम्मीद के साथ केजीएमयू के लिए रेफर किए गया था कि उसे वहां बेहतर इलाज मिलेगा और बच्चा ठीक हो जाएगा। अविनाश के परिवारीजन उसे लेकर रविवार सुबह लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे।
जहां उसे भर्ती कर इलाज शुरू कर दिया गया। दोपहर बाद अचानक उसकी तबियत बिगड़ गई। डॉक्टरों ने कहा कि अविनाश की जान बचाने के लिए उसे वेंटीलेटर पर रखना पड़ेगा। ट्रॉमा सेंटर के बाल रोग विभाग के चार वेंटीलेटर पर पहले से मरीज भर्ती थे।
बाल रोग विभाग में पांच में से सिर्फ एक ही वेंटीलेटर काम कर रहा था। जब तक उसे किसी ऐसे दूसरे अस्पताल शिफ्ट किया जाता जहां वेंटीलेटर उपलब्ध हो बच्चे ने दम तोड़ दिया।ऐसा नहीं है कि पीडियाट्रिक विभाग में वेंटीलेटर न होने से सिर्फ अविनाश ने ही दम तोड़ा है।
वेंटीलेटर ना मिलने की वजह से आए दिन दम तोड़ रहे हैं बच्चे
केजीएमयू में आने वाले अधिकतर गंभीर बीमार बच्चे, जिन्हें वेंटीलेटर की जरूरत है आए दिन या तो दम तोड़ रहे हैं या फिर उन्हें निजी अस्पताल लेकर भागना पड़ता है।
हालात ये हैं कि गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए केजीएमयू में पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआईसीयू) की शुरुआत 2001 में की गई थी। 10 बेड के साथ शुरू हुआ पीआईसीयू 14 साल बाद भी उसी स्थिति में है।
10 में से मात्र पांच बेड ही अधिकृत रूप से ‘इंटेंसिव केयर’ के लिए तैयार किए जा सके हैं। इनमें से भी सिर्फ चार पर वेंटीलेटर की सुविधा है लेकिन वर्तमान में इनमें से तीन वेंटीलेटर खराब पड़े हैं।
इसलिए सिर्फ एक ही मशीन ही वहां उपयोग में आ रही है। ज्यादा बच्चों को कृत्रिम सांस की जरूरत पड़ जाए तो उसे या तो एम्बुबैग से सपोर्ट दिया जा रहा है या फिर सीधे किसी और अस्पताल जाने की सलाह दे दी जा रही है।